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नाक या मुंह नहीं, सर्दियों में अपने इस अंग से सांस लेता है कछुआ

प्रकृति काफी अनोखी है और यहां हर जीव को खुद को जिंदा रहने के लिए अनुकूलन का वरदान हासिल है, आज हम आपको कछुओं के बारे में ऐसी जानकारी बताएंगे जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे...

जया पाण्डेय | Dec 04, 2025, 10:29 AM IST

1.सर्दियों में कछुए का जिंदा रहने के लिए अनुकूलन

सर्दियों में कछुए का जिंदा रहने के लिए अनुकूलन
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अगर आपको लगता है कि सर्दी आपको आलसी बना देती है तो कछुओं के बारे में यह अनोखी बात जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. सर्दियों में कछुआ महीनों तालाब के नीचे जमा रहता है और बेहद मुश्किल से हिल-डुल पाता है. इस दौरान वह काफी मुश्किल से सांस ले पाता है और सांस लेने के लिए वह अपने नाक या मुंह का इस्तेमाल नहीं करता. 

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2.बर्फ से ढके तालाब में कैसे सांस लेते हैं कछुए?

बर्फ से ढके तालाब में कैसे सांस लेते हैं कछुए?
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ठंडे इलाकों में तालाब जैसी जगहें सर्दियों में जम जाती हैं. पेंटेड टर्टल जैसे कछुए पानी की सतह पर सांस लेने के लिए नहीं पहुंच पाते क्योंकि सतह बर्फ से ढकी होती है. इस दौरान खुद को जिंदा रखने के लिए वे अपने मेटाबॉलिज्म को काफी धीमा यानी अपनी सामान्य दर के लगभग 5% तक कम  कर लेते हैं.

3.फेफड़ों के बजाए इस प्रक्रिया से श्वसन करते हैं कछुए

फेफड़ों के बजाए इस प्रक्रिया से श्वसन करते हैं कछुए
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सर्दियों में कछुआ फेफड़ों के बाय क्लोएकल श्वसन नामक प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं. क्लोअका सरीसृपों में पीछे का अंग होता है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर मलत्याग या प्रजनन के लिए होता है और इस जगह के आसपास कछुओं में रक्त वाहिकाओं से भरपूर थैलियां होती हैं जिसे बर्सा कहा जाता है. 

4.सर्दियों में कछुओं को ऐसे मिलता है पर्याप्त ऑक्सीजन

सर्दियों में कछुओं को ऐसे मिलता है पर्याप्त ऑक्सीजन
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पानी इन थैलियों में रिसता है और उसमें घुली ऑक्सीजन कछुए के रक्तप्रवाह में फैल जाती है जिसे बट ब्रीदिंग कहा जाता है. यह अनुकूलन कछुओं को सर्दियां खत्म होने तक जीवित रहने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन प्रदान करता है. 

5.इस प्रक्रिया में लैक्टिक एसिड का होता है निर्माण

इस प्रक्रिया में लैक्टिक एसिड का होता है निर्माण
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जब पानी में ऑक्सीजन बहुत कम हो जाती है तो कछुए एनएरॉबिक मेटाबॉलिज्म की ओर रुख कर सकते हैं जिससे ऑक्सीजन के बिना ऊर्जा उत्पन्न होती है. इस प्रक्रिया से लैक्टिक एसिड का निर्माण होता है. 

6.सर्दियों में सांस लेने के लिए हवा पर निर्भर नहीं रहता कछुआ

सर्दियों में सांस लेने के लिए हवा पर निर्भर नहीं रहता कछुआ
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कछुओं में यह अनुकूलन बताता है कि चरम वातावरण में विकास कैसे काम करता है. इन कछुओं ने सांस लेने वाली हवा पर निर्भर रहने के बजाय अपने आस-पास के पानी का उपयोग करना सीख लिया है. यह प्रक्रिया आमतौर पर  पेंटेड टर्टल और स्नैपिंग टर्टल जैसी प्रजातियों में दिखाई देती है जो 100 से अधिक दिनों तक बर्फ के नीचे डूबे रहते हैं. 

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