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धरती पर दर्ज अब तक की सबसे भयंकर आवाज, सदियों तक याद रखी जाएगी वो 'चीख'

क्या आप जानते हैं कि धरती की सबसे तीव्र आवाज कौन सी है? यह आवाज इतनी तेज थी कि इसने कई बार पृथ्वी का चक्कर लगाया और आज भी इसकी 'गूंज' सुनाई देती है...

जया पाण्डेय | Dec 10, 2025, 02:42 PM IST

1.मनुष्य की ध्वनि सहनशीलता

मनुष्य की ध्वनि सहनशीलता
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मनुष्य का कान लगभग 120 डेसिबल तक की ध्वनि को आराम से सुन सकता है. इससे अधिक होने पर कान में दर्द होने लगता है. 150 डेसिबल पर कान के पर्दे फट सकते हैं. लेकिन इतिहास ने इससे कहीं अधिक तेज ध्वनियां देखी और सुनी हैं. ज्वालामुखी विस्फोट, बड़े धमाके या उल्कापिंडों के टकराने की आवाजों की हम इंसान कल्पना भी नहीं कर सकते. 

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2.1883 का 3,000 मील दूर तक सुना गया विस्फोट

1883 का 3,000 मील दूर तक सुना गया विस्फोट
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1883 में एक ज्वालामुखी विस्फोट की आवाज लगभग 3,000 मील दूर तक सुनाई दी थी. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान तोपखाने की कुछ गोलियां इतनी तेज थीं कि युद्धक्षेत्र से मीलों दूर तक इमारतें हिल गईं. 1961 में सोवियत संघ के एक परमाणु परीक्षण से एक ऐसी शॉकवेव पैदा हुई जिसने पृथ्वी का कई बार चक्कर लगाया.

3.प्रकृति और मानव गतिविधियों द्वारा पैदा अत्यधिक ध्वनि

प्रकृति और मानव गतिविधियों द्वारा पैदा अत्यधिक ध्वनि
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ये प्रकृति और मानवीय गतिविधियों द्वारा ध्वनि को चरम स्तर तक ले जाने के कुछ उदाहरण मात्र हैं. लेकिन इतिहास में अब तक की सबसे तेज ध्वनि कौन सी थी? इसके बारे में हम आपको आगे बताने वाले हैं.
 

4.इतिहास की सबसे तेज आवाज: 1883 क्राकाटोआ विस्फोट

इतिहास की सबसे तेज आवाज: 1883 क्राकाटोआ विस्फोट
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इतिहास में अब तक की सबसे तेज आवाज 27 अगस्त 1883 को इंडोनेशिया के क्राकाटोआ (क्राकाटाऊ) ज्वालामुखी विस्फोट से उत्पन्न हुई थी. इस विशाल ज्वालामुखी विस्फोट ने केंद्र में लगभग 310 डेसिबल (dB) की ध्वनि पैदा की जो प्राकृतिक रूप से या मनुष्यों द्वारा उत्पन्न किसी भी दूसरी ध्वनि से कहीं अधिक थी.

5.3,000 मील तक सुनी गई यह ध्वनि

3,000 मील तक सुनी गई यह ध्वनि
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इस विस्फोट की आवाज इतनी शक्तिशाली थी कि यह हजारों किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और इसने पर्यावरण और मानव जीवन को भारी नुकसान पहुंचाया. यह ज्वालामुखी विस्फोट सुंडा जलडमरूमध्य में जावा और सुमात्रा के बीच स्थित क्राकाटोआ द्वीप पर हुआ. इससे उत्पन्न ध्वनि तरंग 4,800 किलोमीटर (3,000 मील) दूर तक सुनी गई और रिपोर्टों में इसकी तुलना पास में हुई तोप की गोलीबारी से की गई.

6.सुनामी, द्वीप का ढहना और 200 मेगाटन ऊर्जा

सुनामी, द्वीप का ढहना और 200 मेगाटन ऊर्जा
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इस विस्फोट के कारण ज्वालामुखी द्वीप का दो-तिहाई हिस्सा ढह गया और 46 मीटर (151 फीट) तक ऊंची विशाल सुनामी लहरें उत्पन्न हुईं जिन्होंने आसपास के तटीय क्षेत्रों को तबाह कर दिया. इससे निकलने वाली ऊर्जा लगभग 200 मेगाटन टीएनटी के बराबर थी जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से लगभग 10,000 गुना अधिक शक्तिशाली थी.

7.ध्वनि तरंग ने पृथ्वी का कई बार चक्कर लगाया

ध्वनि तरंग ने पृथ्वी का कई बार चक्कर लगाया
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ज्वालामुखी विस्फोट के बाद पांच दिनों में ध्वनि तरंग ने पृथ्वी का कई बार चक्कर लगाया और इसे सात बार तक रिकॉर्ड किया गया. इसकी लहरों ने 160 से अधिक गांवों को तबाह कर दिया और 36,000 से अधिक लोगों की जान ले ली. इस विस्फोट ने वैश्विक जलवायु को प्रभावित किया और 25 किलोमीटर ऊंचे राख के विशाल बादल उत्पन्न किए. बाद में इससे अनाक क्राकाटाऊ (क्राकाटोआ का बच्चा) का निर्माण हुआ जो आज भी सक्रिय है.

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