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धरती का सबसे सुनसान कोना जहां गिरते हैं अंतरिक्ष यान, ये है NASA का सुरक्षित ड्रॉप जोन

आज हम आपको धरती के सबसे सुनसान कोने के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे नासा और दूसरी स्पेस एजेंसियां अपने स्पेसक्राफ्ट का मलबा गिराने के लिए इस्तेमाल करती हैं, जानें प्वाइंट नीमो के बारे में विस्तार से...

जया पाण्डेय | Jan 21, 2026, 02:42 PM IST

1.कहां है स्पेसक्राफ्ट का कब्रिस्तान?

कहां है स्पेसक्राफ्ट का कब्रिस्तान?
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हमारी धरती पर एक ऐसी जगह है, जहां इंसानी मौजूदगी लगभग न के बराबर है. यह इलाका इतना अलग-थलग है कि यहां न तो कोई जहाज गुजरता है, न ही कोई द्वीप या आबादी आसपास दिखाई देती है. खास बात यह है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA और दुनिया की दूसरी अंतरिक्ष एजेंसियां इस जगह का इस्तेमाल रिटायर हो चुके स्पेसक्राफ्ट को गिराने के लिए करती हैं. इसी वजह से इसे अनौपचारिक रूप से 'स्पेसक्राफ्ट का कब्रिस्तान' कहा जाता है.

(नोट-सभी तस्वीरें AI Generated हैं.)

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2.प्वाइंट नीमो कहां है?

प्वाइंट नीमो कहां है?
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इस जगह का नाम प्वाइंट नीमो है. यह दक्षिणी प्रशांत महासागर में स्थित है. वैज्ञानिक भाषा में इसे महासागरीय दुर्गमता ध्रुव यानी Oceanic Pole of Inaccessibility कहा जाता है. इसका मतलब है कि यह धरती का वह बिंदु है जो किसी भी भूभाग से सबसे अधिक दूरी पर स्थित है. इसकी स्थिति इतनी अलग-थलग है कि कई बार इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी ISS इसके ऊपर से गुजरने वाले अंतरिक्ष यात्री धरती पर मौजूद किसी भी इंसान की तुलना में इसके ज्यादा करीब होते हैं.

3.धरती का सबसे अलग-थलग स्थान

धरती का सबसे अलग-थलग स्थान
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प्वाइंट नीमो लगभग 48 डिग्री दक्षिण अक्षांश और 123 डिग्री पश्चिम देशांतर पर स्थित है. इसके चारों ओर निकटतम भूमि हर दिशा में करीब 2,600 से 2,700 किलोमीटर दूर है. इनमें ईस्टर आइलैंड के पास मोटू नुई द्वीप, पिटकैर्न द्वीप समूह का ड्यूसी द्वीप और अंटार्कटिका के पास स्थित माहेर द्वीप शामिल हैं.

4.बेहद एकांत में है यह इलाका

बेहद एकांत में है यह इलाका
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महासागरीय मानकों के हिसाब से भी यह इलाका बेहद एकांत माना जाता है. बड़े समुद्री जहाज आमतौर पर इस क्षेत्र से बचते हैं. यहां कोई व्यस्त शिपिंग रूट नहीं है. मौसम संबंधी सिस्टम जैसे तूफान या समुद्री दबाव क्षेत्र अक्सर बिना किसी निगरानी के यहां से गुजर जाते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार इस क्षेत्र का समुद्र जैविक रूप से अपेक्षाकृत विरल है. इसकी वजह समुद्री धाराओं की धीमी गति और पोषक तत्वों की कमी है.

5.आधुनिक तकनीक से कैसे खोजा गया प्वाइंट नीमो?

आधुनिक तकनीक से कैसे खोजा गया प्वाइंट नीमो?
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समुद्र के बीच सबसे दूर स्थित बिंदु को खोजना आसान नहीं था. उपग्रह डेटा और आधुनिक कंप्यूटिंग तकनीक के आने से पहले इसकी सटीक गणना संभव नहीं थी. साल 1992 में क्रोएशियाई-कनाडाई सर्वे इंजीनियर हर्वोज लुकाटेला ने ‘हिप्पार्कस’ नामक एक जियोस्पेशल कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित किया. इस सॉफ्टवेयर ने डिजिटल तटरेखाओं और पृथ्वी की गोलाकार ज्यामिति का इस्तेमाल करते हुए यह गणना की कि कौन-सा बिंदु किसी भी तटरेखा से सबसे अधिक दूरी पर है. इसी प्रक्रिया के जरिए प्वाइंट नीमो की पहचान हुई. इसका नाम मशहूर फ्रेंच लेखक जूल्स वर्ने के काल्पनिक पात्र कैप्टन नीमो के नाम पर रखा गया. इस नाम का किसी वास्तविक मानव उपस्थिति से कोई संबंध नहीं है.

6.स्पेसक्राफ्ट का कब्रिस्तान

स्पेसक्राफ्ट का कब्रिस्तान
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समुद्र की गहराइयों से बहुत ऊपर प्वाइंट नीमो ने एक अनोखी और अहम भूमिका निभाई है. स्पेस एजेंसियां इस क्षेत्र का इस्तेमाल रिटायर हो चुके अंतरिक्ष यानों के नियंत्रित पुनःप्रवेश यानी Controlled Re-entry के लिए करती हैं. अनुमान के मुताबिक हर साल करीब 100 से 200 टन अंतरिक्ष मलबा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है. इसमें से कुछ बड़े अंतरिक्ष यानों को जानबूझकर इसी दूरस्थ समुद्री क्षेत्र की ओर निर्देशित किया जाता है.

7.यहां गिराए जा चुके हैं 260 से ज्यादा अंतरिक्ष यान

यहां गिराए जा चुके हैं 260 से ज्यादा अंतरिक्ष यान
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पिछले लगभग 45 से 50 वर्षों में 260 से ज्यादा अंतरिक्ष यान या उनके बड़े हिस्से प्वाइंट नीमो के आसपास गिराए जा चुके हैं. इनमें रूस का मशहूर मीर स्पेस स्टेशन और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का ऑटोमेटेड ट्रांसफर व्हीकल ‘जूल्स वर्ने’ जैसे बड़े मिशन शामिल हैं. यह फैसला प्रतीकात्मक नहीं बल्कि पूरी तरह व्यावहारिक है. बड़े अंतरिक्ष यान जब वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते हैं तो वे अक्सर पूरी तरह जलकर नष्ट नहीं होते. उनके कुछ हिस्से सतह तक पहुंच सकते हैं. अगर ऐसा किसी आबादी वाले इलाके में हो तो जान-माल का खतरा पैदा हो सकता है.

8.यहां नहीं है कोई निशान

यहां नहीं है कोई निशान
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आज भी प्वाइंट नीमो के ऊपर कोई संकेतक, झंडा या चिन्ह मौजूद नहीं है. वहां पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है और न ही कोई इंसानी गतिविधि दिखाई देती है. इसका महत्व मुख्य रूप से आंकड़ों, मानचित्रों और अंतरिक्ष एजेंसियों की योजना फाइलों तक ही सीमित है. ज्यादातर लोगों के लिए प्वाइंट नीमो एक वास्तविक जगह से ज्यादा एक विचार है. 

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