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केंद्रीय विद्यालय से IIT मद्रास तक पढ़ाई और अब विदेश की तैयारी... जानें Vikram 1 की सॉफ्टवेयर इंजीनियर Spatika Prasad की कहानी

केंद्रीय विद्यालय से आईआईटी मद्रास तक की पढ़ाई ने स्पतिका दास को इस काबिल बनाया कि वह स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम 1 का हिस्सा बनीं. जानें उनकी एजुकेशनल और करियर जर्नी...

Jaya Pandey | Jul 21, 2026, 05:37 PM IST

1. Vikram 1 से क्या है स्पतिका प्रसाद का कनेक्शन?

 Vikram 1 से क्या है स्पतिका प्रसाद का कनेक्शन?
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भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर में बढ़ती उपलब्धियों को लेकर पूरा देश उत्साहित है. स्काईरूट एयरोस्पेस के  Vikram 1 की हर ओर चर्चा हो रही है. इस मिशन से जुड़ी युवा इंजीनियर स्पतिका प्रसाद की कहानी भी बेहद खास है. उन्होंने इस मिशन के लिए मिशन-क्रिटिकल सॉफ्टवेयर के डेवलेपमेंट और टेस्टिंग में योगदान दिया. केंद्रीय विद्यालय में पढ़ने से लेकर इस स्पेस मिशन तक ही उनकी सफलता की कहानी अनोखी है.
(Image Credit: Spatika Prasad Linkedin) 

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2.स्काईरूट एयरोस्पेस में क्या है उनका जॉब रोल?

स्काईरूट एयरोस्पेस में क्या है उनका जॉब रोल?
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स्पतिका प्रसाद ने स्काईरूट एयरोस्पेस में एम्बेडेड सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम किया. विक्रम-1 मिशन के लिए उन्होंने मिशन कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से जुड़े काम में योगदान दिया. आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम की ओर से शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, उनके काम में फ्लाइट सीक्वेंस सॉफ्टवेयर, लॉन्च से पहले किए जाने वाले ग्राउंड चेक और ऑनबोर्ड-इन-द-लूप सिमुलेशन के डेलवेपमेंट और टेस्टिंग से जुड़े काम थे. ये सिस्टम रॉकेट के सॉफ्टवेयर और संबंधित प्रक्रियाओं को उड़ान से पहले जांचने और उनकी तैयारी को परखने में मदद करते हैं.

3.केंद्रीय विद्यालय से लेकर आईआईटी मद्रास तक की पढ़ाई

केंद्रीय विद्यालय से लेकर आईआईटी मद्रास तक की पढ़ाई
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स्पतिका केंद्रीय विद्यालय की स्टूडेंट रही हैं. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने साल 2008 से 2020 तक इस स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने विद्या ज्योति इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन में बीटेक किया. फिर उन्होंने अपने प्रोफेशनल काम के साथ आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम से भी पढ़ाई की.

4.आईआईटी मद्रास का कोर्स कैसे आया काम?

आईआईटी मद्रास का कोर्स कैसे आया काम?
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आईआईटी मद्रास में उन्होंने प्रोग्रामिंग, डेटा साइंस और एनालिटिकल थिंकिंग से जुड़ी अपनी समझ को मजबूत किया. उनका कहना है कि इस शिक्षा ने उनकी समस्या को समझने और जटिल तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद की. उन्होंने यह भी बताया कि प्रोग्रामिंग, डेटा साइंस और एनालिटिकल थिंकिंग की मजबूत नींव ने उनकी समस्या-समाधान क्षमता को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई और उनके इंजीनियरिंग बैकग्राउंड को भी मजबूत किया.
 

5.विक्रम-1 की सफलता से बेहद खुश हैं स्पतिका

विक्रम-1 की सफलता से बेहद खुश हैं स्पतिका
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विक्रम-1 से जुड़े अपने एक्सपीरियंस को शेयर करते हुए स्पतिका ने कहा कि सालों की मेहनत को सफल लॉन्च के रूप में देखना उनके करियर के सबसे गर्व वाले पलों में से एक रहा. उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि किसी स्पेस मिशन की सफलता के पीछे केवल रॉकेट बनाने वाले वैज्ञानिक और इंजीनियर ही नहीं होते, बल्कि सॉफ्टवेयर, एवियोनिक्स, सिमुलेशन और टेस्टिंग पर काम करने वाली पूरी टीम की अहम भूमिका होती है.

6.अब नीदरलैंड्स से कौन-सा कोर्स करेंगी स्पतिका?

अब नीदरलैंड्स से कौन-सा कोर्स करेंगी स्पतिका?
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अब उन्हें नीदरलैंड्स की आइंडहोवन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के मास्टर प्रोग्राम में दाखिला मिला है और वह अगस्त से अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाएंगी. उनकी कहानी उन स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणा है जो मानते हैं कि कंप्यूटर साइंस या प्रोग्रामिंग की पढ़ाई का रास्ता केवल ऐप और वेबसाइट बनाने या बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी पाने तक सीमित है. आज सॉफ्टवेयर और डेटा से जुड़े स्किल्स का इस्तेमाल रॉकेट, उपग्रह, एम्बेडेड सिस्टम और स्पेस मिशन जैसी टेक्निक में भी हो रहा है.

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