साइंस
जया पाण्डेय | Dec 13, 2025, 10:44 AM IST
1.पांच महिला साइंटिस्ट जिनके काम का क्रेडिट पुरुषों को मिला
इतिहास और विज्ञान की किताबों में अक्सर महान पुरुष वैज्ञानिकों का ही जिक्र मिलता है जबकि कई बार उनके पीछे महिलाओं का अहम योगदान छिपा होता है. कुछ मामलों में महिलाओं की खोजों को नजरअंदाज किया गया तो कुछ में उनका काम पुरुष वैज्ञानिकों की उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत कर दिया गया. आइए जानते हैं ऐसी ही पांच वैज्ञानिक महिलाओं की कहानी.
2.पिओन से जुड़े कणों की खोज– बिभा चौधरी
साल 1938 में भारतीय भौतिक विज्ञानी बिभा चौधरी ने कॉस्मिक रे पर काम करते हुए ऐसे पार्टिकल ट्रैक्स रिकॉर्ड किए, जो बाद में सब-एटोमिक कण पिओन से जुड़े पाए गए. यह खोज उस समय बेहद महत्वपूर्ण थी लेकिन भारत में इसे ज्यादा मान्यता नहीं मिली. बाद में Cecil F. Powell ने बेहतर फोटोग्राफिक तकनीक की मदद से पिओन की निर्णायक पहचान की जिसके लिए उन्हें 1950 में नोबेल पुरस्कार मिला. बिभा चौधरी के शुरुआती योगदान को लंबे समय तक हाशिए पर रखा गया.
3.डीएनए डबल हेलिक्स संरचना– रोजालिंड फ्रैंकलिन
1951 में लंदन के किंग्स कॉलेज में काम करते हुए रोजालिंड फ्रैंकलिन ने डीएनए की संरचना पर रिसर्च के दौरान ऐतिहासिक एक्स-रे इमेज 'Photo 51' तैयार की. इस तस्वीर ने डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना को समझने में निर्णायक भूमिका निभाई. उनकी एक सहयोगी ने उन्हें बताए बिना ये तस्वीर दो पुरुषों को दिखा दी. हालांकि फ्रैंकलिन को पूरी व्याख्या तैयार करने में और समय लग रहा था. इसी दौरान जेम्स वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक ने 1953 में अपने निष्कर्ष प्रकाशित कर दिए. फ्रैंकलिन का शोध उसी जर्नल में बाद के पन्नों में छपा जिससे यह भ्रम पैदा हुआ कि उनका काम वॉटसन-क्रिक के निष्कर्षों का समर्थन मात्र था. बाद में 1962 में वॉटसन, क्रिक और विल्किंस को नोबेल पुरस्कार मिला जबकि फ्रैंकलिन को उनका उचित श्रेय नहीं मिल सका.
4.मौसम विज्ञान के उपकरण– अन्ना मणि
1950 के दशक में भारतीय भौतिक विज्ञानी अन्ना मणि ने ओजोन एनालाइज़र, सोलर रेडिएशन सेंसर और विंड-मेज़रमेंट उपकरणों को डिजाइन किया जिससे भारत का मौसम विज्ञान तंत्र काफी मजबूत हुआ. हालांकि उनके काम को संस्थागत स्तर पर उपयोग में लाया गया, लेकिन सार्वजनिक रूप से उन्हें उतनी पहचान नहीं मिली, जितनी अक्सर पुरुष नेतृत्व को मिलती रही. इसके बावजूद अन्ना मणि बाद में भारत मौसम विज्ञान विभाग की डिप्टी डायरेक्टर जनरल बनीं जो उनकी क्षमता का प्रमाण है.
5.मोनोपॉली गेम– एलिजाबेथ मैगी फिलिप्स
आम तौर पर मोनोपॉली गेम का श्रेय चार्ल्स डैरो को दिया जाता है लेकिन इसकी मूल अवधारणा एलिज़ाबेथ मैगी फिलिप्स ने ही तैयार की थी. उन्होंने 1904 में The Landlord’s Game नाम से इसका पेटेंट कराया था. बाद में 1930 के दशक में चार्ल्स डैरो और पार्कर ब्रदर्स ने मोनोपॉली को व्यावसायिक रूप से लोकप्रिय बना दिया और इससे भारी मुनाफा कमाया. उस समय तक बुजुर्ग हो चुकी मैगी को इस सफलता की जानकारी अखबारों के जरिए मिली.
6.डिस्पोजेबल डायपर– मेरियन डोनोवन
1940 के दशक में मेरियन डोनोवन ने लीक-प्रूफ डायपर डिजाइन किया जिससे बच्चों की देखभाल करने वाली महिलाओं का काफी समय और मेहनत बची. उनका आविष्कार आधुनिक डिस्पोजेबल डायपर इंडस्ट्री की नींव बना. हालांकि बाद में कंपनियों ने इस विचार को बड़े पैमाने पर अपनाया लेकिन उत्पादों पर डोनोवन का नाम या योगदान बहुत कम दिखाई दिया. आर्थिक और ब्रांड पहचान का लाभ मुख्य रूप से कॉरपोरेट्स को मिला.
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