साइंस
असम की डॉ. मुरचाना खुसरो को इसरो ने अपने क्षेत्रीय शैक्षणिक केंद्र (आरएसी-एस) कार्यक्रम के तहत फंडेड एक रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है. जानें कौन हैं असम की ये साइंटिस्ट और कैसा है उनका एजुकेशनल करियर
असम की डॉ. मुरचाना खुसरो को इसरो ने अपने क्षेत्रीय शैक्षणिक केंद्र (आरएसी-एस) कार्यक्रम के तहत फंडेड एक रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है. डॉ. खुसरो यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय में फिजिक्स की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. उनके प्रोजेक्ट का टॉपिक है- Multi-Spacecraft Investigation of Solar Wind Dynamics Through Solitary Wave Analysis: Insights from Aditya-L1 Mission. यह भारत के सौर मिशन आदित्य-एल1 के ASPEX (आदित्य सौर पवन कण प्रयोग) और MAG (मैग्नेटोमीटर) पेलोड से साइंटिफिक डेटा का इस्तेमाल करने वाली पूर्वोत्तर भारत की पहली परियोजना है.
डॉ. मुर्चना खुसरो जोरहाट के दानिश नगर की मूल निवासी हैं और वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय में फिजिक्स की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. अगर पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी के जेबी कॉलेज से फिजिक्स में बीएससी की है और फिर गौहाटी यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में एमएससी की है. इसके बाद उन्होंने गौहाटी यूनिवर्सिटी से ही पीएचडी की पढ़ाई पूरी की है. वह सोलर फिजिक्स, मैग्नेटोस्फेरिक प्लाज्मा, एस्ट्रोफिजिकल प्लाज्मा और स्पेसक्राफ्ट डेटा एनालिसिस में एक्सपर्ट हैं.
इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व डॉ. मुरचना खुसरो प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेशन के रूप में काम करेंगी और अहमदाबाद फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी के साइंटिस्ट डॉ. अवीक सरकार को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (को-पीआई) के रूप में सहयोग करेंगे. वे साथ मिलकर वे इंटरनल हीलियोस्फीयर में सौर वायु की गतिशीलता का अध्ययन करेंगे और एकल तरंगों जैसी अरैखिक प्लाज्मा संरचनाओं का पता लगाने और उनका विश्लेषण करने पर फोकस करेंगे.
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