साइंस
अब पाकिस्तान भी भारत की राह पर चलते हुए चंद्रमा की सतह पर अपना पहला रोवर भेजने की तैयारी कर रहा है. जानें इसके जिन्ना-1 रोवर के बारे में और कैसे चीन की मदद से यह 2029 में भरेगा चांद की ओर उड़ान...
भारत के चंद्रयान मिशनों ने चंद्रमा की खोज में देश को दुनिया के बड़े देशों की कतार में खड़ा किया है. भारत ने अपना पहला चंद्र मिशन चंद्रयान 1 साल 2008 में लॉन्च किया था. इसके बाद चंद्रयान 3 ने अगस्त 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा था. अब पाकिस्तान भी भारत की राह पर चलते हुए चंद्रमा की सतह पर अपना पहला रोवर भेजने की तैयारी कर रहा है.
पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी SUPARCO ने अपने पहले लूनर रोवर का नाम जिन्ना-1 रखा है. इस रोवर के चीन के चांग'ई 8 मिशन के साथ चंद्रमा पर भेजे जाने की योजना है और साल 2029 में इसकी लॉन्चिंग हो सकती है. जिन्ना-1 पाकिस्तान का पहला लूनर रोवर होगा, लेकिन यह किसी स्वतंत्र पाकिस्तानी लॉन्च मिशन के जरिए चंद्रमा तक नहीं पहुंचेगा, बल्कि इसे चीन के चांग'ई 8 मिशन के एक सहयोगी पेलोड के तौर पर भेजा जाएगा.
चीन का चांग'ई 8 मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय इलाके में साइंटिफिक रिसर्च और भविष्य में संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ी तकनीकों का परीक्षण करने के लिए तैयार किया जा रहा है. चीन के मुताबिक, इस मिशन में पाकिस्तान समेत कई देशों और संस्थानों के पेलोड शामिल होंगे.
जिन्ना-1 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के इलाके में उतारने की योजना है. यह इलाका वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां स्थायी रूप से छाया वाले गड्ढों में पानी की बर्फ मौजूद होने की संभावना है. हालांकि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव बेहद कठिन भूभाग है और यहां रोवर को तापमान, रोशनी, ढलान और सतह की परिस्थितियों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इस वजह से इस इलाके को भविष्य के चंद्र मिशनों और संभावित मानव मिशनों के लिए अहम माना जाता है.
SUPARCO के मुताबिक, जिन्ना-1 का काम केवल चंद्रमा की सतह पर घूमना नहीं होगा. रोवर चंद्र मिट्टी और सतह की संरचना का अध्ययन करेगा, चंद्रमा की सतह की मैपिंग में मदद करेगा और वहां के वातावरण से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़े जुटाएगा. इसके जरिए प्लाज्मा और रेडिएशन जैसे पहलुओं का अध्ययन भी किया जाएगा. इसके अलावा भविष्य में चंद्रमा पर लंबे समय तक इंसानों और उपकरणों की मौजूदगी के लिए जरूरी तकनीकों और प्रयोगों को भी इस मिशन से जोड़ा गया है.
SUPARCO ने बताया कि इस्लामाबाद के एक समारोह में जिन्ना- 1 नाम का चुनाव देशभर में एक प्रतियोगिता के जरिए किया गया है, जिसमें 4000 प्रस्ताव मिले थे. 7 प्रतिभागियों ने जिन्ना 1 नाम का सुझाव दिया था और विजेता का चुनाव एक लकी ड्रॉ के जरिए किया गया है. 17 साल के बहावलनगर के रहने वाले तैयब करीम को यह नाम सुझाने के लिए विजेता चुना गया है.
SUPARCO के चेयरमैन के मुताबिक जिन्ना 1 नाम पाकिस्तान के कायद-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना को श्रद्धांजलि है और यह पाकिस्तान के संकल्प, प्रगति और अंतरिक्ष के नए क्षितिज की ओर देश के अग्रसर होने का प्रतीक है. पाकिस्तान की ओर से इस मिशन को एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है.