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दिमाग के लिए शराब से 5 गुना ज्यादा खतरनाक है Reels देखना, नई स्टडी में हुआ खुलासा

रील्स देखने से कैसे गड़बड़ हो रही है दिमाग की 'वायरिंग', आपको हैरान करने के लिए काफी है यह स्टडी...

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दिमाग के लिए शराब से 5 गुना ज्यादा खतरनाक है Reels देखना, नई स्टडी में हुआ खुलासा

Reel Addiction सांकेतिक तस्वीर

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क्या काम के बीच आप रील्स देखते हैं? अगर आपका जवाब हां में है तो यह नई स्टडी आपका होश ठिकाने लगा देगी. आपकी यह आदत आपके दिमाग पर शराब से भी 5 गुना ज्यादा खतरनाक असर डाल रही है. इससे आपके दिमाग की 'वायरिंग' गड़बड़ हो रही है जिससे आपका दिमाग तुरंत संतुष्टि और लगातार नएपन के लिए खुद को ढाल लेता है जिससे बिना सोचे-समझे आवेगपूर्ण फैसले लिए जाते हैं. 

तियानजिन नॉर्मल यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर कियान वांग के मुताबिक शॉर्ट-फॉर्म वीडियो की लत एक ग्लोबल पब्लिक हेल्थ के लिए खतरा है. चीन में यूजर्स औसतन प्रतिदिन 151 मिनट वीडियो देखते हैं और 95.5 प्रतिशत इंटरनेट यूजर्स इससे जुड़े रहते हैं. यह आदत न केवल ध्यान, नींद और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि डिप्रेशन के जोखिम को भी बढ़ाता है. कई रिसर्च से यह पता चला है कि शॉर्ट-फॉर्म वीडियो ध्यान की अवधित और यहां तक की शॉर्ट टर्म मेमोरी पर भी नकारात्मक असर डाल सकते हैं.

कैसे लत लगाने वाले होते हैं शॉर्ट वीडियो?

शॉर्ट वीडियो के आदतन इस्तेमाल को ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी से जोड़ा गया है. चूंकि रील लगातार नयापन प्रदान करते हैं इसलिए आप गहन चिंतन करने के बजाय, नवीनता की तलाश में पल-पल भटकते रहते हैं. चूंकि छोटे वीडियो विविध विषय-वस्तु वाले होते हैं इसलिए बार-बार संदर्भ बदलते रहते हैं. यह दिमाग के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को प्रभावित कर सकता है जो मिली जानकारी के आधार पर हमारे विचारों, व्यवहारों और भावनाओं को निर्देशित करता है. लगातार बदलाव के कारण स्क्रॉल करने से जानकारी को धारण करने और उसमें हेरफेर करने की इसकी क्षमता प्रभावित हो सकती है.

MRI स्टडी से पता चला है कि किशोरों में स्क्रीन का ज़्यादा इस्तेमाल उनके पतले कॉर्टेक्स से जुड़ा है इसलिए 20 की उम्र के मध्य तक प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स का विकास अभी भी जारी रहता है इसलिए छोटे वीडियो हमारी फैसले लेने की क्षमता और सूचना के नियम को बिगाड़ सकते हैं.

शॉर्ट वीडियो नींद पर किस तरह असर डालते हैं?

रात में स्क्रीन के संपर्क में रहना खासकर भावनात्मक रूप से उत्तेजित करने वाले कंटेंट देखना शरीर के सर्कैडियन रिदम या स्लीप साइकल को प्रभावित करते हैं. यह हिप्पोकैम्पस को प्रभावित करता है जो मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो सीखने और याददाश्त के लिए ज़िम्मेदार है. हिप्पोकैम्पस नई यादों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है. यह एक अस्थायी स्टोरेज क्षेत्र भी है जहां छोटी यादें, लंबी यादों में बदलती हैं. हिप्पोकैम्पस हमारे परिवेश को समझने, रास्तों को याद रखने और स्थानिक संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

क्या स्क्रॉलिंग की तुलना शराब की लत से की जा सकती है?

हालांकि ऐसा कोई प्रत्यक्ष वैज्ञानिक मापदंड नहीं है जो इन वीडियो से होने वाले दिमागी नुकसान को  शराब या तंबाकू से होने वाले नुकसान के बराबर बताता हो. लेकिन शराब और निकोटीन दोनों ही न्यूरोटॉक्सिक प्रभावों से जुड़े हैं जो ये वीडियो भी पैदा कर रहे हैं.

छोटे-छोटे वीडियो देखने से दिमाग में डोपामाइन का प्रवाह बढ़ जाता है जिससे उसे लगातार नएपन की चाहत रहती है. समय के साथ यह निरंतर ध्यान को कमज़ोर कर देता है और तंत्रिकाओं के रास्तों को उसी तरह से बदल देता है जैसे नशीले पदार्थ बदलते हैं. इससे युवा दिमाग परिपक्व नहीं हो पा रहा है. हालांकि यह शराब या निकोटीन से होने वाले रासायनिक मस्तिष्क क्षति जैसा नहीं है लेकिन प्रेरणा और ध्यान का भटकना एक वास्तविक चिंता का विषय है.

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