साइंस
धरती के बढ़ रहे तापमान का असर पेड़-पौधों पर ज्यादा पड़ रहा है क्योंकि वे इंसानों या जानवरों की तरह एक जगह से दूसरे जगह पर नहीं जा सकते, ऐसे में पेड़-पौधों ने ऐसी क्षमता विकसित कर ली है जो उन्हें हीटवेव से लड़कर विकास करने में मदद कर रहे हैं....
जलवायु परिवर्तन की वजह से पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर पेड़-पौधों पर पड़ रहा है. पेड़ जानवरों की तरह गर्मी से बचने के लिए अपनी जगह नहीं बदल सकते. वे एक ही जगह पर खड़े रहते हैं इसलिए उन्हें बढ़ते तापमान का सामना करने के लिए अपने अंदर ही बदलाव लाने पड़ते हैं. वैज्ञानिकों ने अब एक नई खोज की है जिससे पता चलता है कि पेड़-पौधों ने गर्मी से निपटने के लिए खास क्षमता विकसित कर ली है.
साइंस मैग्जीन नेचर कम्युनिकेशंस में छपी एक स्टडी में बताया गया है कि पौधे गर्मी के दौरान किस तरह अपनी कोशिकाओं के अंदर मौजूद मॉलिक्यूलर सिस्टम की मदद से खुद को नई परिस्थिति के हिसाब से ढाल लेते हैं. इस रिसर्च को अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिसिसिपी के बायोलॉजी के असोसिएट प्रोफेसर योंगजियान किउ के मार्गदर्शन में किया गया. उनकी टीम में 5 साल तक इस पूरी प्रक्रिया को गहराई से समझने की कोशिश की.
जब तापमान सामान्य सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है तो पेड़ अपने शरीर की बनावट बदलने लगते हैं. उनके तने लंबे होने लगते हैं और पत्तियां ऊपर की ओर झुक जाती हैं. इससे सीधी धूप उनपर नहीं पड़ती और वे तेजी से फूल देने लगते हैं. इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में 'थर्मोमॉर्फोजेनेसिस' कहा जाता है. इस स्ट्रैटजी से पेड़ ज्यादा तापमान में भी जिंदा रहते हैं और उनका ग्रोथ भी होता रहता है.
वैज्ञानिकों ने पेड़ों के खास प्रोटीन PIF4 को भी ढूंढ निकाला है. इसका पूरा नाम फाइटोक्रोम-इंटरैक्टिंग फैक्टर-4 है. यह एक ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर है. यह प्रोटीन तय करता है कि पौधे की कौन सी जीन एक्टिव होती और कौन सी नहीं. यह किसी फैक्ट्री के मैनेजर की तरह काम करता है जो सही समय पर सही जीन को एक्टिव करके पेड़ों की ग्रोथ को कंट्रोल करता है.
योंगजियान किउ के मुताबिक अगर किसी पौधे से PIF4 प्रोटीन को पूरी तरह से हटा दिया जाए तो वह गर्मी के प्रति सामान्य प्रतिक्रिया नहीं दे पाता. ऐसे पौधों का तना नहीं बढ़ता और पत्तियों के आकार में भी कोई बदलाव नहीं होता. उनमें गर्म वातावरण के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता भी नहीं बचती. जब साइंटिस्ट ने PIF4 के डीएनए से जुड़कर जीन को एक्टिव करने और दूसरे प्रोटीन को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने की क्षमता को इन-एक्टिव कर दिया और इसमें बदलाव करके इस प्रोटीन को ऐसे पौधों में डाला जिसमें सामान्य PIF4 मौजूद नहीं था, तब काफी हैरान करने वाली बात सामने आई.
वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि बदला हुआ PIF4 काम नहीं करेगा और पौधे गर्मी के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देंगे. लेकिन नतीजा कुछ और ही निकला. अब पौधे पहले की तरह ही गर्मी के अनुसार खुद को ढालने में सफल रहे. उनके तने बढ़े, पत्तियों में बदलाव आया और विकास की प्रक्रिया भी सामान्य बनी रही. इसके बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि PIF4 का सबसे बड़ा काम सिर्फ डीएनए से जुड़ना नहीं है बल्कि दूसरे प्रोटीन के साथ मिलकर बड़ा मॉलिक्यूलर ग्रुप बनाना है. जब ऐसा होता है तब दूसरे प्रोटीन PIF4 की कमी को पूरा कर देते हैं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर PIF4 और उससे जुड़े प्रोटीन के पूरे नेटवर्क को अच्छी तरह समझ लिया जाए, तो भविष्य में ऐसी नई फसलें विकसित की जा सकती हैं जो अधिक तापमान में भी ग्रो हो सके और बेहतर उत्पादन दें.