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अब गाय-भैंस नहीं पौधे बनाएंगे दूध वाला प्रोटीन, वैज्ञानिकों की नई खोज बदल देगी डेयरी की दुनिया

अगर आप वीगन हैं तो वैज्ञानिकों की ये नई खोज आपको खुश कर सकती है. वैज्ञानिकों ने पौधों से डेयरी वाले प्रोटीन का उत्पादन करवाया है. इस कदम से एनिमल क्रूएलिटी पर लगाम लगेगी...

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अब गाय-भैंस नहीं पौधे बनाएंगे दूध वाला प्रोटीन, वैज्ञानिकों की नई खोज बदल देगी डेयरी की दुनिया

वैज्ञानिकों ने पौधों में बनाया डेयरी वाला प्रोटीन. (Image: AI)

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  • वैज्ञानिकों ने पौधों से निकाला डेयरी वाला प्रोटीन
  • अब वीगन लोगों को भी मिलेगा डेयरी प्रोटीन
  • पौधे करेंगे बीटा-केसीन का उत्पादन
  • वैज्ञानिकों ने अरेबिडोप्सिस के पौधों से बनवाया बीटा-केसीन

दुनिया भर में प्लांट-बेस्ड और वीगन फूड की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. वीगन लोग केवल मांस ही नहीं, बल्कि दूध, दही, पनीर, मक्खन और दूसरे एनिमल-बेस्ड डेयरी प्रोडक्ट का सेवन नहीं करते. दूध में मौजूद प्रोटीन खासकर पनीर, दही और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट शरीर के पोषण के लिए जरूरी माने जाते हैं. ऐसे में वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसी तकनीक विकसित करने में जुटे हुए हैं जिससे डेयरी प्रोटीन पौधों में तैयार किया जा सके. अब इस दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी मिली है.

पौधे कर सकते हैं बीटा-केसीन का उत्पादन 

यरुशलम में हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोजा है, जिससे पौधे गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रमुख प्रोटीन बीटा-केसीन का उत्पादन कर सकते हैं. यह रिसर्च जाने-माने साइंस जर्नल फ्रंटियर्स इन प्लांट साइंस में छपा है.  वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में बिना गायों पर निर्भर हुए असली डेयरी प्रोटीन बनाने का रास्ता खोल सकती है. इससे पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा.

बीटा-केसीन है दूध का सबसे अहम प्रोटीन

दूध में मौजूद कई तरह के प्रोटीनों में केसीन सबसे अहम होता है. यह प्रोटीन दूध को पोषण देता है और पनीर बनने की प्रक्रिया में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. अब तक यह प्रोटीन सिर्फ गाय जैसे दूध देने वाले जानवरों से ही मिलता था. वैज्ञानिकों की कोशिश थी कि इस प्रोटीन को पौधों के अंदर तैयार किया जाए जिससे डेयरी इंडस्ट्री को एक नया विकल्प मिल सके. 

कैसे वैज्ञानिकों को हाथ लगी सफलता?

प्रोफेसर ओडेड शोसेयोव  और उनकी टीम ने मॉडल पौधे अरेबिडोप्सिस के बीजों में आनुवंशिक बदलाव करके उनमें गाय के दूध वाला बीटा-केसीन प्रोटीन बनवाया. इसके लिए उन्होंने इस प्रोटीन को पौधों के एक प्राकृतिक तेल-प्रोटीन ओलियोसिन के हिस्से से जोड़ा, जिससे यह पौधे की कोशिकाओं में सुरक्षित तरीके से जमा हो सके. शुरुआत में वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि यह प्रोटीन पौधे की कोशिकाओं के अंदर मौजूद प्रोटीन स्टोरेज वैक्यूल्स में जमा होगा. लेकिन जब उन्होंने एडवांस्ड इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से कोशिकाओं की जांच की तो नतीजे उम्मीद से बिल्कुल अलग निकले.

कब तक मार्केट में आ जाएगा प्लांट बेस्ट डेयरी प्रोटीन?

वैज्ञानिकों ने पाया कि बीटा-केसीन अपनी तय जगह पर पहुंचने के बजाए कोशिकाओं के अंदर प्रोटीन रिच स्ट्रक्चर बनाने लगा. ये स्ट्रक्चर दूध में पाए जाने वाले केसीन माइसेल्स जैसी दिखाई दीं और पौधे के छोटे-छोटे तेल कणों के बेहद करीब जमा हो गईं. सबसे खास बात यह रही कि इस प्रक्रिया का पौधे के बीजों के विकास या अंकुरण पर कोई निगेटिव असर नहीं भी पड़ा. 

वैज्ञानिक अब इस तकनीक को सिर्फ लैब्स तक सीमित नहीं रखना चाहते बल्कि वे कुसुम जैसे तिलहन पौधों में भी डेयरी प्रोटीन तैयार करने में सफलता हासिल कर चुके हैं. अभी यह टेक्निक शुरुआती चरण में है और मार्केट में प्लांट बेस्ड डेयरी प्रोटीन आने में अभी समय लगेगा. लेकिन फिर भी इसे एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि माना जा रहा है.

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