साइंस
वैज्ञानिकों ने पूर्वी खासी हिल्स जिले के मावलिंगोट गांव में लिंक्स मकड़ी (Lynx Spider) की एक नई प्रजाति की खोज की है. जानें यह मकड़ी क्यों खास है और इसका पाया जाना बड़ी उपलब्धि क्यों मानी जा रही है...
मेघालय में वैज्ञानिकों को जैव विविधता के मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी है. साइंटिस्ट ने यहां पूर्वी खासी हिल्स जिले के मावलिंगोट गांव में लिंक्स मकड़ी (Lynx Spider) की एक नई प्रजाति की खोज की है. इसे हमातलिवा मावलिंगोट(Hamataliwa Mawlyngot) नाम दिया गया है. इस मकड़ी को जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और कलकत्ता यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट की एक टीम ने खोजा है. इससे जुड़ी रिसर्च स्टडी साइंस मैग्जीन नेशनल एकेडमी साइंस लेटर्स में छपी है. इस खोज ने भारत की समृद्ध जैव विविधता पर दुनिया का ध्यान खींचा है.
यह नई मकड़ी ऑक्सीओपिडे परिवार से संबंधित है. ऑक्सीओपिडे को लिंक्स मकड़ियों का परिवार कहा जाता है जो अपनी तेज नजर, फुर्ती और शिकार करने की अनोखी शैली के लिए जानी जाती है. जहां दुनिया की अधिकतर मकड़ियां अपने शिकार को पकड़ने के लिए जाल बुनती हैं, ये मकड़ी ऐसा नहीं करती बल्कि पत्तियों, घास और झाड़ियों पर छिपकर बैठती है और अपनी तेज नजर से कीड़ों का पता लगाकर सीधा उसपर हमला बोलती है. यह एक एक्टिव प्रिडेटर है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक, हमातलिवा मावलिंगोट आकार में बेहद छोटी है और इसका आकार एक इंसानी नाखून से भी कम है. यह मकड़ी मेघालय की पहाड़ी ढलानों पर उगने वाली झाड़ियों और वनस्पतियों में बड़ी संख्या में पाई गई है. इस मकड़ी को खोजा जाना इसलिए भी अहम है क्योंकि मेघालय भारत-बर्मा जैव विविधती हॉटस्पॉट का हिस्सा है. इसे दुनिया के सबसे समृद्धा और संवेदनशील इकोलॉजिकल जोन में गिना जाता है.
इस स्डटी को साइंटिस्ट सौविक सेन, उपासना भट्टाचार्य और पुथूर पट्टम्मल सुधिन ने तैयार किया है. मेघालय दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का घर है. यहां की अनोखी जलवायु, घने जंगल और पहाड़ी भूभाग कई ऐसी प्रजातियों को आश्रय देते हैं जो दुनिया के दूसरे हिस्सों में नहीं पाई जातीं. हमातलिवा मावलिंगोट की खोज इस बात का सबूत है कि भारत के नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में अभी भी जैव विविधता के ऐसे रहस्य छिपे हुए हैं जिन्हें साइंटिफिक रिसर्च की जरूरत है. आने वाले समय में यहां से और नई-नई प्रजातियों की पहचान की जा सकती है.