साइंस
NASA Aliens News: नासा का यह शोध एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुआ है. नासा के इस अध्ययन ने एक बार फिर एलियंस को चर्चा का विषय बना दिया है.
एलियंस को लेकर कई दावे किए जाते हैं. कुछ लोग एलियंस को देखने का दावा करते हैं, तो कुछ एलियंस द्वारा अपहरण किए जाने का. लेकिन अभी तक यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ है. इस बीच, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों के शोध से एलियंस के बारे में बड़ी जानकारी मिली है. जिसने हलचल मचा दी है.
नासा के वैज्ञानिकों के नए शोध से पता चला है कि एलियन सभ्यताएं हमारे अंतरिक्ष से आने वाले संकेतों को आसानी से सुन सकती हैं, क्योंकि मंगल रोवर्स और ऑर्बिटर्स द्वारा भेजे गए कुछ रेडियो सिग्नल अंतरिक्ष में बिखरे हुए होते हैं. ये सिग्नल अनिश्चित काल तक रह सकते हैं और अगर कोई एलियन पृथ्वी-मंगल संरेखण रेखा पर हो तो उन्हें पकड़ा जा सकता है.
जब वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर रोवर्स को निर्देश भेजते हैं, तो शक्तिशाली रेडियो सिग्नल प्रेषित होते हैं. लेकिन मंगल ग्रह सभी सिग्नलों को रोक नहीं सकता. ग्रह के छोटे आकार के कारण, कुछ सिग्नल बचकर अंतरिक्ष में बिखर जाते हैं. नासा के डीप स्पेस नेटवर्क लॉग्स के विश्लेषण से पता चलता है कि ज़्यादातर सिग्नल मंगल ग्रह की ओर और फिर सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदुओं की ओर जाते हैं.
ये ट्रांसमिशन अंतरिक्ष यान नियंत्रण के लिए होते हैं, लेकिन अगर कोई एलियन सभ्यता हमारे सौर मंडल के किनारे पर है, तो ये सिग्नल उनके रडार द्वारा पकड़े जा सकते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे संरेखण 23 प्रकाश वर्ष के दायरे में स्थित स्थानों पर केंद्रित होने चाहिए. पिछले 20 वर्षों के डेटा से पता चलता है कि 77 प्रतिशत संभावना है कि एलियंस हमारे ट्रांसमिशन के रास्ते में हों.
यह अध्ययन नासा की जेट प्रोपल्शन लैब के सहयोग से किया गया था. साइंस अलर्ट के अनुसार, यह शोध एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुआ है. नासा के इस अध्ययन ने एक बार फिर एलियंस को चर्चा का विषय बना दिया है.
यह शोध सुझाता है कि हमें एलियंस की खोज के लिए ग्रहों की उन संरेखण स्थितियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जहां संकेत सबसे प्रबल होते हैं. जैसे हम मंगल ग्रह पर संकेत भेजते हैं, वैसे ही एलियंस भी पड़ोसी ग्रहों पर संकेत भेज सकते हैं. अगर एलियंस अंतरिक्ष यान को संकेत भेजते हैं, तो हम उनके फैलाव का पता लगा सकते हैं. उनके संकेतों को किनारे-किनारे संरेखण स्थितियों पर भी पता लगाया जा सकता है.
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