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NASA का बिग अलर्ट! अगला Solar Storm मचा सकता है बड़ी तबाही, खतरे में सैटेलाइट और बिजली ग्रिड

नासा के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक स्टडी की है. इसमें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र मैग्नेटोस्फियर की प्रतिक्रिया का विश्लेषण किया गया है. समझें भविष्य में अगर शक्तिशाली सौर तूफान आया तो कैसे खतरे में पड़ सकती है धरती...

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NASA का बिग अलर्ट! अगला Solar Storm मचा सकता है बड़ी तबाही, खतरे में सैटेलाइट और बिजली ग्रिड

Solar Storm को लेकर बड़ा अलर्ट! (Image Credit: NASA)

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  • पहले से ज्यादा खतरनाक होंगे सौर तूफान
  • पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की प्रतिक्रिया को एनालाइस कर वैज्ञानिकों ने लगाया पता
  • लगभग 11 साल के सौर चक्र से गुजरता है सूरज
  • उपग्रहों, जीपीएस सेवाओं, रेडियो संचार के लिए होगा खतरा

क्या भविष्य का सौर तूफान पहले के अनुमान से ज्यादा खतरनाक हो सकता है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए नासा के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक स्टडी की है. इसमें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र मैग्नेटोस्फियर की प्रतिक्रिया का विश्लेषण किया गया है. लंबे समय से यह माना जाता था कि बेहद शक्तिशाली सौर तूफानों के दौरान भी पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की प्रतिक्रिया की एक अधिकतम सीमा होती है. लेकिन नई स्टडी में पता चला है कि अगर भविष्य में बहुत शक्तिशाली तूफान आते हैं तो उसका असर वैज्ञानिकों के पुराने अनुमान से कहीं ज्यादा भयानक हो सकता है. यह स्टडी साइंस की जानी-मानी मैग्जीन नेचर में छपी है.

नई स्टडी में किस बात का हुआ खुलासा?

वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले विकसित किए गए कई मॉडल तीव्र सौर तूफानों के प्रभाव का सही आकलन नहीं कर पाए थे. अब पता चला है कि एक्सट्रीम स्पेस वेदर के दौरान पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र पहले की अपेक्षा अधिक तीव्र प्रतिक्रिया दे सकता है. सूर्य लगभग 11 साल के सौर चक्र से गुजरता है और वर्तमान समय में वह अपने  सोलर मैक्सिमम चरण के आसपास है. इस दौरान सूर्य पर सौर ज्वालाएं और कोरोनल मास इजेक्शन की घटना ज्यादा होती है. इनमें से सिर्फ वे विस्फोट ही पृथ्वी के लिए खतरा बनते हैं जो हमारे ग्रह की दिशा में आते हैं. 

यह शैक्षिक आरेख दर्शाता है कि माप में अनिश्चितता पृथ्वी के चुंबकमंडल से संबंधित डेटा को कैसे विकृत कर सकती है। इसमें दो तुलनात्मक रेखाचित्रों के साथ एक विस्तृत अंतरिक्षीय दृश्य दिखाया गया है। ऊपर दाईं ओर: पृथ्वी को नीली चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के एक जटिल जाल से घिरा हुआ दिखाया गया है। दाईं ओर: एक चमकीली नीली, घुमावदार रेखा "बो शॉक" को दर्शाती है, जो "मैग्नेटोशीथ" नामक नारंगी-लाल अशांत क्षेत्र में परिवर्तित होती है। अंतरिक्ष यान की स्थिति: "विंड" अंतरिक्ष यान "सौर पवन" धारा में बाईं ओर स्थित है, जो "मापी गई सौर पवन शक्ति" लेबल से जुड़ा है। "थेमिस" अंतरिक्ष यान पृथ्वी के करीब, चुंबकीय आवरण के भीतर स्थित है, जिसे "संशोधित सौर पवन शक्ति" के रूप में दर्शाया गया है। बायां ग्राफ: "पृथ्वी की प्रतिक्रिया [mV/m]" को "मापी गई सौर पवन शक्ति [mV/m]" के विरुद्ध दर्शाता है। एक नीली रेखा शुरू में एक सीधी रेखा में चलती है, लेकिन फिर सपाट हो जाती है, जिस पर "माप अनिश्चितता के कारण संतृप्ति का भ्रम" लिखा है। दायां ग्राफ: "पृथ्वी की प्रतिक्रिया [mV/m]" को "संशोधित सौर पवन शक्ति [mV/m]" के विरुद्ध दर्शाता है। एक गुलाबी रेखा तिरछे रूप से लगातार ऊपर की ओर बढ़ती है, जिसे "वास्तविक रैखिक प्रतिक्रिया" के रूप में दर्शाया गया है।

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बेहद शक्तिशाली सौर तूफान का धरती पर क्या होगा असर?

अगर भविष्य में बेहद शक्तिशाली सौर तूफान पृथ्वी से टकराता है तो उसका असर उपग्रहों, जीपीएस सेवाओं, रेडियो संचार, विमानन प्रणाली और बिजली ग्रिड पर पड़ सकता है. इससे हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो संचार बाधित हो सकता है. उपग्रहों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और अंतरिक्ष में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एडिएशन का खतरा भी बढ़ सकता है.

कौन करता है सूर्य की निगरानी?

नासा और अमेरिका की नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) सूर्य की लगातार निगरानी करते हैं. इसके लिए खास स्पेसक्राफ्ट और सोलर ऑब्जर्वेशन की मदद ली जाती है. ये सौर ज्वालाओं और कोरोनल मास इजेक्शन पर नजर रखते हैं. इस डेटा के आधार पर ही स्पेस वेदर का पूर्वानुमान लगाया जाता है जिससे जरूरत पड़ने पर सैटेलाइट ऑपरेटर, पॉवर कंपनी और दूसरे संबंधित सर्विसेज को पहले से चेतावनी दी जा सके. 

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