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एक बार फिर अंतरिक्ष में लहराएगा तिरंगा, शुभांशु शुक्ला देंगे मिशन Axiom-4 को अंजाम, जानिए क्यों है ये खास

10 जून 2025 को भारत एक बार फिर से इतिहास रचने जा रहा है. बता दें कि Axiom-4 मिशन के तहत शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में कदम रखने जा रहे है. वे इस मिशन के स्पेसक्राफ्ट के पायलट हैं.

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एक बार फिर अंतरिक्ष में लहराएगा तिरंगा, शुभांशु शुक्ला देंगे मिशन Axiom-4 को अंजाम, जानिए क्यों है ये खास

Axiom-4

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10 जून 2025 को भारत एक नया इतिहास रचने जा रहा है. एक बार फिर से भारत के लिए ये गौरव का झण है. इस दिन ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए एक्सिओम-4 मिशन का नेतृत्व करेंगे. वे अपने तीन साथियों के साथ इस मिशन को अंजाम देंगे और अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे. Axiom-4 मिशन भारत के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह 1984 में राकेश शर्मा की ऐतिहासिक उड़ान के 4 दशक बाद किसी कोई और भारतीय यह उपलब्धि हासिल करेगा.

41 बर्षो बाद ऐसा होने जा रहा है
शुभांशु शुक्ला की ये सफल उड़ान भारतीय वैज्ञानिक प्रगति को नई दिशा प्रदान करेंगी. अगर मौसम अनुकूल रहा, तो 10 जून 2025 को स्पेसएक्स का फाल्कन 9 रॉकेट फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा. इस रॉकेट में 4 अंतरिक्ष यात्री होंगे. इसमें ही भारतीय वायु सेना के प्रतिष्ठित पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी शामिल होंगे. 41 वर्षों बाद वे ऐसा करने वाले पहले भारतीय बनने जा रहे हैं. इस मिशन का संचालन ह्यूस्टन स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी एक्सिओम स्पेस कर रही है. 

एक्सिओम मिशन 4 (Ax-4)
यही कारण है कि इस मिशन को ‘एक्सिओम मिशन 4 (Ax-4)’ नाम दिया गया है. शुभांशु शुक्ला इस मिशन के पायलट होंगे. यानि की इस मिशन में स्पेसक्राफ्ट को वही चालाएंगे. इस मिशन की अगुवाई NASA की पूर्व वैज्ञानिक पेगी व्हिस्टन करेंगी. वहीं एलन मस्क की स्पेसएक्स इस मिशन के लिए क्रूड्रैगन स्पेसक्राफ्ट देगी. NASA इन अंतरिक्षयात्रियों की ISS में सुविधा, उनके रहने समेत बाकी सुविधाएँ देगा. बता दें कि एक्सिओम इससे पहले भी इस तरह के तीन मिशन सफलतापूर्वक पूरे कर चुका है. 

14 दिन वहां रुकेंगे
ये चारों अंतरिक्ष यात्री यहां पहुंचने के बाद 14 दिन तक रुकेंगे और रिसर्च करेंगे. एक्सिओम-4 मिशन मानव शरीर विज्ञान, पृथ्वी अवलोकन, भौतिक विज्ञान और अंतरिक्ष कृषि जैसे क्षेत्रों में 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है.

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