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मंगल पर दिखी 'मधुमक्खी के छत्ते' जैसी रहस्यमयी आकृति, NASA की नई तस्वीर देख साइंटिस्ट भी ढूंढ रहे जवाब!

नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह से कुछ ऐसी तस्वीरें भेजी हैं जिसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है, जानें लाल ग्रह पर कैसे बनी मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना...

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मंगल पर दिखी 'मधुमक्खी के छत्ते' जैसी रहस्यमयी आकृति, NASA की नई तस्वीर देख साइंटिस्ट भी ढूंढ रहे जवाब!

मंगल ग्रह पर मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना ने वैज्ञानिकों को चौंकाया. (Image Credit: NASA)

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  • मंगल ग्रह पर मिली मधुमक्खी  के छत्ते जैसी संरचना
  • 2012 से मंगल के गेल क्रेटर में एक्टिव है क्यूरियोसिटी रोवर
  • वैज्ञानिक इस संरचना के बनने के पीछे हर संभावनाओं की कर रहे तलाश
  • इस क्षेत्र में मिले हनीकॉम्ब स्ट्रक्चर के पत्थर

मंगल ग्रह वैज्ञानिकों के लिए आज भी रहस्य से भरा हुआ है. हर नए मिशन के साथ इस लाल ग्रह को लेकर ऐसी जानकारियां सामने आती हैं जो आम इंसानों के साथ साइंटिस्ट को भी हैरान कर देती हैं. अब नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल की सतह पर एक अनोखी संरचना की तस्वीरें भेजी हैं. ये दिखने में बिलकुल मधुमक्खी के छत्ते जैसी लगती है. 

2012 से मंगल के गेल क्रेटर में एक्टिव है क्यूरियोसिटी रोवर 

क्यूरियोसिटी रोवर अगस्त 2012 से मंगल ग्रह के गेल क्रेटर में एक्टिव है और वहां की चट्टानों, मिट्टी और जलवायु की स्टडी कर रहा है. हाल ही में रोवर ने मंगल के उस क्षेत्र का करीब से निरीक्षण किया जिसे पहले सिर्फ मंगल की कक्षा में मौजूद ऑर्बिटर से देखा गया था. इस दौरान उसे सतह पर कई समान आकार की पॉलीगोनल आकृतियां दिखाई दीं. ये आकृतियां मिलकर हनीकॉम्ब या जालीदार डिजाइन जैसी दिखाई देती हैं. 

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह संरचना किसी जीव ने नहीं बनाई बल्कि यह प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं की वजह से बना होगा. उनके मुताबिक इस तरह का पॉलीगोनल पैटर्न मिट्टी के बार-बार सूखने और सिकुड़ने, खनिजों के जमाव या चट्टानों में लंबे समय तक हुई दरारों जैसी प्रक्रियाओं की वजह से बन सकता है. हालांकि, वैज्ञानिक इस खास संरचना के बनने की वजह को कंफर्म करने के लिए अभी स्टडी में जुटे हुए हैं. 

इस इलाके में मिले मधुमक्खी के छत्ते जैसी बनावट वाले पत्थर

इस क्षेत्र में मधुमक्खी के छत्ते जैसी बनावट वाले कई गहरे रंग के पत्थर भी मिले हैं, जिससे वैज्ञानिकों की जिज्ञासा और बढ़ गई है. अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ये पत्थर आसपास की चट्टानों से टूटकर यहां पहुंचे या किसी उल्कापिंड के टकराने से बने हैं. वैज्ञानिक इन पत्थरों के रासायनिक और खनिजों पर एनालिसिस करके इन पत्थरों के स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. बता दें, इससे पहले भी मंगल पर कुछ गहरे रंग की चट्टानों में निकल और लोहे जैसे तत्व मिले हैं. मंगल ग्रह पर इन तत्वों की मात्रा कम होती है लेकिन उल्कापिंडों में ये दोनों काफी मात्रा में पाए जाते हैं. 

नासा का क्यूरियोसिटी रोवर लगातार मंगल के ऐसे इलाकों की स्टडी कर रहा है, जहां कभी अरबों साल पहले पानी मौजूद होने के संकेत मिले हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की अनोखी संरचनाओं और चट्टानों के अध्ययन से न सिर्फ मंगल ग्रह के भूगर्भीय इतिहास के बारे में पता चलेगा, बल्कि पहले इस ग्रह का वातावरण और जलवायु कैसी थी, इसके बारे में भी जानकारी मिलने की उम्मीद है. 

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