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अंतरिक्ष में मिला अदृश्य रास्ता! ब्रह्मांड के 'लाइटहाउस' ने खोला करोड़ों साल पुराना राज

वैज्ञानिकों ने पहली बार एक तेजी से घूमने वाले पल्सर के आसपास मौजूद मैग्नेटिक फील्ड की डायरेक्ट मैपिंग तैयार की है. जानें इसे क्यों माना जा रहा है बड़ी उपलब्धि और इससे हासिल क्या होगा...

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अंतरिक्ष में मिला अदृश्य रास्ता! ब्रह्मांड के 'लाइटहाउस' ने खोला करोड़ों साल पुराना राज

पल्सर PSR J1101−6101 पर हुई स्टडी. (Image Credit: NASA)

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  • वैज्ञानिकों ने पल्सर के आसपास मौजूद मैग्नेटिक फील्ड से डायरेक्ट मैपिंग की तैयार
  • नासा के इमेजिंग एक्स-रे पोलारिमेट्री एक्सप्लोरर से मिली मदद
  • द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में छपी यह स्टडी
  • सुपरनोवा विस्फोट के बाद बचा हुआ घना अवशेष होते हैं पल्सर

ब्रह्मांड लगातार वैज्ञानिकों को नई-नई खोजों से चौंका रहा है. इस बार एस्ट्रोनॉमर्स ने पहली बार एक तेजी से घूमने वाले पल्सर के आसपास मौजूद मैग्नेटिक फील्ड की डायरेक्ट मैपिंग तैयार की है. नासा के इमेजिंग एक्स-रे पोलारिमेट्री एक्सप्लोरर (IXPE) मिशन की मदद से यह उपलब्धि हासिल की गई. इस स्टडी से यह समझने में सफलता मिली है कि आखिर पल्सर से निकलने वाले ज्यादा एनर्जेटिक पार्टिकल्स अंतरिक्ष में किस दिशा में और कैसे ट्रैवल करते हैं. यह स्टडी जानी-मानी साइंस जर्नल 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल' में छपी है. 

इसमें पल्सर PSR J1101−6101 पर स्टडी की गई. इसे अपनी अनोखी बनावट की वजह से लाइटहाउस पल्सर भी कहा जाता है. वैज्ञानिकों ने इसके आसपास के मैग्नेटिक फील्ड की स्टडी की और यह पाया कि इससे निकलने वाले हाई-एनर्जी पार्टिकल्स मिल्की वे के मैग्नेटिक फील्ड की रेखाओं के समानांतर आगे बढ़ते हैं. नासा के अनुसार यह खोज इस बात को लेकर नई समझ देती है कि आखिर ब्रह्मांड के सबसे एक्सट्रीम ऑब्जेक्ट, पार्टिकल्स को स्पीड ऑफ लाइट तक कैसे पहुंचाते हैं. 

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क्या होता है पल्सर?

पल्सर न्यूट्रॉन तारे होते हैं. ये किसी विशाल तारे के सुपरनोवा विस्फोट के बाद बचा हुआ बेहद घना अवशेष होते हैं. इनका आकार तो छोटा होता है, लेकिन इनका द्रव्यमान बहुत ज्यादा होता है. ये बहुत तेजी से घूमते हैं और इनके शक्तिशाली मैग्नेटिक पोल्स से एक्स-रे और दूसरी तरह के रेडिएशन निकलते हैं. जब ये किरणें धरती की ओर आती हैं तो बिलकुल समुद्र के लाइटहाउस की घूमती हुई रोशनी की तरह दिखाई देती हैं. इस वजह से इन्हें कॉस्मिक लाइटहाउस भी कहा जाता है. 

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लाइटहाउस नेबुला की स्टडी से वैज्ञानिकों ने क्या पता लगाया?

PSR J1101−6101 लाइटहाउस नेबुला के केंद्र में स्थित है और यह प्रति सेकंड लगभग 15.9 बार घूमता है. सुपरनोवा विस्फोट के दौरान मिले शक्तिशाली झटके की वजह से यह स्पेस में बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है. ट्रैवल के दौरान यह अपने पीछे एक्स-रे में चमकने वाली लंबी पूंछ छोड़ता है और इसके साथ एक फिलामेंट भी दिखाई देता है जो इसकी स्पीड की दिशा में वर्टिकल फैला हुआ है. वैज्ञानिक लंबे समय से मानते थे कि यह फिलामेंट उन एनर्जेटिक इलेक्ट्रॉन्स से बना है, जो आकाशगंगा की मैग्नेटिक फील्ड के साथ आगे बढ़ रहे हैं. अब इस स्टडी ने इस बात को और कंफर्म कर दिया है. 

Scientists have successfully measured the magnetic field of the Lighthouse pulsar’s nebula using NASA’s IXPE. Their measurements confirm the theory that high-energy particles escape along the galaxy’s magnetic field lines. This composite image contains X-ray data from IXPE in blue (highlighted in the inset), the Chandra X-ray Observatory in purple, and radio data from CSIRO in green. The starfield is optical data from the 2MASS optical survey.

इस रिसर्च के ऑथर और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर जैक डिंसमोर के मुताबिक, वैज्ञानिक यह जानना चाहते थे कि क्या फिलामेंट मैग्नेटिक फील्ड को फॉलो करते हैं. इसके लिए IXPE ने एक्स-रे लाइट के पोलराइजेशन को मापा.  पोलराइजेशन की स्टडी से मैग्नेटिक फील्ड के डायरेक्शन का पता लगाया जा सकता है. स्टडी में सामने आया कि मैग्नेटिक फील्ड उस दिशा में आगे बढ़ा हुआ है, जिस दिशा में यह लंबा फिलामेंट लिखाई देता है. इससे यह कंफर्म हुआ कि हाई-एनर्जेटिक पार्टिकल्स असल में मैग्नेटिक फील्ड की रेखाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

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