कुलदीप पंवार | Sep 17, 2025, 10:06 AM IST
1.सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा

देश में इनकम टैक्स देने की व्यवस्था करीब 165 साल पहले ब्रिटिश राज में इनकम टैक्स लॉ, 1860 के तहत शुरू की गई थी, जिसमें 200 रुपये की एनुअल इनकम से ज्यादा कमाई करने वाले हर शख्स से इनकमटैक्स वसूलने की व्यवस्था थी. यह छूट अब बढ़कर करीब 12 लाख रुपये सालाना वित्त वर्ष 2025-26 के लिए की गई है. भारत की आजादी के समय भी देश में इनकम टैक्स वसूला जाता था. उस समय सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा यही वसूली थी.
2.अजब-गजब नियम-कायदे भी इनकम टैक्स लॉ का हिस्सा

इनकम टैक्स वसूली ने 1947 से 2025 तक बड़ा लंबा सफर तय किया है. इस दौरान कई अजब-गजब नियम-कायदे भी इनकम टैक्स लॉ का हिस्सा रहे हैं, जिनमें से कई को सुनकर आपकी हंसी छूट सकती है. चलिए ऐसी ही 5 बातों के बारे में आपको बताते हैं.
3.आजादी के समय थी 1500 रुपये की छूट

देश की आजादी के समय अंग्रेजों ने जो इनकम टैक्स वसूली की व्यवस्था लागू कर रखी थी, उससे ही सरकारी आमदनी का बड़ा हिस्सा आता था. इसके चलते पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने भी वही व्यवस्था लागू कर दी थी. उस समय 1500 रुपये तक की एनुअल इनकम वाले व्यक्ति को इनकमटैक्स रिबेट दी जाती थी. देश के पहले वित्त मंत्री आरके शनमुखम ने 16 नवंबर, 1947 को पहला बजट पेश करते हुए इसी छूट को कायम रखा था.
4.शादीशुदा होना ज्यादा फायदेमंद था

आजादी के बाद इनकमटैक्स कानूनों में कुछ ऐसे बदलाव किए गए, जिन्हें जानकर आप कहेंगे कि उस दौर में शादीशुदा होना ज्यादा फायदेमंद था. दरअसल पंडित नेहरू की सरकार ने शादीशुदा लोगों का परिवार के ऊपर खर्च किसी कुंवारे या अविवाहित व्यक्ति से ज्यादा माना था. इसके चलते शादीशुदा लोगों के लिए 1955 में इनकम टैक्स छूट की लिमिट बढ़ाकर 1500 से 2,000 रुपये कर दी गई थी, लेकिन कुंवारे लोगों के लिए यह लिमिट घटाकर 1,000 रुपये तय की गई थी.
5.बच्चे पैदा करने के लिए टैक्स छूट

पंडित नेहरू की सरकार 1958 में इससे भी कई कदम आगे बढ़ गई थी. जहां आज हम 'आबादी घटाओ' का नारा लगाते हैं, वहीं उस समय सरकार 'आबादी बढ़ाओ' के पक्ष में थी. 1958 में शादीशुदा लोगों के लिए टैक्स छूट को बढ़ाकर 2,000 रुपये से 3,000 रुपये कर दिया गया था, लेकिन यदि किसी दंपती का एक बच्चा है तो उसे 3300 रुपये और यदि 2 बच्चे हैं तो 36,00 रुपये तक की रकम पर टैक्स छूट का प्रावधान रखा गया था. ऐसे में आप कह सकते हैं कि तब 'बच्चे दो ही अच्छे' वाला नारा पूरी तरह मन को लुभाता था. भारत इसके साथ ही आबादी बढ़ाने के लिए इनकम टैक्स छूट देने वाला दुनिया का पहला देश भी बन गया था.
6.इंदिरा गांधी की सरकार में 'लूट टैक्स' कहने लगे थे लोग

क्या आप सोच सकते हैं कि पूरा दिन मेहनत करने के बाद भी आप अपनी कमाई का 97% हिस्सा घर ना ले जा पाएं? ऐसा होता था 1970 के दशक में. दरअसल 1973-74 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार में 2 लाख रुपये तक की आमदनी को निम्न आय वर्ग वाला मानकर इनकम टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई थी, लेकिन 2 लाख रुपये से ज्यादा की सालाना आय पर इनकम टैक्स की दर को बढ़ाकर 85 फीसदी कर दिया गया था.
7.चोरी-छिपे लेनदेन को बढ़ावा

इस पर सरचार्ज भी लगाया जाता था, जिससे यह दर बढ़कर करीब 97.75 फीसदी हो जाती थी. इसका मतलब यह हुआ कि 2 लाख रुपये से ज्यादा होने वाली हर 100 रुपये की कमाई में से सरकार 97.75 रुपये इनकम टैक्स के तौर पर वसूलती थी और 2.25 रुपये लोग अपनी जेब में रख पाते थे. हालांकि इसके चलते लोगों ने इनकम टैक्स जमा करने के बजाय चोरी-छिपे लेनदेन को बढ़ावा देना शुरू किया था. इसके चलते ही 1978 में जनता पार्टी की सरकार बनने पर प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने नोटबंदी लागू की थी. देसाई ने 16 जनवरी, 1978 को 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया था.
8.जहां 1 रुपया भी नहीं इनकम टैक्स

पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों को संवैधानिक प्रावधानों के तहत कई खास छूट मिली हुई हैं. इनमें सिक्किम भी शामिल है, जिसने 1975 में एक जनमत संग्रह के बाद चोग्याल (बौद्ध पुजारी राजा) के शासन से मुक्त होकर भारत में विलय किया था. सिक्किम ने भारत का 22वां राज्य बनने के लिए अपने पुराने कानूनों और विशेष दर्जे को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371 (F) के तहत बरकरार रखने की शर्त रखी थी, जिसे तत्कालीन भारत सरकार ने मान लिया था. इसके चलते वहां के निवासियों की आय आज भी सिक्किम आयकर नियमावली 1948 (Tax Manual) के दायरे में आती है, जिसके चलते उन्हें केंद्र सरकार को कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता है.
9.पैनकार्ड के बिना निवेश की छूट

हालांकि सिक्किम के कर कानून साल 2008 में निरस्त कर दिए गए थे, लेकिन उनकी जगह केंद्रीय इनकम टैक्स कानून में धारा 10 (26AAA) शामिल की गई थी. इस धारा के तहत सिक्किम के निवासियों को इनकम टैक्स देने और पैन कार्ड बनवाने की अनिवार्यता से बाहर रखा गया है. शेयर मार्केट में भी सेबी (SEBI) ने सिक्किम निवासियों को पैनकार्ड के बिना निवेश की छूट दे रखी है.