बिजनेस
मोहम्मद साबिर | Nov 15, 2025, 03:00 PM IST
1.तीन भाईयों ने उधार लेकर शुरू किया बिजनेस

चंदूभाई विरानी और उनके दो भाइयों ने 20000 रुपये उधार लेकर अपना बिजनेस स्टार्ट किया था. उन्होंने एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट बनाना शुरू किया, लेकिन 2 सालों के बाद उन्हें कारोबार चल नहीं सका और बंद करना पड़ा.
2.स्टार्टअप के बाद करनी पड़ी नौकरी

तीनों भाइयों का बिजनेस ठप हो गया था, जिसके बाद घर में काफी तंगी हो गई थी. इसके लिए फिर तीनों भाइयों को घर का खर्च चलाने के लिए इधर-उधर नौकरी करनी पड़ी. उन्होंने की छोटे-मोटे काम किए. हालांकि वो लोग घर का किराया भी नहीं दे पा रहे थे. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और एक बार फिर बिजनेस करने की सोची.
3.1992 में शुरू की कंपनी

चंदूभाई ने साल 1992 में एक बार फिर कारोबार करने की ठान ली. उन्होंने राजकोटअजी GIDC में गुजरात की पहली आलू वेफर की फैक्ट्री लगा दी. उन्होंने 10000 हजार की पूंजी से अपने घर में ही चिप्स बनाना शुरू कर दिया. उन्होंने बालाजी वेफर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी की नींव रखी.
4.बालाजी ने पूरे देश में बनाई अलग पहचान

आपको बता दें कि बालाजी की आज मार्केट में बोलबाला है. चाहे वो आलू चिप्स हो या नमकीन हो या भुजिया हो. लोग बालाजी का प्रोडक्ट आंख बंद करते इस्तेमाल करते हैं. ये कंपनी हर दिन 65 लाख किलो आलू के चिप्स और 100 लाख किलो नमकीन बनाती है. हालांकि बालाजी सिर्फ 4 प्रतिशत विज्ञापन पर खर्च करती है. जो इस इंडस्ट्री में अन्य कंपनियों को देखते हुए न के बराबर है.
5.बनाया अरबों का साम्राज्य

चंदूभाई विरानी की बालाजी कंपनी आज करोड़ों नहीं बल्कि अरबों तक पहुंच गई है. राजकोट में एक छोटे स्नैक मेकर के रूप में शुरुआत की और आज भारत का नंबर वन ब्रांड बना दिया है. बालाजी वेफर्स की कीमत आज करीब 4 अरब डॉलर यानी भारतीय रुपये के अनुसार, 350 अरब होती है.