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ये है 'मर्दों का द्वीप' जहां औरतों का आना है निषेध, Island पर कदम रखने से पहले पुरूष को करना होता है ये काम

यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल जापान के ओकिनोशिमा द्वीप पर महिलाओं का जाना प्रतिबंधित है, इसे मेन्स आईलैंड कहा जाता है.

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ये है 'मर्दों का द्वीप' जहां औरतों का आना है निषेध, Island पर कदम रखने से पहले पुरूष को करना होता है ये काम
okinoshima island
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डीएनए हिंदीः ओकिनोशिमा द्वीप जापान के चार मुख्य द्वीपों के दक्षिणी भाग क्यूशू के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है. इस द्वीप पर एक देवी की पूजा होती है लेकिन महिलाएं यहां नहीं जा सकतीं. ओकिनोशिमा का छोटा द्वीप स्थायी रूप से एक शिंटो पुजारी द्वीप की देवी से प्रार्थना करते हैं. एक परंपरा जो सदियों से चली आ रही है, इसी कारण इस द्वीप पर महिलाएं यहां नहीं आती हैं. 

जापान में केवल पुरुष ही इस द्वीप पर आते हैं और देवी की पूजा करते हैं. द्वीप में मंदिर जाने से पहले पुरुष आगंतुकों को समुद्र में नग्न होकर स्नान करना होता है. सदियों से ये नियम चला आ रहा है कि द्वीप पर तीर्थस्थल की पवित्र भूमि पर पैर रखने से पहले नग्न होकर समुद्र में शुद्धिकरण डुबकी लगानी होती है. 

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हालांकि पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के कारण तीर्थस्थल के पुजारी अब यहां पुरुषों की यात्रा पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि बहुत अधिक आगंतुकों द्वारा द्वीप नष्ट हो रहा है. बता दें कि सिद्धांत रूप में साल में 365 दिन प्रार्थना करने वाले पुजारियों को छोड़कर किसी को भी प्रवेश करने से रोक दिया जाता है केवल साल में दो दिन के लिए इस द्वीप पर आने का इजाजत केवल पुरूषों को होती है.

बता दें कि यहां के अधिकारियों का कहना है कि महिला आगंतुकों पर प्रतिबंध का महिलाओं के खिलाफ भेदभाव से कोई लेना-देना नहीं है. असल में यहां ऐसा करने के पीछे कारण खतरनाक समुद्री रास्ते हैंऔर यह मंदिर सदियों पुराने नियम को नहीं बदलेगे. उनका कहना है की यह महिलाओं की रक्षा के लिए है. 

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यह द्वीप जापान के चार मुख्य द्वीपों के दक्षिणी भाग क्यूशू के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है. यह प्राचीन काल से जापान में विदेशी व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण खिड़की थी और एक व्यापार मार्ग का एक हिस्सा था जो जापानी द्वीपों को कोरियाई प्रायद्वीप और चीन से जोड़ता था. यहां हजारों सोने की अंगूठियां जैसी कई कीमती वस्तुएं मिली हैं. माना जाता है कि इन खजाने को देवताओं को राष्ट्रीय समृद्धि और समुद्री यातायात की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करने के लिए चढ़ाया गया था.

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