लाइफस्टाइल
क्या आपको पता है जब हिमालय के ऊपर से प्लेन उड़ता है तो पायलट को हमेशा तीन सूरज दिखाई देते हैं? इसे सनडॉग कहा जाता है और 99 प्रतिशत लोग इसके पीछे की सच्चाई नहीं जानते हैं.
हवाई जहाज़ से सफ़र करते समय खिड़की से बाहर देखना सबसे रोमांचक अनुभवों में से एक होता है. लेकिन सोचिए, अगर आप हवाई जहाज़ में हों और आपको एक साथ आसमान में तीन सूरज दिखें? ये जादू है या कोई दृष्टिभ्रम? आपके मन में ये सवाल ज़रूर आएगा. लेकिन ऐसा सच में होता है. जिसके बारे में कई पायलट और यात्री बता चुके हैं. दिल्ली से काठमांडू या दूसरे ऊँचाई वाले रास्तों पर यात्रा करने वाले पायलट अक्सर आसमान में इस अद्भुत नज़ारे को देखने की बात कहते हैं. ये कॉकपिट में लगे शीशे की वजह से हुई कोई गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक वायुमंडलीय घटना है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'सनडॉग' या 'पैरहेलियन' कहते हैं.
आइये जानें कि रहस्य क्या है और ये दो नकली सूर्य कैसे बने
सनडॉग क्या है?
सनडॉग वायुमंडल में प्रकाश के अपवर्तन के कारण होने वाली एक घटना है. यह घटना तब होती है जब सूर्य का प्रकाश हवा में तैरते बर्फ के कणों से टकराकर परावर्तित होता है.
ये बर्फ के कण छोटे प्रिज्मों की तरह काम करते हैं. ये सूर्य की रोशनी को कम से कम 22 डिग्री तक मोड़ देते हैं. इससे असली सूरज के दोनों ओर बराबर ऊँचाई पर, चमकदार रोशनी के दो गोले बनते हैं, जो बिल्कुल सूरज जैसे दिखते हैं. इससे ऐसा लगता है जैसे आसमान में तीन सूरज हों.
केवल ऊंचे स्थानों पर ही क्यों?
यह घटना हमेशा 9 से 12.8 किलोमीटर की ऊँचाई पर होती है. इस ऊँचाई पर हवा लगातार ऊपर की ओर गति करती रहती है. जब नम हवा पहाड़ों से टकराती है और ऊपर की ओर धकेली जाती है, तो वह ठंडी हो जाती है और उसमें मौजूद जलवाष्प बर्फ के क्रिस्टल में जम जाती है. ये क्रिस्टल सिरोस्ट्रेटस बादल बनाते हैं, जो सनडॉग के लिए आवश्यक हैं.
नासा के अनुसार, हिमालय क्षेत्र पृथ्वी पर सनडॉग देखने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है. यहाँ का तापमान -40 से -60 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है और भारतीय मानसून द्वारा लाई गई प्रचुर आर्द्रता साल भर बर्फ के आदर्श क्रिस्टल बनाती है.
क्या हवाई यात्रा खतरनाक है?
उड़ान के दौरान सनडॉग विमानों के लिए कोई ख़तरा नहीं होते. हालाँकि, अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) अपनी पुस्तिका में पायलटों को इस घटना के बारे में जानकारी प्रदान करता है. महत्वपूर्ण चरणों के दौरान, पायलटों को इस झूठे सूर्य के प्रति सचेत रहना चाहिए ताकि वे इसे किसी अन्य विमान या असली सूर्य समझने की भूल न करें.
संक्षेप में कहें तो हिमालय के आकाश का यह दृश्य विज्ञान और प्रकृति का अद्भुत मिश्रण है, जिसे केवल भाग्यशाली लोग ही हवाई जहाज से देख पाते हैं.
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