लाइफस्टाइल
क्या आपके पास बैठे लोगों को छोड़कर आपको ही सबसे ज्यादा मच्छर काटते हैं तो इसके लिए आपका ब्लड ग्रुप ही केवल जिम्मेदार नहीं है, बल्कि एक आदत भी इसके पीछे जिम्मेदार होती है. नीदरलैंड की एक स्टडी पढ़कर आप शॉक होंगे कि मच्छर भी किसी के प्रति आकर्षित क्यों होते हैं.
कई लोगों के मन में यह सवाल बार-बार उठता है कि ग्रुप में बैठे कुछ लोगों की तुलना में उन्हें ही मच्छर सबसे ज्यादा क्यों काटते हैं. कुछ स्टडी ये बताती है कि मच्छर O ब्लड ग्रुप वालों को ज्यादा काटते हैं लेकिन अब नीदरलैंड की स्टडी में कुछ और खुलासे हुए हैं. इसके अनुसार मच्छर शराबी लोगों के खून के प्यासे ज्यादा होते हैं और दूर से ही उनको शराबी खून की महक आ जाती है.
जब आप बीयर पीते हैं तो आपको नशा होता है, लेकिन यह नशा सिर्फ़ आपको ही नहीं, मच्छरों को भी होता है. नीदरलैंड की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बात सामने आई है कि जिन लोगों को शराब पीने की आदत होती है, वे दूसरों के मुक़ाबले मच्छरों को अपनी ओर ज़्यादा आकर्षित करते हैं.
ऐसा क्यों होता है?
नीदरलैंड में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, बीयर या कोई भी शराब नशा पैदा कर सकती है. दरअसल, मच्छरों को नशा नहीं होता, बल्कि बीयर पीने के बाद इंसान के शरीर में कुछ रासायनिक क्रियाएँ होती हैं, जिसके बाद उसके कुछ तत्व खून में मिल जाते हैं. यही तत्व मच्छरों को सबसे ज़्यादा आकर्षित करते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मच्छर 350 फ़ीट दूर से भी इंसान के शरीर की गंध आसानी से सूंघ लेते हैं. इसलिए अगर आप यह कहते रहते हैं कि मच्छर सबसे ज़्यादा आपको ही काटते हैं, तो अगर आप भी ज़्यादा शराब पीते हैं, तो समय रहते इसे कम कर दीजिए.
इसके साथ ही मच्छर सिर्फ बीयर की गंध से ही आकर्षित नहीं होते, बल्कि अगर आपके शरीर में अत्यधिक गर्मी है या शरीर को साफ न रखने के कारण लगातार दुर्गंध आती है, तो भी मच्छर आपकी ओर आकर्षित होते हैं. लगातार पसीने से लथपथ शरीर से तेज गंध आती है और मच्छरों को ज्यादा आकर्षित करती है.
इससे बार-बार बीमार पड़ना, मलेरिया और डेंगू बुखार होता है. इसलिए जरूरी है कि समय पर अपने शरीर की उचित देखभाल की जाए. सोते समय आप जिस तकिये और चादर का इस्तेमाल करते हैं, उसे समय पर साफ रखना भी जरूरी है. संक्षेप में, अगर आप अपने शरीर और अपने आस-पास इस्तेमाल होने वाली चीजों को साफ रखेंगे, तो आपके आस-पास आने वाले मच्छरों की संख्या में भी कमी आएगी, ऐसा शोधों से साबित हुआ है.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से