लाइफस्टाइल
पंकज भदौरिया 16 साल तक पढ़ाने के बाद, उन्होंने खाना पकाने के अपने जुनून को आगे बढ़ाया और मास्टरशेफ इंडिया का पहला सीजन जीतने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई. आज, वह भारत के सबसे प्रसिद्ध शेफ में से एक हैं.
भारत में पाक कला के क्षेत्र में प्रेरणास्रोत बन चुकी पंकज भदौरिया की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है, जिसमें उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए 16 साल की उम्र में टीचर की नौकरी छोड़ दी और आखिरकार मास्टरशेफ इंडिया का प्रतिष्ठित खिताब जीता. स्कूल टीचर से लेकर शेफ बनने तक पंकज भदौरिया का सफर किसी असाधारण काम से कम नहीं है. 16 साल तक पढ़ाने के बाद उन्होंने खाना पकाने के अपने शौक को आगे बढ़ाने के लिए एक कदम आगे बढ़ाया और 2010 में मास्टरशेफ का खिताब जीतने के बाद वह सुर्खियों में आईं.
पंकज का जन्म विनोद खन्ना और उनकी मां प्रिया खन्ना के घर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। पंकज, जो पढ़ाई में अच्छे थे, ने अंग्रेजी साहित्य में मास्टर डिग्री प्राप्त की और फिर एक स्कूल में टीचर के रूप में पढ़ाना शुरू कर दिया. जब वह सिर्फ 13 साल की थीं, तब उनके पिता की मृत्यु हो गई और जब उनकी मां की मृत्यु हुई, तब वह 22 साल की थीं. पंकज ने चारू समर्थ से शादी की और उनके दो बच्चे हैं, सोनालीका और सिद्धांत.
पंकज के अंदर कहीं न कहीं खाना बनाने का गहरा जुनून था. उन्हें खाना बनाना और नई-नई रेसिपीज के साथ प्रयोग करना बहुत पसंद था. यह जुनून अक्सर उनके द्वारा अपने परिवार और दोस्तों के लिए बनाए गए स्वादिष्ट पकवानों में झलकता था. 2010 में जब मास्टरशेफ इंडिया के पहले सीजन की घोषणा हुई, तो यह पंकज के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. मास्टरशेफ इंडिया का खिताब जीतने के बाद पंकज भदौरिया की जिंदगी पूरी तरह बदल गई. मास्टरशेफ इंडिया से उन्हें लाइमलाइट मिली और वे जल्द ही महत्वाकांक्षी शेफ के लिए प्रेरणा बन गई.
उन्होंने कई कुकरी शो किए, कुकिंग पर किताबें लिखीं और अपने नाम का एक रेस्टोरेंट भी खोला. उन्होंने 'मास्टरशेफ इंडिया कुकबुक' और 'चिकन फ्रॉम माय किचन' जैसी किताबें लिखीं. उन्होंने 'शेफ पंकज का जायका' और '3 कोर्स विद पंकज' समेत कई कुकिंग शो होस्ट किए, जिससे वे घर-घर में काफी फेमस हो गईं. उन्होंने रेस्टोरेंट के कारोबार में भी कदम रखा और लखनऊ में 'कैफे बाय डिफॉल्ट' और 'ट्रैम्प ट्री कैफे' खोला. पंकज की यह कहानी साबित करती है कि अगर आप में लगन और अपने सपनों पर अटूट विश्वास है, तो आप किसी भी उम्र में अपने जुनून को सफल करियर में बदल सकते हैं और नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं.
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