लाइफस्टाइल
Where are most children born in India?: भारत में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन मेट्रो शहरों में प्रजनन दर घट रही है. एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई में सबसे अधिक बच्चे पैदा होते हैं, जबकि मुंबई और कोलकाता सबसे नीचे हैं.
भारत अब चीन को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है. देश में जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन साथ ही एक सच्चाई यह भी सामने आ रही है कि प्रजनन दर यानी जन्म दर अब कुछ राज्यों और महानगरों में धीरे-धीरे कम हो रही है. तो फिर सबसे अधिक बच्चे कहां पैदा होते हैं?
चेन्नई में सबसे अधिक बच्चे पैदा होते हैं
देश के मेट्रो शहरों में चेन्नई में सबसे अधिक बच्चे पैदा होते हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) 2019-21 की रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई की कुल प्रजनन दर 1.65 है. इसका मतलब यह है कि यहां प्रत्येक महिला औसतन 1.65 बच्चों को जन्म देती है. जब मेट्रो शहरों की बात आती है तो चेन्नई शीर्ष पर है.
अन्य मेट्रो शहरों की स्थिति
चेन्नई के बाद दिल्ली का स्थान है, जहां प्रजनन दर 1.57 है. यह दर हैदराबाद (1.54), मुंबई (1.44) और कोलकाता (1.40) जैसे प्रमुख शहरों में भी देखी गई है. ये आंकड़े बताते हैं कि जीवनशैली, शिक्षा और रोजगार के कारण बड़े शहरों में प्रजनन दर में गिरावट आ रही है, लेकिन चेन्नई अभी भी इन सबमें सबसे आगे है.
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अहमदाबाद में भी जन्म रिकॉर्ड
ताजा रिपोर्ट पर गौर करें तो अहमदाबाद में 2022-23 के दौरान एक लाख से अधिक बच्चे पैदा हुए. यह आंकड़ा 2019 के बाद पहली बार पहुंचा है. कोविड-19 महामारी के बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का जन्म हुआ है.
दक्षिण भारत में अधिक बच्चे पैदा करने की मांग
दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में सरकारें अब अधिक बच्चे पैदा करने के बारे में जागरूकता भी फैला रही हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने हाल ही में कहा कि अब 16 बच्चे पैदा करने का समय आ गया है. आंध्र प्रदेश में भी ऐसी ही मांग उठ रही है कि प्रजनन दर बढ़ाई जाए, क्योंकि अगर यह दर औसतन 2.0 से नीचे चली गई तो भविष्य में जनसंख्या में गिरावट की आशंका है.
एनएफएचएस सर्वेक्षण क्या है और यह क्यों आवश्यक है?
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जो देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवारों से सीधे संपर्क करके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, लैंगिक समानता और जनसंख्या से संबंधित आंकड़े एकत्र करती है. इस सर्वेक्षण में टीमें घर-घर जाकर परिवारों से सवाल पूछती हैं और फिर सरकार उन्हीं आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाती है.
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