Advertisement

Sunita Williams Return: स्पेस से लौटकर सुनीता विलियम्स को झेलनी पड़ सकती हैं ये हेल्थ चुनौतियां, क्या-क्या हो सकती हैं दिक्कत?

Sunita Williams be at risk of after returning space?: आखिरकार 9 महीने बाद अंतरिक्ष से पृथ्वी पर कल लौटने वाली हैं. लेकिन धरती पर आते ही मुसीबतें हेल्थ को लेकर और बढ़ सकती हैं. आइए जानते हैं कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद एस्ट्रोनॉट्स को किन हेल्थ इशूज से जूझना होता है.

Latest News
Sunita Williams Return: स्पेस से लौटकर सुनीता विलियम्स को झेलनी पड़ सकती हैं ये हेल्थ चुनौतियां, क्या-क्या हो सकती हैं दिक्कत?

अंतरिक्ष यात्री किन बीमारियों से ग्रस्त होते हैं?
 

Add DNA as a Preferred Source

सुनीता विलियम्स स्पेस से लौट रही हैं और उनके लौटने में 9 महीने लग गए हैं. भले ही अंतरिक्ष में घटित होने वाली चीजें आम लोगों को बहुत रोमांचक लगती हैं. जब भी हम अंतरिक्ष और अंतरिक्ष यात्रियों की तस्वीरें देखते हैं तो हमारे मन में कई सवाल आते हैं. लेकिन क्या अंतरिक्ष में रहना वास्तव में उतना आसान है जितना तस्वीरों में दिखता है? आज हम अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों की स्वास्थ्य समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे.
 
अंतरिक्ष यात्री किन बीमारियों से ग्रस्त होते हैं?

कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटने पर अक्सर चक्कर आते हैं. चिकित्सा की भाषा में इसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन भी कहा जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल अन्तरिक्ष के गुरुत्वाकर्षण बल से कहीं अधिक है. इससे हृदय और सिर तक रक्त का पहुंचना बहुत कठिन हो जाता है.
 
कई अंतरिक्ष यात्रियों में बीमारी के लक्षण दिखे हैं. सिरदर्द, मतली और उल्टी जैसी समस्याएं विशेष रूप से आम हैं. जब हम पृथ्वी पर होते हैं, तो हम गुरुत्वाकर्षण बल से प्रभावित होते हैं. हमारे कानों के अंदर वेस्टिबुलर ऑर्गन नामक एक छोटा सा अंग होता है जो हमारे शरीर का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह अंग शरीर द्वारा अनुभव किये जाने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को विद्युत धारा में परिवर्तित करता है और मस्तिष्क को संदेश भेजता है.
 
पृथ्वी पर रहते हुए, मस्तिष्क हमेशा वेस्टिबुलर अंगों से गुरुत्वाकर्षण बल के बारे में जानकारी प्राप्त करता रहता है और इसका उपयोग शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए करता है. अंतरिक्ष में कम गुरुत्वाकर्षण बल वेस्टिबुलर अंगों द्वारा प्राप्त जानकारी को बदल देते हैं. ऐसा माना जाता है कि इससे मस्तिष्क भ्रमित हो जाता है, जिससे अंतरिक्ष संबंधी बीमारी उत्पन्न होती है. यदि आप कुछ दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे तो यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रहेगी.

अंतरिक्ष यात्रियों को होती हैं ये बीमारियां

अंतरिक्ष एनीमिया
एनीमिया रक्त की कमी है. रक्त में हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की कमी को एनीमिया कहा जाता है. अंतरिक्ष एनीमिया अंतरिक्ष यात्रियों में अंतरिक्ष में रहते समय होने वाली रक्त की कमी है. अंतरिक्ष में, शरीर प्राकृतिक वायु रहित वातावरण के अनुकूल होने का प्रयास करता है, जिसके कारण उसमें रक्त की कमी हो जाती है.

अस्थि भंगुरता
अंतरिक्ष में बहुत अधिक समय तक रहने से मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. शोध से पता चला है कि मांसपेशियों का द्रव्यमान केवल दो सप्ताह में 20% तक कम किया जा सकता है, और लंबे अभियानों के दौरान यही आंकड़ा 30% तक कम हो सकता है. हड्डियां हर महीने 1-2% कमजोर होती हैं. इससे ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है.

दिल का दौरा
सूक्ष्मगुरुत्व के संपर्क में लम्बे समय तक रहना हृदय के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है. इससे हृदय की कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है. इससे हृदय गति धीमी हो जाती है. बड़े अभियानों के दौरान हृदय को सबसे अधिक खतरा हो सकता है.

मस्तिष्क पर प्रभाव
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं है, इसलिए शरीर और मन का उचित संतुलन प्राप्त नहीं हो पाता. कई अध्ययनों से पता चला है कि अंतरिक्ष में जाने पर मस्तिष्क की संरचना बदलने लगती है. इससे नसों और मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में सूजन आने का खतरा रहता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है.

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)    

ख़बर की और जानकारी के लिए डाउनलोड करें DNA App, अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें  हमारे गूगलफेसबुकxइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement