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Positive Thought: जीवन को समझें फिल्म और खुद को हीरो, 1 मिनट में मिल जाएगा हर समस्या का समाधान-बीके शिवानी

BK Shivani हमें बता रही हैं कि कैसे हम हर समस्या को बड़ा नहीं छोटा समझें और उसका समाधान करें

Positive Thought: जीवन को समझें फिल्म और खुद को हीरो, 1 मिनट में मिल जाएगा हर समस्या का समाधान-बीके शिवानी
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डीएनए हिंदी: Thursday Motivation BK Shivani- परमात्मा कहते हैं जैसे ही कोई बात आये, सबसे पहले हमें यही कहना है - "बस यह छोटी सी बात है". सामने वाला चाहे शॉक्ड होकर कहे, "यह छोटी सी बात है!" लेकिन आप छोटी बात ही समझकर चलो. वो फिर अपनी बात को विस्तारपूर्वक बताएंगे "यह हो गया, वो हो गया, ऐसा हो गया, वैसा हो गया". आप बस यही बोलिये "बस, छोटी सी बात है".सामने वाला कहेगा "आपको क्या पता? आपके सामने थोड़े ही आई है?" लेकिन जब हम छोटी सी बात कहेंगे, तो हम ज़्यादा पावरफुल हो जायेंगे और इसके सकारात्मक परिणाम आने लग जाएंगे. इस तरह से हम एक सेकेंड में किसी भी समस्या से मुक्ति पा सकते हैं. मोटिवेशनल स्पीकर बीके शिवानी इस टॉपिक पर अपनी राय दे रही हैं. 

जीवन में हर समस्या छोटी ही है 

भले घर से फोन भी आए और परिवार वाले आपको कहें "यह हो गया, वो हो गया" लेकिन आपको यही कहना है कि "बस, छोटी सी बात है, यह तो बहुत आसानी से क्रॉस हो जायेगी". हमें बातों को हमेशा छोटा करना है, बड़ा नहीं. जब हम बात को छोटा बोलते हैं तो वह छोटी हो जाती है और हम पावरफुल हो जाते हैं. हम यह कहकर बात को बड़ा बना देते हैं कि "क्राइसिस (संकट) है". वास्तव में, क्राइसिस कुछ नहीं होता है. क्राइसिस सिर्फ हम अपने मन में बना लेते हैं. इसे हम क्राइसिस के बजाय चैलेंज, समस्या, परिस्थिति भी बोल सकते हैं, या इससे भी सहज जीवन का एक दृश्य बोल सकते हैं.

 

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जीवन एक फिल्म की तरह है. इसमें हम सभी हीरो एक्टर्स हैं. जो हीरो होता है, वो विलेन से कभी घबराता नहीं है. पूरी फिल्म उसी के इर्द-गिर्द घूमती है. विलेन चाहे कितना भी छल-कपट करे, शक्ति का प्रयोग करे, लेकिन हीरो हमेशा अपने लक्ष्य पर फोकस्ड रहता है. उसके साहस और सच के आगे वह विलेन से जीत जाता है. परमात्मा भी कहते हैं "यह सृष्टि नाटक भी एक खेल है/फिल्म है. आप हीरो एक्टर हो और मैं इस बेहद की फिल्म का डायरेक्टर हूं. यह परिस्थितियों रूपी साइड भल कितने भी आएं लेकिन आपको घबराना नहीं है. अपनी बेस्ट परफॉरमेंस देनी है. साक्षी (मन में बिना कोई डाउट या क्वेश्चन उठाये) होकर हर सीन को देखना है और एन्जॉय करना है. 

यह परिस्थितियां कहो, चैलेंजेज कहो, समस्याएं कहो. ये सीन्स तो आएंगे ही, लेकिन मुझे यह विश्वास होना चाहिए कि मेरे साथ इस बेहद की फिल्म के डायरेक्टर सर्वशक्तिमान हैं, इसलिए विजय तो मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है. यह स्मृति सदा रहे तो चैलेंजेज आसानी से क्रॉस हो जायेंगे.

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