लाइफस्टाइल
अगर आपको नामर्द नहीं बनना तो आपनी लाइफ से कुछ आदतों को तुरंत बदलना होगा क्योंकि आपकी मर्दानगी यानी स्पर्म और फर्टिलिटी को ये आदतें बुरी तरीके से नष्ट करती हैं.
आजकल की बदलती जीवनशैली में प्रजनन दर में भी तेज़ी से बदलाव आ रहा है. पुरुष प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं, जिनमें धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और गतिहीन जीवनशैली प्रमुख कारण माने जाते हैं. दुनिया भर में प्रजनन क्षमता में गिरावट आ रही है. ये कारण रोज़मर्रा की आदतों से जुड़े हैं. आइए इसके बारे में जानें.
अवैध दवाओं का उपयोग
दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला अवैध नशा मारिजुआना है. तीन महीने या उससे ज़्यादा समय तक हफ़्ते में एक से ज़्यादा बार मारिजुआना पीने से शुक्राणुओं की संख्या और सांद्रता में काफ़ी कमी आ सकती है. शराब या अन्य नशीले पदार्थों के साथ लेने पर यह नुकसान और भी ज़्यादा गंभीर हो सकता है.

मोटापा
यदि बीएमआई 30 से अधिक है, तो अंडकोषों के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है, जिससे अंडकोषों का तापमान बढ़ जाता है. इसका सीधा असर शुक्राणु उत्पादन पर पड़ता है. इसके अलावा, अतिरिक्त चर्बी ऑक्सीडेटिव तनाव को बढ़ाती है, जिससे शुक्राणुओं की गतिशीलता, आकारिकी और डीएनए की गुणवत्ता प्रभावित होती है.
दीर्घकालिक तनाव
नौकरी, परिवार या आर्थिक तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर को बढ़ा देता है. इससे टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन प्रभावित होता है और शुक्राणुओं की गुणवत्ता और मात्रा कम हो जाती है. लंबे समय तक तनाव के कारण कुछ पुरुषों में वीर्य के पैरामीटर पूरी तरह से असामान्य हो सकते हैं.

खराब आहार
जंक फ़ूड, प्रोसेस्ड फ़ूड, ज़्यादा चीनी, ट्रांस फ़ैट और संतृप्त वसा का अत्यधिक सेवन शुक्राणुओं की गुणवत्ता को कम करता है. इसके विपरीत, भूमध्यसागरीय आहार (फल, सब्ज़ियाँ, मेवे, मछली, जैतून का तेल) और ओमेगा-3, ज़िंक, सेलेनियम, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार शुक्राणुओं के स्वास्थ्य में सुधार करता है.
बढ़ती उम्र
40 वर्ष की आयु के बाद पुरुषों के शुक्राणुओं में आनुवंशिक उत्परिवर्तन बढ़ जाते हैं. इससे शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और डीएनए की अखंडता कम हो जाती है. अधिक उम्र में बच्चा पैदा करने से बच्चे में ऑटिज़्म, सिज़ोफ्रेनिया या आनुवंशिक विकारों का खतरा बढ़ सकता है.
विकारों का जोखिम
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उच्च वृषण तापमान. बार-बार गर्म पानी के टब, सॉना, गर्म स्नान, तंग अंडरवियर और लैपटॉप को सीधे गोद में रखने से वृषण का तापमान बढ़ जाता है. 34-35°C से अधिक तापमान शुक्राणु उत्पादन के लिए हानिकारक होता है.
पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थ
प्लास्टिक, थैलेट्स, कीटनाशकों, भारी धातुओं (सीसा, कैडमियम, पारा), विकिरण और वायु प्रदूषण में बीपीए के लगातार संपर्क में रहने से शुक्राणु डीएनए विखंडन बढ़ता है और प्रजनन क्षमता कम हो जाती है.

कुछ दवाएं और स्टेरॉयड
एनाबोलिक स्टेरॉयड, कुछ बाल झड़ने की दवाइयां, कैंसर कीमोथेरेपी, कुछ अवसादरोधी दवाएं और दीर्घकालिक एंटीबायोटिक्स का शुक्राणु उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
नींद की कमी और अनियमित नींद
रात में 6 घंटे से कम सोने या नाइट शिफ्ट में काम करने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है. इसका सीधा असर शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता पर पड़ता है.
मोबाइल फोन और ईएमएफ विकिरण
कई अध्ययनों से पता चलता है कि पैंट की जेब में मोबाइल फोन रखने या लैपटॉप को अक्सर अपनी गोद में रखने से उत्पन्न विद्युत चुम्बकीय विकिरण शुक्राणु की गतिशीलता और डीएनए अखंडता को कम कर सकता है.

क्या निदान है?
बांझपन के 40-50% मामलों के लिए पुरुष कारक ज़िम्मेदार होते हैं. समय पर जीवनशैली में बदलाव (वजन कम करना, तंबाकू, शराब और नशीले पदार्थों का सेवन बंद करना, अच्छा आहार, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना) अक्सर प्रजनन क्षमता में सुधार करते हैं.
Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. डीएनए इसकी पुष्टी नहीं करता है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.
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