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Premanand Maharaj Advice: इन 7 जगहों पर चुप रहना प्रेमानंद महाराज ने अच्छा बताया है वरना करियर और जीवन में होता है नुकसान

लेकिन कुछ जगहें ऐसी हैं जहां चुप रहना ही बेहतर होता है. वृन्दावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज 7 जगहों पर मौन रहकर निकल जाने की सलाह देते हैं. चलिए जानें किन जगहों पर चुप रहन चाहिए.

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Premanand Maharaj Advice: इन 7 जगहों पर चुप रहना प्रेमानंद महाराज ने अच्छा बताया है वरना करियर और जीवन में होता है नुकसान

कब चुप रहना होता है फायदेमंद

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बातचीत करना और चुप रहना कभी-कभी एक दूसरे के पूरक होते हैं. इसलिए कहां बोलना चाहिए और कहां चुप रहना चाहिए ये बात व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में बताती है. इतना ही नहीं, आपके बोलने का तरीका करियर और जीवन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. ये भी सच है कि हमें अपनी राय रखनी चाहिए, लेकिन कुछ जगहों पर चुप रहना ही बेहतर होता है. दरअसल, कई लोग गलत जगह भी बातें करते हैं, जिसका असर उनके जीवन पर पड़ता है.

प्रसिद्ध धर्मगुरु और वृन्दावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के अनुसार, कुछ स्थानों पर मौन लाभकारी होता है. ऐसा न करने वालों के करियर, जीवन और व्यक्तित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. आइए जानें किन जगहों पर शांत रहने को कहा गया है.
 
माला जप करते हुए: प्रेमानंदजी महाराज कहते हैं कि माला जप करते समय मौन रहना चाहिए. माला जप समाप्त करने के बाद ही बोलें, माला जप के बीच में नहीं. दरअसल बीच में बोलने से भक्त और भगवान का रिश्ता टूट जाता है. ऐसी स्थिति में आपको जप का लाभ नहीं मिलेगा.
 
भोजन करते समय : किसी भी अभ्यासी को भोजन करते समय मौन रहना चाहिए. अगर आपको कोई जरूरी बात भी करनी है तो इस बात का ध्यान रखें कि उस वक्त आपके मुंह में खाना न हो. ऐसा करने से भोजन बिना किसी रुकावट के पेट तक पहुंचता है.

शौच करते समय: शौचालय भी शांत होना चाहिए. आजकल बच्चे टॉयलेट में फोन लेकर जाते हैं जो कि गलत है. साथ ही, जरा सा भी संदेह होने पर किसी को नहीं बोलना चाहिए, जब तक आश्वस्त न हो जाए, तब तक बिल्कुल नहीं बोलना चाहिए.

सड़क पर चलते समय: महाराज जी कहते हैं कि सड़क पर चलते समय मौन रहना चाहिए. अगर कभी कॉल आए भी तो रास्ते में कहीं रुकें और दोबारा बात करें. ऐसा करने से कोई भी घटना घटित होने से बच जाती है.
 
स्नान करते समय : बाबा प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि स्नान करते समय भी मौन रहना चाहिए. आप चाहें तो इस दौरान राधा नाम का जाप भी कर सकते हैं.
 
यज्ञ करते समय : यज्ञ-हवन के समय किसी भी साधक को अनावश्यक बातें नहीं करनी चाहिए. चुप रहें और केवल भगवान पर ध्यान केंद्रित करें और मन ही मन प्रार्थना करें.

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर्स से संपर्क करें.)   

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