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Pregnancy Complications In PCOS: पीसीओएस से जूझ रही महिलाओं के मन में यह सवाल उठने लगता है कि क्या इसकी वजह से प्रेगनेंसी में दिक्कत आएगी, आइए जानते हैं क्या है इसका जवाब...
Pregnancy Complications In PCOS पीसीओएस (PCOS) यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या इन दिनों महिलाओं और लड़कियों में तेजी से बढ़ रहा है. बता दें कि यह एक हार्मोनल डिसऑर्डर है, जो बड़ी संख्या में युवतियों और महिलाओं को आजकल प्रभावित कर रहा है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक PCOS होने पर शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं.
ऐसे में PCOS से जूझ रही महिलाओं के मन में यह सवाल (Pregnancy Complications) उठने लगता है कि क्या इसकी वजह से प्रेगनेंसी में दिक्कत आएगी... आइए जानते हैं क्या है इसका जवाब...
इस स्थिति में पीरियड्स अनियमित होने के साथ, ओवुलेशन में दिक्कत आने लगती है. ऐसी स्थिति में गर्भधारण करना चुनौती बन जाता है. हालांकि, यह असंभव स्थिति नहीं है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक सही समय पर इलाज और जीवनशैली में बदलाव करके PCOS के साथ भी स्वस्थ प्रेगनेंसी संभव है. पीसीओएस में प्रेगनेंसी के दौरान कुछ परेशानियां आ सकती हैं. लेकिन इलाज की मदद से सबकुछ ठीक से हो सकता है.
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- PCOS में अंडाशय में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं और इस स्थिति में अंडाणु ठीक से परिपक्व नहीं हो पाते. ऐसे में ओवुलेशन यानी एग रिलीज नहीं होता और गर्भधारण में रुकावट आती है.
- ओवुलेशन नियमित नहीं होने पर पीरियड्स का चक्र भी असंतुलित हो जाता है. इससे फर्टिलिटी पर असर पड़ता है और कंसीव करने में समस्या आ सकती है.
- PCOS से पीड़ित महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा अधिक होता है. ये मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है.
- इस स्थिति में हार्मोनल असंतुलन के कारण यूटरस का वातावरण स्थिर नहीं रहता और इससे प्रेगनेंसी टिक पाने में मुश्किल आती है. इससे मिसकैरेज की संभावना बढ़ जाती है.
PCOS की समस्या है तो हेल्दी डाइट अपनाएं, इसके लिए डाइट में फाइबर और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें, प्रोसेस्ड फूड और शुगर से परहेज करें. इस स्थिति में नियमित व्यायाम करना बेहद जरूरी है. बता दें कि दिन में कम से कम 30 मिनट वॉक या योग करने से वजन नियंत्रित रहता है और फर्टिलिटी बेहतर होती है.
मानसिक तनाव भी हार्मोनल असंतुलन को बढ़ाता है. इसलिए इस स्थिति में मेडिटेशन, काउंसलिंग या संगीत जैसे तरीकों से स्ट्रेस को मैनेज करना जरूरी है.
एक्सपर्ट से सलाह लें और फर्टिलिटी बूस्टिंग दवाएं जैसे क्लोमिफेन, मेटफॉर्मिन आदि लें, कुछ मामलों में ऐसी स्थिति में आईयूआई या आईवीएफ की जरूरत भी पड़ सकती है.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)
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