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Who Are Garud Commandos: पहलगाम अटैक के बाद गरुड़ कमांडो एक्शन मोड में, कौन होते हैं ये 'विशेष योद्धा' और क्या है इनकी खासियत?

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से ही गरुड़ कमांडोज की चर्चा शुरु हो गई है. ये स्पेशल योद्धा कौन होते हैं और इनकी खासियत क्या है चलिए जानें,

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Who Are Garud Commandos: पहलगाम अटैक के बाद गरुड़ कमांडो एक्शन मोड में, कौन होते हैं ये 'विशेष योद्धा' और क्या है इनकी खासियत?

गरुड़ कमांडो  

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना की गरुड़ कमांडो (Garud Commando) यूनिट एक बार फिर सुर्खियों में है. यह वही विशेष बल है जो देश के सबसे खतरनाक मिशनों के लिए तैयार रहता है. चाहे आतंकवाद हो या प्राकृतिक आपदा, गरुड़ कमांडो हर मोर्चे पर अपनी जान जोखिम में डालकर डटे रहते हैं.

आइए जानें कि ये गरुड़ कमांडो कौन हैं और क्यों ये कश्मीर में पहलगाम हमले के बाद सुर्खियों में आई है चलिए जानें. साथ ही इन गरुड़ कमांडो फोर्स की भर्ती प्रक्रिया कैसी है, उन्हें कितना वेतन मिलता है और उनका प्रशिक्षण कितना कठिन है.

गरुड़ कमांडो फोर्स का गठन 6 फरवरी 2004 को किया गया था. गरुड़ कमांडो फोर्स  का उद्देश्य वायुसेना की संपत्तियों की सुरक्षा करना था, खासकर तब जब कश्मीर घाटी में वायुसेना के ठिकानों पर हमलों की घटनाएं बढ़ रही थीं. इस बल को न केवल युद्ध बल्कि बचाव, सुरक्षा और खुफिया जैसे मिशनों में भी माहिर माना जाता है.

गरुड़ कमांडो का क्या काम होता है?

इसका नाम हिंदू देवता गरुड़ के नाम पर रखा गया है. गरुड़ कमांडो भारतीय वायुसेना की एक विशेष बल इकाई है. दुश्मन के हवाई क्षेत्र में हमला करने, दुश्मन के रडार व अन्य उपकरणों को ध्वस्त करने, स्पेशल काम्बैट (लड़ाई) और रेस्क्यू (बचाव) ऑपरेशन के लिए का काम करती है.

गरुड़ कमांडो की भर्ती कैसे होती है?

गैर-कमीशन पदों (एयरमैन) के लिए चयन सामान्य वायु सेना भर्ती प्रक्रिया से शुरू होता है. इसमें शारीरिक परीक्षण, साक्षात्कार और मनोवैज्ञानिक परीक्षण शामिल हैं. एक बार असफल होने पर आपको दूसरा मौका नहीं मिलता. कमीशन प्राप्त अधिकारी बनने के लिए उम्मीदवारों को AFCAT परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है. इसके बाद उन्हें हैदराबाद स्थित वायुसेना अकादमी में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. यह प्रक्रिया नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक सोच को मजबूत करती है.

गरुड़ कमांडो प्रशिक्षण

गरुड़ कमांडो का प्रशिक्षण बेहद टफ और चुनौतियों से भरा होता है. इसमें शारीरिक सहनशक्ति, मानसिक शक्ति, हथियार संचालन, स्काई डाइविंग, जंगल युद्ध और शहरी संचालन जैसे विभिन्न मॉड्यूल शामिल हैं. यह प्रशिक्षण कई महीनों तक चलता है और केवल वे ही सफल होते हैं जो सभी परिस्थितियों में मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बने रहते हैं. विपरीत परिस्थितियों, मौसम में भी ये कमांडोज आसानी से दुश्मन को चित कर देते हैं.

गरुड़ कमांडो का वेतन कितना है?

गरुड़ कमांडो को उनके काम और जोखिम के आधार पर वेतन दिया जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी सैलरी करीब 70 हजार रुपए से शुरू होती है. इसके अलावा अधिकतम वेतन 50,000 रुपये है. 100 प्रति माह. 2,50,000 रुपये, जो उनके पद और अनुभव पर निर्भर करेगा. इसके अलावा, उन्हें ड्यूटी भत्ता, उच्च जोखिम भत्ता और विशेष प्रदर्शन प्रोत्साहन भी मिलता है.

(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)

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