लाइफस्टाइल
Divorce vs Judicial Separation: अगर पति-पत्नी के बीच तनाव रहता है तो इस रिश्ते को खत्म करने के लिए तलाक एक विकल्प बचता है. तलाक से कानूनी तौर पर रिश्ता खत्म हो जाता है. इसके अलावा ज्यूडिशियल सेपरेशन ऐसी स्थिति है जिसमें पति-पत्नी बिना तलाक के अलग रह सकते हैं.
Judicial Separation Law: शादी के बाद पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव होना आम बात है लेकिन आजकल जैसे मामले सामने आ रहे हैं वह रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं. कई मामले हैं जहां मैरिड लाइफ में हत्या और आत्महत्याएं हो रही हैं. ऐसे में लोग रिश्ते के जरा सा बिगड़ते ही अलग होने का फैसला बना लेते हैं. पहले तलाक लेना बहुत बड़ी बात हुआ करती थी लेकिन अब सोसायटी ने इसे स्वीकार लिया है. आजकल रिश्तों की कटवाहट की वजह से तलाक लेना कोई बड़ी बात नहीं है. तलाक के अलावा भी इसका एक समाधान ज्यूडिशियल सेपरेशन (Judicial Separation) है.
भारतीय कानून के मुताबिक, पति-पत्नी में तनाव बढ़ने पर वह तलाक के अलावा अलग रहने का फैसला भी ले सकते हैं. इसे ही ज्यूडिशियल सेपरेशन कहते हैं. तलाक के अलावा यह दूसरा रास्ता है. यह दोनों ही स्थिति अलग-अलग है लेकिन लोग इन्हे एक समझने की भूल करते हैं. ज्यूडिशियल सेपरेशन का अर्थ है कि, पति-पत्नी कोर्ट के आदेश पर अलग रहते हैं. उन्हें कोर्ट से अलग रहने की परमिशन मिल जाती है. इस दौरान उन्हें रिश्ते के बारे में सोचने-विचारने का मौका मिलता है.
Hindu Marriage Act, 1955- इस एक्ट के Section 10 के तहत ज्यूडिशियल सेपरेशन का नियम है. इसके साथ ही Special Marriage Act, 1954 में भी इसकी सुविधा है. ईसाई धर्म के लोगों के लिए Indian Divorce Act, 1869 में यह नियम है. मुस्लिम कानून में तलाक की कानूनी प्रक्रिया अलग है. कोर्ट से ज्यूडिशियल सेपरेशन की अनुमति लेकर अलग रह सकते हैं.
तलाक लेने पर शादीशुदा रिश्ता पूरी तरह से खत्म हो जाता है लेकिन ज्यूडिशियल सेपरेशन की स्थिति में रिश्ता बना रहता है. इसमें लड़का-लड़की दोबारा शादी कर साथ में आ सकते हैं. हालांकि, ज्यूडिशियल सेपरेशन होने पर आप किसी और से दूसरी शादी नहीं कर सकते हैं. तलाक में पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो जाता है और ज्यूडिशियल सेपरेशन की कंडीशन में कानूनी रूप से पति-पत्नी ही रहते हैं. इसका मतलब है कि, वह रिश्ते को थोड़ा समय दे रहे हैं.
ज्यूडिशियल सेपरेशन के लिए कोर्ट में याचिका दायर करनी होती है. यह तलाक से अलग होती है. इसका मतलब है कि, पति-पत्नी में लड़ाई-झगड़े होते हैं और वह रिश्ते को थोड़ा समय देना चाहते हैं. फिजिकली और मेंटली टॉर्चर करने, पार्टनर के एक्सट्रा मैरिटल अफेयर, धर्म परिवर्तन करने और शादी की जिम्मेदारी न निभाने की कंडीशन में ज्यूडिशियल सेपरेशन पर फैसला ले सकते हैं. कई मामलों में कोर्ट भी तलाक की जगह ज्यूडिशियल सेपरेशन की सलाह देता है. यह रिश्ते को बचाने के लिए एक मौका होता है.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.