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पीठ-कमर और गर्दन दर्द के साथ शुगर बढ़ने पर दवा और एक्सरसाइज भी नहीं करेगी काम, अगर नहीं छोड़ी ये आदत 

सोचिए आप सही डाइट ले रहे हैं और एक्सरसाइज भी कर रहे हैं तो भी आपका शुगर लेवल या बॉडी में पेन बढ़ता जाए तो आपको क्या लगेगा. कई बार कोई बीमारी जो कंट्रोल में थी वो अचानक से वर्स्ट होने लगती है. अगर आपके साथ ऐसा हो रहा तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है.

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पीठ-कमर और गर्दन दर्द के साथ शुगर बढ़ने पर दवा और एक्सरसाइज भी नहीं करेगी काम, अगर नहीं छोड़ी ये आदत 

Back, lower back, and neck pain causes

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अक्सर लोगों को ये लगता है कि डाइट और एक्सरसाइज से किसी भी बीमारी को कंट्रोल में रखा जा सकता है लेकिन ये आधा सच है. क्योंकि ये आप केवल अपने शरीर के लिए कर रहे होते हैं. कई बार दिमाग बीमार होता है और हम केवल शरीर पर काम करते हुए बीमारी या फिटनेस को सही करने का काम कर रहे होते हैं. आज आपको उस बीमारी के बारे में बताएंगे जो कई बीमारियों का कारण बनती है. और कई बीमारियों को बढ़ा देती है. ये है स्ट्रेस. जी हां अगर सब कुछ आप कर रहे लेकिन स्ट्रेस कम नहीं कर रहे तो आपका शरीर उन अच्छी चीजों को यूटिलाइज ही नहीं कर पाएगा. और यही चीज ब्लड शुगर से लेकर बॉडी पेन तक के साथ होती है.

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव (Stress) सिर्फ मानसिक परेशानी नहीं रहा, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर की सबसे खतरनाक बीमारियों को जन्म देने वाला कारक बनता जा रहा है. हाई ब्लड शुगर, बॉडी में पेन का इससे गहरा संबंध है. कई लोग यह सोचते हैं कि शुगर केवल मीठा खाने या गलत खानपान से होती है, या शरीर में दर्द का कारण गलत पॉश्चर ही होता है लेकिन विज्ञान बताता है कि लगातार तनाव में रहना भी इन बीमारी को खराब करता है.

कैसे स्ट्रेस बनता है खतरा

तनाव की स्थिति में हमारा दिमाग खतरे का संकेत देता है. इसके जवाब में शरीर दो मुख्य हार्मोन छोड़ता है, कोर्टिसोल (Cortisol) और एड्रेनालिन (Adrenaline). ये हार्मोन हमें तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करते हैं, जैसे भागना या लड़ना. यही प्रक्रिया “Fight or Flight Response” कहलाती है.समस्या तब शुरू होती है जब यह स्थिति रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है.

तनाव ब्लड शुगर कैसे बढ़ाता है?

जब कोर्टिसोल और एड्रेनालिन लगातार सक्रिय रहते हैं, तो वे लीवर को संदेश देते हैं कि वह अधिक ग्लूकोज़ (शुगर) रक्त में छोड़े, ताकि शरीर को तुरंत ऊर्जा मिले. यह व्यवस्था कुछ मिनटों के खतरे के लिए बनी थी, न कि महीनों और वर्षों तक चलने वाले मानसिक दबाव के लिए.

नतीजा यह होता है कि रक्त में शुगर बार-बार बढ़ती है और इंसुलिन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे धीरे-धीरे शरीर इंसुलिन के प्रति असंवेदनशील होने लगता है और Insulin Resistance विकसित होती है.यही स्थिति टाइप-2 डायबिटीज़ की बुनियाद बनती है.

क्या केवल तनाव से डायबिटीज हो सकती है?

सीधे शब्दों में तनाव अकेला कारण नहीं है, लेकिन यह एक मजबूत ट्रिगर बन सकता है. जो लोग लंबे समय तक प्री-डायबिटिक अवस्था में रहते हैं, लेकिन किसी बड़े मानसिक आघात जैसे नौकरी का दबाव, पारिवारिक तनाव, शोक या अवसाद के बाद अचानक उनका शुगर स्तर बढ़ जाता है. यानी तनाव बीमारी को पैदा नहीं करता, लेकिन सोई हुई बीमारी को जगा सकता है.

तनाव बढ़ने से शरीर में दर्द क्यों बढ़ता है या नसों पर क्यों दबाव होता है

तनाव बढ़ने पर शरीर “फाइट या फ्लाइट” मोड में चला जाता है. इस स्थिति में एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं, जिससे मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं. लगातार टेंशन में रहने से गर्दन, कंधे, पीठ और कमर की मांसपेशियों में जकड़न बनती है, जो नसों पर दबाव डालती है. इससे दर्द, झनझनाहट और भारीपन महसूस होता है. तनाव रक्त प्रवाह को भी प्रभावित करता है, जिससे ऊतकों तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है और सूजन बढ़ती है. यही कारण है कि मानसिक तनाव का असर सीधे शारीरिक दर्द में बदल जाता है.

तनाव से जुड़ी आदतें भी शुगर बढ़ाती हैं

तनाव सिर्फ हार्मोन के ज़रिए ही नुकसान नहीं करता, बल्कि यह हमारी आदतों को भी बिगाड़ देता है जैसे मीठा और जंक फूड ज्यादा खाने की तलब, नींद की कमी, आलस और शारीरिक गतिविधि में कमी और धूम्रपान या शराब की ओर झुकाव का बढ़ना. ये सभी बातें मिलकर शुगर ही नहीं हड्डियों और नसों को भी कमजोर करने लगती हैं.

समाधान क्या है?

  1. रोज़ 10–15 मिनट ध्यान या प्राणायाम
  2. गहरी सांस लेने की तकनीक
  3. पर्याप्त नींद
  4. प्रकृति के साथ समय
  5. भावनात्मक बातें साझा करना
  6. काम और जीवन के बीच संतुलन

ये छोटे कदम कोर्टिसोल के स्तर को कम करते हैं और शुगर नियंत्रण में वास्तविक मदद करते हैं. तनाव को हम हमेशा खत्म नहीं कर सकते, लेकिन उसे संभालना सीख सकते हैं.

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