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क्या बला है Fictosexuality, जिसमें असली नहीं फिल्मी किरदारों से हो जाता है प्यार? जानें क्यों आया ट्रेंड में

कहा जाता है, प्यार किसी से भी हो सकता है और इस एहसास में ना तो उम्र आड़े आती है, ना ही जाति-धर्म का कोई बंधन. इन सब से परे डिजिटल युग में अब प्यार के नए-नए तरीके और शब्द भी सामने आ रहे हैं. ऐसा ही एक टर्म 'फिक्टोसेक्शुअलिटी' (Fictosexuality) इन दिनों चर्चा में बना हुआ है. आइए जानें इसके बारे में...

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क्या बला है Fictosexuality, जिसमें असली नहीं फिल्मी किरदारों से हो जाता है प्यार? जानें क्यों आया ट्रेंड में

Fictosexuality: Attraction To Fictional Characters- AI Image

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Fictosexuality: Attraction To Fictional Characters- कहा जाता है, प्यार किसी से भी हो सकता है और इस एहसास में ना तो उम्र आड़े आती है, ना ही जाति-धर्म का कोई बंधन. इन सब से परे फिक्टोसेक्शुअलिटी (Fictosexuality) हमें यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि प्यार आखिर क्या है? क्या प्यार के लिए शरीर का होना जरूरी है या फिर एहसास ही काफी है? इसको समझने के लिए आपको एक वाकया बताते हैं, कुछ साल पहले जापान के अकिहिको कोंडो नाम के एक व्यक्ति ने हात्सुने मिकु नाम की एक वर्चुअल सिंगर से शादी कर ली थी. इसे फिक्टोसेक्शुअलिटी का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है.

यह एक ऐसा टर्म है, जहां लोग असली इंसानों के बजाय काल्पनिक किरदारों  (Attraction To Fictional Characters)।को अपना दिल दे बैठते हैं. यह शब्द इन दिनों चर्चा में बना हुआ है. आइए जानें इसके बारे में... 

रियल नहीं, फिक्शन से लगाव! समझिए क्या है 'फिक्टोसेक्शुअलिटी'? 

'फिक्टोसेक्शुअलिटी' शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जिन्हें  किसी किताब, कार्टून, एनिमे, वीडियो गेम या फिल्म के किरदार के प्रति गहरा रोमांटिक या सेक्शुअल अट्रैक्शन महसूस होता है. ऐसे लोगों को असली इंसानों के साथ रिश्ता बनाना मुश्किल या अरुचिकर होता है और वे इस तरह के काल्पनिक किरदारों के साथ ही इमोशनल कनेक्शन महसूस करने लगते हैं. इन लोगों का जुड़ाव काल्पनिक या दिखावटी नहीं होता, बल्कि ये रिश्ते दिल से महसूस किए जाते हैं और उनके लिए बहुत मायने भी रखते हैं. 

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क्या Asexual होने जैसा ही है ‘Fictosexual’?  

LGBTQ+ समुदाय के तहत, इसे अक्सर Asexuality के एक हिस्से के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं कि हर फिक्टोसेक्शुअल इंसान एसेक्शुअल ही हो. हर इंसान का आकर्षण महसूस करने का तरीका अलग होता है. यह भी प्यार करने का एक अलग तरीका है, जहां लोगों को असली इंसान की तुलना में अपनी कल्पनाओं में ज्यादा सुकून मिलता है.  

इस कंडीशन में अगर कोई फिक्टोसेक्शुअल है, तो वह खुद को स्ट्रेट, गे, पैनसेक्शुअल या किसी और पहचान से भी जोड़ सकता है. इसमें सबसे जरूरी यही है कि व्यक्ति वही पहचान अपनाए, जिसमें उसे खुद को सही और सहज महसूस हो. 

आखिर क्यों खुद को फिक्टोसेक्शुअल मानने लगे हैं लोग? 

दौर बदल रहा है, यह प्यार केवल किताबों, फिल्मी किरदारों या एनीमे तक सीमित नहीं रह गया है, अब कई लोग AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से भी जुड़ाव महसूस करने लगे हैं. साल 2025 में बड़ी संख्या में लोग AI चैटबॉट्स से प्यार और रिश्तों की तलाश करते दिखे. कई खबरे सामने आईं, जिसमें किसी ने पार्टनर के जाने के बाद AI में सहारा ढूंढा, तो कुछ लोग AI बॉट से शादी तक कर ली. इसका जवाब आकर खत्म होता है 'परफेक्ट' पार्टनर की तलाश पर. 

दरअसल, असली दुनिया के रिश्तों में झगड़े, धोखा, और गलतफहमियां भरी पड़ी हैं, इससे इतर काल्पनिक दुनिया में सब कुछ हमारे कंट्रोल में होता है. न यह कभी धोखा देगा, न बहस करेगा और हमेशा वैसा ही रहेगा जैसा आप चाहते हैं. साथ ही काल्पनिक किरदारों से रिजेक्ट होने का डर भी नहीं होता,  यही सब बातें लोगों को उनकी ओर आकर्षित करती है. ऐसे में कई लोग असली दुनिया के रिश्तों की कड़वाहट से बचने के लिए इस सुरक्षित और 'परफेक्ट' दुनिया को चुन रहे हैं... 

अब इंसान नहीं भर पा रहे वो खालीपन?

फिक्टोसेक्शुअल का एक बड़ा फायदा यह है कि इसमें सब कुछ आपके कंट्रोल में होता है, रिश्ते की शुरुआत, समय, गति और यहां तक कि उसे कितने समय तक रखना है सब. आज के समय में जब असली रिश्ते अस्थिर और अनिश्चित लगते हैं, वहां फिक्टोसेक्शुअलिटी एक बड़ा सवाल पैदा कर रहा है कि क्या काल्पनिक रिश्ते उस भावनात्मक खालीपन को भर रहे हैं, जिसे इंसान अब भर नहीं पा रहे या फिर भरना ही नहीं चाहता?

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