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Blood Related Disease: क्या आपको पता है कि रॉयल डिजीज किसे कहते हैं और ब्रिटेन की महारानी से ये बीमारी उनके बच्चों तक पहुंची थी?
डीएनए हिंदी: महारानी विक्टोरिया (Queen Victoria) कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं लेकिन उनमें से एक समस्या थी उनकी शाही बीमारी (Royel Disease) थी जिससे वह ही नहीं, उनके बेटे और बेटियां भी पीड़ित हुए और यहां तक की उनके एक बेटे की जान भी चली गई थी. ब्लड से जुड़ी इस बीमारी (Blood Related Disease) के बारे में सबसे पहले इसी शाही घराने (Royel Family) में चला था और इसी कारण इस बीमारी को रॉयल डिजीज कहा जाने लगा. ये बीमारी थी हीमोफिलिया (Hemophilia) की.
हीमोफिलिया वो बीमारी है जिसमें ब्लड क्लॉट नहीं हो पाता है. इस बीमारी का पता महारानी विक्टोरिया से लगा था और इस बीमारी की रोगी के रूप में वह दर्ज हुई थीं. इसके बाद से ही इसे रॉयल डिजीज यानी शाही बीमारी के रूप में जाना जाने लगा क्योंकि केवल महारानी नहीं, उनके बेटे और बेटियों में भी ये बीमारी आई और उनसे कई देशों में भी पहुंची थी. हीमोफिलिया एक वंशानुगत रक्तस्राव विकार है जिसमें रक्त ठीक से नहीं जमता है. स्थिति जीवन के लिए खतरा बन सकती है क्योंकि चोट या सर्जरी के बाद प्रभावित व्यक्ति रक्तस्राव रूकता ही नहीं है.
महारानी विक्टोरिया और उनका परिवार
महारानी एलिजाबेथ हीमोफीलिया की शिकार थीं और इसके बारे में उन्हें या शाही परिवार को तब पता चला था जब परिवार के सदस्य एक के बाद एक इस बीमारी की चपेट में आने लगे. महारानी विक्टोरिया की दो बेटियों और एक बेटे को यह बीमारी हो गई थी. इसकी वजह से ही उनके बेटे प्रिंस लियोपोल्ड की 30 साल में मौत एक दुर्घटना के बाद रक्तस्राव से हो गई थी.
दूसरे देश में ऐसे पहुंची ये बीमारी
महारानी की दो बेटियां एलिस और बीट्राइस की शादी अलग-अलग देशों के राजकुमारों से हुई तो यह बीमारी आनुवांशिक तौर पर दूसरे देशों में भी फैल गई और उसके बाद ये बीमारी फैलती ही गई. रानी ने अपने नौ बच्चों में से तीन को यह रोग था. उनकी बेटियों एलिस और बीट्राइस ने उनके कई बच्चों इस बीामरी से ग्रस्त हुए. यह रोग विक्टोरिया के बाद तीन पीढ़ियों तक विभिन्न शाही परिवार के सदस्यों के माध्यम से चला और फिर अचानक गायब हो गया.
विशेषज्ञों के मुताबिक इस रोग का कारण खून में मौजूद एक खास प्रकार के प्रोटीन की कमी होती है. जिसे क्लॉटिंग फैक्टर कहा जाता है. इस प्रोटीन की विशेषता ये है कि यह बहते हुए खून के थक्के जमाकर उसका बहना रोक देता है , लेकिन जिसमें ये प्रोटीन नहीं होता उनका ब्लड एक बार बहना शुरू किसी भी कारण से हो तो वह रूकता नहीं है.
होती आदमियों को हैं लेकिन फैलती महिलाओं से है
आमतौर पर यह बीमारी पुरुषों को ही होती है लेकिन यह औरतों द्वारा फैलती है. जिस आदमी को ये रोग होता है उसके बच्चो में अनुवांशिक रूप से बीामरी मिलती है. बेटियां केवल इस रोग की वाहक होती हैं और पुरूष इस रोग के शिकार होते हैं. ये जीन गुणसूत्र आनुवांशिक सामग्री जो व्यक्ति के लिंग का निर्धारण करती है पर स्थित होते हैं. बेटोंअपनी मां से एक्स क्रोमोसोम विरासत में मिलते हैं.
कैसे पता चलेगा कि आपके पास जीन है
इसके संकेत बच्चे के जन्म के पहले 18 महीनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं और तब इसकी जांच करानी चाहिए
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