लाइफस्टाइल
ब्रेस्टफीडिंग कराना एक मां के लिए सुखद अहसास होता है. यह मां और बच्चे के बीच प्यार को बढ़ाता है, लेकिन आज के समय में मोबाइल ने इसे ब्रेक कर दिया है.
डीएनए हिंदी: गर्भावस्था के समय एक मां अपने बच्चे के लिए बहुत सतर्क रहती है. उसे खुद के लाइफस्टाइल में काफी सारे बदलाव करने पड़ते हैं. इतना ही नहीं छोटी-छोटी सी बातों का ध्यान भी रखना पड़ता है, लेकिन इतना ध्यान सिर्फ प्रेग्नेंसी तक ही नहीं रहता, बल्कि मां को ब्रेस्टफीडिंग के वक्त पर भी कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है, एक अच्छी डाइट और खानपान का भी ख्याल रखना पड़ता है. साथ ही मां को ब्रेस्टफीडिंग के वक़्त कभी भी फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसका सीधा असर उनके बच्चे पर पड़ता है. आइए जानते हैं हाथ में फोन लेकर बच्चों को रखना कितना भारी पड़ सकता है.
क्या है सही
एक्सपर्ट के हिसाब से पैरेंट्स और बच्चे के आस पास होने के वक्त कभी भी फोन का इस्तेमाल नहीं करना है. छोटे बच्चों की मां बहुत कम आराम कर पाती है, साथ ही बच्चे को दूध पिलाते वक्त फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
खराब की है जिंदगी
फोन से हमें कई फायदे तो हैं लेकिन कई महिलाएं स्तनपान के वक्त स्मार्टफोन का इस्तेमाल करतीं हैं. जैसे ही वह शिशु पर ध्यान देती हैं. इसे मां की शारीरिक उत्तेजना बढ़ जाती है. यह बच्चों के लिए नुकसानदायक होती है.
इन चीजों पर पड़ता है असर
ब्रेस्टफीडिंग के समय फोन का इस्तेमाल करना मां और शिशु के पोस्चर को बिगाड़ सकता है. ऐसे में मां को कमर में दर्द भी हो सकता है. वहीं शिशु दूध सही से नहीं पी पाता. इस वजह से शिशु की नींद में परेशानी हो सकती है. उसकी तबियत भी खराब हो सकती है.
(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।)
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