लाइफस्टाइल
Gym Craze Among Youth: युवाओं में इन दिनों जिम का क्रेज बढ़ रहा है. लेकिन आपको बता दें कि बिना ECG, BP चेक कराए युवाओं का ट्रेड मील पर उतरना जानलेवा हो सकता है. ऐसे में फिटनेस की अंधी दौड़ में आपकी ये गलतियां जानलेवा साबित हो सकती हैं...
"फिट दिखो"—सोशल मीडिया पर ये ट्रेंड जितना ग्लैमरस दिखता है, असल जिंदगी में उतना ही खतरनाक साबित हो रहा है. बीते कुछ महीनों में देशभर से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां 18–45 साल के युवा जिम में एक्सरसाइज करते हुए अचानक कार्डियक अरेस्ट के शिकार हो गए. यही नहीं खेलते कूदते बिल्कुल स्वस्थ दिखने वाले युवा एक शॉट मारा और दुनिया से अलविदा कह गए. ये सिर्फ भारत के किसी एक राज्य या फिर एक जिले की कहानी नहीं है बल्कि यह दिल्ली से लेकर कर्नाटक तक मुंबई से लेकर उत्तर प्रदेश तक सभी राज्यों में देखने को मिला है. हालात तब और खराब हो गए जब कर्नाटक के हासन से चौंकाने वाली खबर आई की महज 40 दिन में 21 से अधिक युवा कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुए.
लगातार इस तरह की डेथ को लेकर डॉक्टरों का मानना है कि यह "बदकिस्मती" नहीं, बल्कि एक खतरनाक लाइफस्टाइल की देन है. हमने युवाओं को लगातार हो रहे कार्डियक अरेस्ट पर बात की सर्वोदय हॉस्पिटल की कार्डियोलॉजिस्ट ग्यान्ती आरबी सिंह से.
नोएडा वेस्ट में सर्वोदय अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. ग्यान्ती बताती हैं, "हमें कोशिश करनी चाहिए कि एक्सरसाइज हमेशा सुबह सुबह ही करें और ग्रेजुअली यानी धीरे धीरे शुरुआत करनी चाहिए. वह आगे कहती हैं कि अगर आपके परिवार में हार्ट अटैक की हिस्ट्री है तो कोशिश करनी चाहिए कि किसी भी एक्सरसाइज को शुरु करने से पहले अपनी जांच जरूर करा लें. यही नहीं उनकी सलाह है कि किसी भी खेल को खेलने से पहले स्क्रीनिंग जरूर करा लें जिससे आपको पता चल जाएगा कि आपको कितना रिस्क है.
ग्यान्ती आगे सलाह देती हैं कि अगर आपकी रिपोर्ट ठीक आती है तभी आपको एक्सरसाइज करनी है. वहीं वो यह भी सलाह देती हैं कि हैवी वेट लिफ्टिंग वाली एक्सरसाइज से बचना चाहिए. इससे आपके ब्लड वैसेल्स में टियर यानी फट जाती है, जिससे क्लोटिंग की समस्या हो जाती है जिससे अटैक और अरेस्ट का खतरा रहता है.
जहां तक युवाओं की कार्डियक अरेस्ट से हो रही मौतों की बात करें तो वह कहती हैं कि यदि किसी के भी परिवार में सडन कार्डियक अरेस्ट या फिर हार्ट अटैक की हिस्ट्री रही है तो ऐसे लोगों को रूटीन चेकअप अर्ली एज में ही कराना चाहिए. डॉक्टर बताती हैं कि हर शरीर की लिमिट होती है. लेकिन युवा बिना फिजिकल जांच ECG या ब्लड प्रेशर चेक कराए ही हाई इंटेंसिटी वर्कआउट शुरू कर देते हैं. इससे दिल पर अचानक बहुत लोड आता है, जो अरेस्ट की वजह बन सकता है.
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डॉ. ग्यान्ती ने बताया कि इन दिनों युवाओं का हेल्थ रूटीन बिलकुल ठीक नहीं है. लोग लगातार मोबाइल पर रहते हैं. रात भर स्क्रीन पर वक्त बिताना, फिर सुबह जिम जाना—ये शेड्यूल दिखने में डिसिप्लिन लगता है लेकिन शरीर के लिए जहर साबित हो रहा है. यही नहीं वर्किंग कल्चर भी काफी बदल गया है. लोग लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं. उनकी वॉक कम हो गई है.. 'नींद पूरी न हो तो शरीर अंदर से थका होता है. इस स्थिति में वर्कआउट करने से मांसपेशियों से लेकर हार्ट तक सब पर प्रेशर बढ़ता है.'
अगर हार्ट को बचाना है तो जांच जरूरी है तो वह सलाह देती हैं कि साल में एक बार ECG और कार्डिएक स्क्रीनिंग जरूरी है. हार्ट के रूटीन टेस्ट में ईसीजी, ट्रेडमील औरटीएमटी टेस्ट जरूर कराना चाहिए. किसी भी वर्कआउट रूटीन से पहले मेडिकल फिटनेस टेस्ट करवाएं. स्लीप, स्ट्रेस और डायट को जितना महत्व वेटलिफ्टिंग को देते हैं, उतना ही दें.और सबसे ज़रूरी किसी भी लक्षण (थकान, चक्कर, सीने में दर्द) को नजरअंदाज न करें.
बॉडी बनाइए, लेकिन दिमाग और दिल को भी फिट रखिए. क्योंकि जिम की मशीनें आपको फिट तो बनाएंगी लेकिन जान आपकी जांच ही बचाएगी.
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