लाइफस्टाइल
आजकल सर्वाइकल बीमारी आम हो गई है और तकनीक के अत्यधिक उपयोग के कारण यह बढ़ती जा रही है. गर्दन में दर्द, अकड़न और थकान की समस्या बढ़ गई है.
आजकल सर्वाइकल की बीमारी इतनी आम हो गई है कि हर दस में से एक व्यक्ति इससे पीड़ित है. वैसे तो इसके कई कारण हैं, लेकिन मुख्य कारण हैं बदलते समय में टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल, घंटों मोबाइल फोन पर समय बिताना, टीवी से चिपके रहना और सबसे बड़ी बात, लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठना. आयुर्वेद में इसका सही इलाज है और औषधीय जड़ी-बूटियों और शारीरिक गतिविधियों के इस्तेमाल से इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है.
आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियां:
जिन लोगों को सर्वाइकल की समस्या होती है, उन्हें आयुर्वेद में सटीक उपचार मिलता है.
गर्दन के व्यायाम महत्वपूर्ण हैं: सर्वाइकल के रोगियों के लिए गर्दन के व्यायाम बहुत महत्वपूर्ण हैं. इनमें गर्दन को धीरे-धीरे आगे, फिर ऊपर और पीछे झुकाना, दाएं और बाएं घुमाना और घड़ी की दिशा में घुमाना शामिल है. ये व्यायाम दिन में कम से कम दो बार बैठकर करना चाहिए.
तेल मालिश और शेक: तेल मालिश और शेक भी सर्वाइकल की समस्या में फायदेमंद हो सकता है. किसी भी तेल से गर्दन पर हल्के हाथों से मालिश करना और कपड़े की थैली को गर्म करके उससे शेक करना बहुत फायदेमंद होता है. इससे आपको दर्द से तुरंत राहत मिलती है और दवा लेने की भी जरूरत नहीं पड़ती.
आयुर्वेदिक दवाएं: आयुर्वेद में अश्वगंधा और शिलाजीत जैसी दवाएँ सर्वाइकल समस्याओं के लिए रामबाण हो सकती हैं. अश्वगंधा नसों को आराम पहुंचाता है, जबकि शिलाजीत कफ, वात और पित्त दोषों को दूर करता है. सर्वाइकल समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए आयुर्वेद औषधीय जड़ी-बूटियों और शारीरिक व्यायाम का उपयोग करके सटीक उपचार प्रदान करता है.
महत्वपूर्ण: अश्वगंधा और शिलाजीत जैसी आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन किसी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें. अपनी मेडिकल हिस्ट्री बताने के बाद खुराक और सेवन की विधि के बारे में सलाह के लिए किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लें.
(Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है. इस पर अमल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)
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