लाइफस्टाइल
आलिया भट्ट (Alia Bhatt) ने फिल्म जिगरा के रिलीज के समय अपने स्वास्थ्य समस्या का खुलासा किया था. उन्होंने खुलासा किया था कि वह एडीएचडी (Attention-deficit/hyperacuity disorder) से पीड़ित हैं. यह क्या है और ADHD और इसके लक्षण क्या हैं? जान लें.
आलिया भट्ट ने एक इंटरव्यू खुलासा किया था कि उन्हें ADHD की बीमारी है. उन्होंने बताया कि बचपन से ही वह बातचीत के दौरान ध्यान नहीं देती थीं, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि उन्हें ADHD है. जब अभिनेत्री ने मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराया, तो आलिया को पता चला कि वह ADHD स्पेक्ट्रम में उच्च स्तर पर हैं.
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर ( ADHD ) एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है. इसका निदान अक्सर बचपन या किशोरावस्था में किया जाता है. हालाँकि, ADHD से पीड़ित कई बच्चे वयस्क होने पर भी लक्षणों का अनुभव करते रहते हैं, फिर भी सफल करियर के साथ स्वस्थ जीवन जीते हैं. कुछ तो मशहूर भी हो जाते हैं. आलिया भट्ट उन मशहूर हस्तियों में से एक हैं , जो ADHD के साथ जी रही हैं. चलिए इस मानसिक बीमारी के बारे में विस्तार से जानें.
ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) क्या है?
एडीएचडी एक न्यूरोडेवलपमेंटल विकार है जो ध्यान, आवेग नियंत्रण और अति सक्रियता को प्रभावित करता है. यह दुनिया भर में 8-10% बच्चों और 4-5% वयस्कों को प्रभावित करता है. इसके
ADHD के लक्षण क्या हैं:
असावधानी, अति सक्रियता, आवेगशीलता, अव्यवस्था और समय प्रबंधन में कठिनाई.
ADHD का दैनिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
1. समय प्रबंधन और प्राथमिकता तय करने में चुनौतियों का सामना करना.
2. काम या दैनिक गतिविधियों के दौरान ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई.
3. आवेग नियंत्रण के साथ संघर्ष, जिसके कारण आवेगपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं.
4. ईमोशन्स को कंट्रोल करने में कठिनाई. ये दुख या गुस्सा कंट्रोल करने में बहुत दिक्कत का सामना करते हैं
5.बार-बार होने वाले विकर्षण जो दिमाग को दिवास्वप्न की स्थिति में ले जाते हैं, उन्हें मन भटकना कहते हैं. ऐसा डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क में अति सक्रियता के कारण होता है, जिससे मस्तिष्क का ध्यान भटक जाता है और वह दिवास्वप्न की स्थिति में चला जाता है
6.ये लोग काम को टालते हैं और तनाव का शिकार जल्दी होते हैं. प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में कम सक्रियता के कारण ये किसी भी काम को करने से बचते रहते हैं.
ADHD से मुकाबला करने के तरीके:
1. दवा और थेरेपी.
2. जीवनशैली में बदलाव: नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद.
3. माइंडफुलनेस अभ्यास: ध्यान, योग और गहरी साँस लेना.
4. प्रियजनों और पेशेवरों से सहायता लेना.
(Disclaimer: हमारा लेख केवल जानकारी प्रदान करने के लिए है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.)
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