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Age Defying Experiment : इंग्लैंड में हुआ प्रयोग, जवान हुए बूढ़े चूहे. क्या अब आदमियों की बारी?

Age Defying Experiment : इंग्लैंड में एक ताज़ा शोध हुआ जिसमें फीकल माइक्रोब के प्रत्यारोपण के ज़्ररिए चूहों को जवान किया गया प

Age Defying Experiment : इंग्लैंड में हुआ प्रयोग, जवान हुए बूढ़े चूहे. क्या अब आदमियों की बारी?
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डीएनए हिंदी : जवानी और जीवन इसे बरक़रार रखने की मानवीय कोशिशों पर पूरी नज़र दी जाए तो सभ्यता के अन्य सभी प्रयास बौने नज़र आएंगे. इन कोशिशों की लिस्ट में नया जुड़ा है लंदन में किया हुआ एक प्रयोग. यह प्रयोग चूहे पर किया गया था. ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने इस शोध के ज़रिए बूढ़े चूहों को जवान चूहों में बदल दिया. 

कुछ यूं हुआ था यह Age Defying शोध 
जवानी हासिल करने के इस शोध में युवा चूहे के फीकल माइक्रोब्स को बूढ़े चूहे में प्रत्यारोपित अर्थात ट्रांसप्लांट किया गया. यह प्रकिया पूरी करने के बाद जब वैज्ञानिकों ने रिजल्ट की ओर ध्यान दिया तो मालूम हुआ कि बूढ़े चूहे युवतर हो गए थे. उनकी शारीरिक उम्र अपेक्षाकृत काफ़ी कम हो गई थी. उनकी आंखें, आंत, और दिमाग युवा चूहे जितने सशक्त हो गए थे. 
हालांकि इस शोध से यह भी ज्ञात हुआ कि यह एक्सपेरिमेंट इसलिए किया गया था कि आंतों के माइक्रोबायोटा में हेर-फेर करने से उम्र बढ़ने पर होने वाले बीमारियों का ख़तरा बढ़ता जाता है. इसकी वजह से रेटिना और मस्तिष्क में सूजन भी बढ़ती है. 

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इम्यूनिटी सेल अधिक एक्टिव हुए 
यह शोध कई और जानकारियों को लेकर आ रहा है. इन जानकारियों में यह भी शामिल है कि इस ट्रांसप्लांट के बाद  प्रतिरक्षा कोशिकाएं यानी इम्यूनिटी सेल अधिक एक्टिव दिखाई दिए, पर साथ ही आंत की परतों में बैक्टीरिया के जाने की संभावना भी बढ़ती दिखाई दी जिससे रेटिना में प्रोटीन के स्तर बढ़ने लगे थे. 

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