लाइफस्टाइल
अभी तक कुत्तों को ले में खाना खिलाने को लेकर बवाल हो रहा था अब भारत के एक शहर ने बंदरों को खाना खिलाने पर बैन लगा दिया है. खास बात ये है कि बंदरों को खाना खिलाते हुए पक़ड़े जानें पर 5 हजारा का जुर्माना तय किया गया है.
एक कहावत है, "बंदर को सहलाकर आप बंदर बन गए." और अब अगर आप बंदर को सहलाकर खाना खिलाएंगे, तो आपको भारी जुर्माना देना होगा. और वो भी सौ-दो सौ नहीं, बल्कि पांच हजार रुपये तक. अभी तक कुत्ते को खाना खिलाने को लेकर बवाल थम नहीं रहा कि बीच में अब बंदर भी आ गए हैं.
यह नियम कहाँ से लागू हुआ? यह निर्णय किसने लिया?
दार्जिलिंग नगर पालिका ने यह सख्त फैसला लिया है. अगर आप दार्जिलिंग जाकर बंदरों को खाना खिलाते हैं, तो आपको पाँच हज़ार रुपये का जुर्माना देना होगा. दार्जिलिंग नगर पालिका ने इस संबंध में एक दिशानिर्देश जारी किया है और पूरे शैलशहर में बैनर-पोस्टर लगा दिए हैं. चाहे पर्यटक हों, आम आदमी हों या स्थानीय निवासी, अगर आप बंदरों को खाना खिलाते हुए पकड़े गए, तो आपको जुर्माना भरना पड़ेगा.
जंगली जानवरों की एक प्रवृत्ति होती है पहाड़ों और जंगलों में भोजन की तलाश में भटकना. हालांकि, पिछले कुछ सालों में बंदर अपनी इस प्रवृत्ति या आदत से दूर हो गए हैं. वे पहाड़ों को छोड़कर शहरों में भोजन की तलाश में आ रहे हैं. क्योंकि पहाड़ों में भोजन आसानी से मिल जाता है. पर्यटक भी उन्हें ज़िंदा रहते हुए खाना खिला रहे हैं. कई बार तो ये लोगों के हाथों से छीन लिए जाते हैं. इसीलिए वे अब सुबह के समय ही बस्तियों में आ रहे हैं.
बंदरों के गुस्से का शिकार हो रहे थे लोग
दार्जिलिंग के पर्यटन स्थलों में से एक, माल रोड पर, बंदरों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. पर्यटकों से खचाखच भरे माल रोड पर खाने-पीने की कोई कमी नहीं है. इसीलिए वे वहाँ जमा होते हैं. नतीजतन, शैलशहर के निवासी बंदरों के गुस्से का शिकार हो रहे हैं. इसके साथ ही, बंदरों के काटने से रेबीज के मामलों की संख्या भी बढ़ रही है. नगर पालिका इसे लेकर चिंतित है.
दार्जिलिंग नगर पालिका के चेयरमैन दीपेन ठाकुर ने कहा, "अगर इन्हें खाना न मिले तो ये काट भी लेते हैं. दार्जिलिंग में रेबीज़ के मामले बढ़ गए हैं. इसलिए हम एक प्रस्ताव पारित कर इसे अनिवार्य कर रहे हैं. पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाने का काम शुरू हो चुका है. इन्हें अपनी सामान्य खान-पान की आदतों पर वापस लौटने दीजिए. जुर्माना सबके लिए एक जैसा है, चाहे पर्यटक हों या आम लोग. इसकी निगरानी के लिए एक अलग टीम बनाई गई है. वे इस पर नज़र रखेंगे. खासकर मॉल वाले इलाके में.
बंदरों को खाना खिलाने की मनाही होती है
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर वन विभाग, स्वयंसेवी संगठनों और बाजार समितियों के साथ बैठक हो चुकी है. इस संबंध में उनका सहयोग भी मांगा गया है. राज्य के मुख्य वनपाल (वन्यजीव) भास्कर जेवी ने बताया, "पहाड़ों में पर्यटकों या आम लोगों को बंदरों को खाना खिलाने की मूलतः मनाही होती है. इससे बंदरों के खाने की आदतें बदल रही हैं. जो बंदरों के लिए भी बुरा है. अगर उन्हें खाना नहीं मिलेगा, तो वे हमला कर देंगे. इसीलिए दार्जिलिंग नगर पालिका ने यह फैसला लिया है. हम भी सहयोग करेंगे."
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.