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Elusive Rare Frog: चिली में 130 साल बाद फिर से मिला ये दुर्लभ और रहस्यमयी मेंढक, क्या है इसकी खासियत

एक दुर्लभ मेंढक जिसे हमेशा के लिए लुप्त मान लिया गया था, वह फिर से दिखाई दिया है. चिली के वैज्ञानिकों ने अलसोडेस विट्टाटस की पुनः खोज लेने की पुष्टि की है, जो 1893 के बाद से नहीं देखा था और ये बेहद रहस्यमयी प्रजाति है.

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Elusive Rare Frog: चिली में 130 साल बाद फिर से मिला ये दुर्लभ और रहस्यमयी मेंढक, क्या है इसकी खासियत

अलसोडेस विट्टाटस प्रजाति के दुर्लभ मेंढक फिर से मिले

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एक दुर्लभ मेंढक जिसे हमेशा के लिए खो जाने का अनुमान था, फिर से दिखाई दे दिया है. चिली के वैज्ञानिकों ने इस मेंढक प्रजाति को 1893 के बाद से नहीं देखा था. मेंढक की ये  प्रजाति अलसोडेस विट्टाटस है और इसकी पुनः खोज की पुष्टि हो ही गई है.

इस खोज की घोषणा 11 मार्च 2025 को यूनिवर्सिटी ऑफ कॉन्सेप्सियन और यूनिवर्सिटी ऑफ वालपाराइसो के शोधकर्ताओं ने एक ब्लॉग पोस्ट में की है. 6 मार्च को जर्नल ज़ूकीज़ में प्रकाशित उनके अध्ययन से इस प्रजाति के बारे में नई जानकारी भी दी है.
 
एक लंबे समय से लुप्त थी ये प्रजाति

फ्रांसीसी कीटविज्ञानी फिलिबर्ट जर्मेन ने पहली बार 1893 में चिली के ला अराउकेनिया क्षेत्र में हैसिंडा सैन इग्नासियो डी पेमेहु में अलसोडेस विट्टाटस की खोज की थी. उन्होंने तीन नमूने एकत्र किए, जिन्हें बाद में 1902 में एक प्रसिद्ध प्राणी विज्ञानी रोडोल्फो अमांडो फिलिपी द्वारा वैज्ञानिक रूप से वर्णित किया गया था.

अलसोडेस विट्टाटस

तब से ये मेंढक प्रजाति गायब हो गई थी. कई खोजों के बावजूद, 130 वर्षों तक कोई पुष्टि नहीं हुई थी. वैज्ञानिकों ने 1995 से 2002 के बीच कई प्रयास किए, लेकिन मेंढक का कोई सबूत नहीं मिला. यहां तक ​​कि 2015 और 2016 में एक बाद के अभियान ने दो अलग-अलग अलसोडेस प्रजातियों की पहचान की, लेकिन अलसोडेस विट्टाटस की नहीं.

दशकों से चली आ रही खोज समाप्त हुई

सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना था कि जर्मेन ने मेंढक को मूल रूप से कहां पाया था. हैसिंडा सैन इग्नासियो डे पेमेहु एक बहुत बड़ी संपत्ति थी, और अभिलेखों में सटीक विवरण का अभाव था. वैज्ञानिकों ने खोज क्षेत्र को सीमित करने के लिए जर्मेन के ऐतिहासिक नोटों की सावधानीपूर्वक जांच की.

2023 और 2024 के बीच, शोधकर्ता क्लाउडियो कोर्रिया और एडविन रिवरोस ने एक और अभियान का नेतृत्व किया. इस बार, उन्होंने आखिरकार लोल्को, पोर्टल्स और टुपुयुंटुए नदी घाटियों में अलसोडेस विट्टाटस को देखा.

खतरे झेल रही ये प्रजाति 

अलसोडेस विटाटस की पुनः खोज ने महत्वपूर्ण जैविक और पारिस्थितिक डेटा प्रदान किया है. हालांकि, क्षेत्र अवलोकन से पता चलता है कि इस प्रजाति को अपने प्राकृतिक आवास में गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है.

चिली के विविध पारिस्थितिकी तंत्र में कई अज्ञात उभयचर (Unknown amphibian)हैं, जो तत्काल इस प्रजाति के संरक्षण की मांग कर रहे हैं. वैज्ञानिक इस बात पर जोर देते हैं कि इन दुर्लभ प्रजातियों को समझने और उनकी सुरक्षा के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है.

अलसोडेस विटेटस में कई विशिष्ट विशेषताएं हैं:

शारीरिक विशेषताएं

1. अनोखा रंग पैटर्न: अलसोडेस विटेटस में भूरे या हरे रंग के साथ काले धब्बे या धारियां होती हैं.

2. मध्यम आकार: यह मेंढक प्रजाति मध्यम आकार की होती है, जिसकी लंबाई लगभग 3-5 सेंटीमीटर होती है.

आवास और व्यवहार

1. आवास: अलसोडेस विटेटस चिली के चिलोए द्वीप के जंगलों और झील के किनारों पर निवास करता है.

2. रात्रिचर व्यवहार: यह मेंढक रात्रिचर है, जिसका अर्थ है कि यह रात में सक्रिय होता है, और अपनी शामें ज़मीन पर भोजन की तलाश में बिताता है.

3. आहार: अलसोडेस विटेटस कीड़ों और अन्य छोटे अकशेरुकी जीवों को खाता है.

संरक्षण स्थिति

1. कमज़ोर आबादी: अलसोडेस विटेटस की आबादी घट रही है, जिससे संरक्षण प्रयास आवश्यक हो गए हैं.

2. खतरे: आवास विनाश, गैर-देशी प्रजातियों का प्रवेश और जलवायु परिवर्तन इस मेंढक प्रजाति की गिरावट में योगदान करने वाले कारक हैं.

अलसोडेस विटाटस अपनी अनूठी विशेषताओं और चिली के विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका के कारण एक आकर्षक प्रजाति है.

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