लाइफस्टाइल
एक वित्तीय सलाहकार फर्म ने तलाक पर एक सर्वेक्षण किया. यह सर्वेक्षण उन लोगों के बीच किया गया जो तलाकशुदा थे या जिन्होंने तलाक के लिए आवेदन किया था.
बात जब पति-पत्नी की हो, तो छोटी-मोटी तकरारें होती ही रहती हैं. किसी न किसी बात पर झगड़े होते ही रहते हैं. लेकिन समय के साथ, पता ही नहीं चलता कि कब ये छोटी-मोटी तकरारें बड़ी बहस में बदल जाती हैं और बात तलाक तक पहुंच जाती है. ऐसे कितने ही जोड़े होंगे जिनका तलाक हुआ होगा? लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 42 प्रतिशत पुरुषों ने तलाक के लिए कर्ज लिया है.
एक वित्तीय सलाहकार फर्म ने तलाक पर एक सर्वेक्षण किया. यह सर्वेक्षण उन लोगों के बीच किया गया जो तलाकशुदा थे या जिन्होंने तलाक के लिए अर्जी दी थी. इसमें टियर-1 और टियर-2 शहरों के 1,258 लोग शामिल थे. सर्वेक्षण में पाया गया कि 19% महिलाओं और 49% पुरुषों ने तलाक से संबंधित खर्चों पर 5 लाख रुपये से अधिक खर्च किए.
पैसा बनता है तलाक का कारण
सर्वेक्षण में 67 प्रतिशत लोगों ने माना कि शादी के दौरान पैसों को लेकर उनके बीच अक्सर बहस होती थी. 43 प्रतिशत ने कहा कि वित्तीय विवाद या असमानता उनके तलाक का सीधा कारण थे. 56 प्रतिशत महिलाओं की कमाई शादी के समय उनके पतियों से कम थी. केवल 2 प्रतिशत महिलाओं की कमाई उनके पतियों से ज़्यादा थी.
सर्वेक्षण करने वाली वन फाइनेंस एडवाइजरी कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ केवल भानुशाली ने कहा कि विवाहित पुरुषों और महिलाओं के बीच वित्तीय असमानता तलाक का एक प्रमुख कारण है. अलगाव की लागत तनाव बढ़ाती है और अस्थिरता पैदा करती है. इसलिए, भावनात्मक तैयारी जितनी ही महत्वपूर्ण है, वित्तीय तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
तलाक के बाद कर्ज में डूबे पुरुष
तलाक के बाद गुजारा भत्ता भी आया. गुजारा भत्ता पुरुषों की सालाना आय का 38% था. गुजारा भत्ता चुकाने के बाद 29 प्रतिशत पुरुषों की कुल संपत्ति नकारात्मक पाई गई. 42 प्रतिशत पुरुषों ने तलाक से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए शादी के बाद कर्ज लिया, जबकि 46 प्रतिशत महिलाओं ने अपनी वेतन वाली नौकरी छोड़ दी या कम कर दी.
इसलिए, वर्तमान कर्ज़, भविष्य की बचत, माता-पिता की ज़िम्मेदारियों, आय की अनिश्चितता और जीवनशैली की अपेक्षाओं के बारे में जागरूक होना ज़रूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि शादी से पहले वित्तीय मामलों पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए. इससे रिश्ते में पारदर्शिता बनी रहती है और भविष्य में होने वाले झगड़ों से बचने में मदद मिलती है.
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