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शराब पीने से पहले जमीन पर क्यों डाली जाती हैं कुछ बूंदें? “लिबेशन” की यह परंपरा आज भी क्यों जिंदा है?

क्या आपने कभी नोटिस किया है कई लोग शराब पीने से पहले गिलास से थोड़ी सी ड्रिंक ज़मीन पर गिरा देते हैं? पहली नजर में यह अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे सिर्फ आदत नहीं, बल्कि सदियों पुरानी मान्यताएं, संस्कृति और एक खास सोच छिपी है.

ऋतु सिंह | Apr 08, 2026, 08:15 PM IST

1.सिर्फ आदत नहीं, एक पुरानी परंपरा

सिर्फ आदत नहीं, एक पुरानी परंपरा
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शराब की पहली बूंद ज़मीन पर डालना कोई नया ट्रेंड नहीं है. यह एक ऐसी परंपरा है, जो अलग-अलग संस्कृतियों में अलग अर्थ लेकर मौजूद रही है. इसे कई जगह “अर्पण” के रूप में देखा जाता है,यानी पीने से पहले किसी अदृश्य शक्ति, प्रकृति या पूर्वजों को सम्मान देना.
 

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2.दुनिया भर में क्यों किया जाता है ऐसा?

दुनिया भर में क्यों किया जाता है ऐसा?
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दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के कई हिस्सों में भी लोग पीने से पहले कुछ बूंदें ज़मीन पर गिराते हैं. इस परंपरा को “लिबेशन” कहा जाता है, जिसमें किसी पेय को धरती पर अर्पित करके सम्मान जताया जाता है. कुछ संस्कृतियों में इसे पूर्वजों को याद करने का तरीका माना जाता है, तो कहीं इसे प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का संकेत समझा जाता है.
 

3.भारतीय मान्यता: सुरक्षा और सम्मान का भाव

भारतीय मान्यता: सुरक्षा और सम्मान का भाव
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भारत में इस प्रथा को कई लोग आध्यात्मिक नजरिए से भी जोड़ते हैं. मान्यता है कि पहली बूंद किसी रक्षक शक्ति या देवता को समर्पित की जाती है, ताकि नकारात्मक ऊर्जा से बचाव हो सके. कुछ परंपराओं में इसे भैरव से भी जोड़ा जाता है, जिन्हें रक्षक माना जाता है. इस नजरिए से यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक बन जाती है.
 

4.“पहले देना, फिर लेना” की सोच

“पहले देना, फिर लेना” की सोच
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अगर गहराई से देखें, तो यह परंपरा एक बड़े सिद्धांत को भी दिखाती है—पहले अर्पण, फिर उपभोग. यानी जो भी हमारे पास है, उसे सीधे इस्तेमाल करने से पहले उसका एक हिस्सा प्रकृति, समाज या किसी बड़ी शक्ति को समर्पित करना. यह सोच हमें याद दिलाती है कि हर चीज सिर्फ हमारे लिए नहीं होती, बल्कि उसका एक हिस्सा साझा भी होता है.
 

5.क्या सच में नकारात्मकता से जुड़ा है?

क्या सच में नकारात्मकता से जुड़ा है?
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कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि शराब नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकती है, इसलिए पहली बूंद ज़मीन पर डालकर उस प्रभाव को कम करने की कोशिश की जाती है. हालांकि, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन यह विश्वास लोगों के व्यवहार और परंपराओं का हिस्सा जरूर बन चुका है.
 

6.यह प्रथा आज भी इसलिए जिंदा है क्योंकि...

यह प्रथा आज भी इसलिए जिंदा है क्योंकि...
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यह प्रथा आज भी इसलिए जिंदा है क्योंकि यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भावना और संस्कृति से जुड़ी है. चाहे आप इसे आस्था मानें, आदत समझें या सिर्फ एक सांस्कृतिक संकेत यह हमें यह जरूर सिखाती है कि छोटी-छोटी चीजों के पीछे भी गहरी कहानियां छिपी होती हैं.

7.सिर्फ एक अजीब आदत नहीं

सिर्फ एक अजीब आदत नहीं
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शराब की पहली बूंद ज़मीन पर डालना सिर्फ एक अजीब आदत नहीं, बल्कि एक ऐसी परंपरा है जो सम्मान, आभार और सुरक्षा की भावना से जुड़ी है.यह आपको मानना है या नहीं, यह आपकी सोच पर निर्भर करता है- लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी इसे खास जरूर बना देती है.

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्रों पर आधारित है, इसे विशेषज्ञ सलाह न मानें. हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है. 

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