लाइफस्टाइल
ऋतु सिंह | May 16, 2026, 09:22 PM IST
1. बहुत खास है ये एयरपोर्ट

ये एयरपोर्ट सिर्फ पर्यटन के लिए खास नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां की हर उड़ान मौसम, पहाड़ और तकनीक के बीच एक संतुलन की तरह होती है. (फोटो एआई)
2.लेह का यह एयरपोर्ट क्यों माना जाता है सबसे खास?

लद्दाख में स्थित कुशोक बकुला रिमपोची एयरपोर्ट समुद्र तल से करीब 10,682 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है. यही वजह है कि इसे भारत का सबसे ऊंचा कमर्शियल एयरपोर्ट कहा जाता है. इतनी ऊंचाई पर हवा सामान्य जगहों की तुलना में काफी पतली होती है, जिससे विमान संचालन आसान नहीं रहता.
यात्रियों के लिए यह सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि हिमालय के बीच खुलने वाला ऐसा दरवाजा है जहां पहुंचते ही दुनिया बदलती हुई महसूस होती है. चारों ओर सूखे पहाड़, बर्फीली चोटियां और शांत घाटियां इसे किसी दूसरे ग्रह जैसा दृश्य बना देती हैं. (फोटो एआई)
3.लेह का यह एयरपोर्ट क्यों माना जाता है सबसे खास?

लद्दाख में स्थित कुशोक बकुला रिमपोची एयरपोर्ट समुद्र तल से करीब 10,682 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है. यही वजह है कि इसे भारत का सबसे ऊंचा कमर्शियल एयरपोर्ट कहा जाता है. इतनी ऊंचाई पर हवा सामान्य जगहों की तुलना में काफी पतली होती है, जिससे विमान संचालन आसान नहीं रहता.
यात्रियों के लिए यह सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि हिमालय के बीच खुलने वाला ऐसा दरवाजा है जहां पहुंचते ही दुनिया बदलती हुई महसूस होती है. चारों ओर सूखे पहाड़, बर्फीली चोटियां और शांत घाटियां इसे किसी दूसरे ग्रह जैसा दृश्य बना देती हैं. (फोटो एआई)
4.यहां लैंडिंग करना पायलटों के लिए भी आसान नहीं

आम एयरपोर्ट की तरह यहां लंबा खुला मैदान नहीं है. रनवे के दोनों तरफ ऊंचे पहाड़ मौजूद हैं. ऐसे में विमान को बेहद नियंत्रित तरीके से घाटी के बीच उतारना पड़ता है. यही कारण है कि यहां केवल विशेष प्रशिक्षण प्राप्त पायलटों को ही उड़ान संचालन की अनुमति मिलती है.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां मौसम कुछ ही मिनटों में बदल सकता है. तेज हवाएं, अचानक बादल और कम दृश्यता फ्लाइट ऑपरेशन को चुनौतीपूर्ण बना देते हैं. इसी वजह से अधिकांश उड़ानें सुबह के समय ही संचालित की जाती हैं. (फोटो एआई)
5.यात्रियों को क्यों दी जाती है पहले दिन आराम की सलाह

लेह पहुंचने के बाद कई पर्यटकों को सिरदर्द, सांस फूलना या थकान जैसी समस्याएं महसूस होती हैं. इसका कारण कम ऑक्सीजन स्तर है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि यहां पहुंचने के बाद पहले 24 घंटे ज्यादा भागदौड़ न करें और शरीर को वातावरण के अनुसार ढलने का समय दें.
दरअसल, आजकल सोशल मीडिया पर लोग लेह ट्रिप को सिर्फ फोटो और बाइक राइड से जोड़कर देखते हैं, लेकिन कम लोग जानते हैं कि यहां की ऊंचाई शरीर पर कितना असर डाल सकती है. यही वजह है कि विशेषज्ञ पानी ज्यादा पीने और आराम करने की सलाह देते हैं. (फोटो एआई)
6.यह एयरपोर्ट सिर्फ पर्यटन नहीं, सुरक्षा के लिए भी बेहद अहम

कुशोक बकुला रिमपोची एयरपोर्ट का संचालन भारतीय वायु सेना भी करती है. चीन और पाकिस्तान सीमा के करीब होने की वजह से यह एयरपोर्ट सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जरूरत पड़ने पर सेना की रसद और आपात ऑपरेशन में इसकी भूमिका काफी अहम हो जाती है.
यानी यह एयरपोर्ट सिर्फ खूबसूरत लैंडिंग के लिए मशहूर नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था का भी मजबूत हिस्सा है. यही कारण है कि यहां सुरक्षा नियम बाकी एयरपोर्ट्स की तुलना में अधिक सख्त नजर आते हैं. (फोटो एआई)
7.क्यों लोगों की ट्रैवल बकेट लिस्ट में तेजी से शामिल हो रहा लेह

पिछले कुछ वर्षों में लेह सिर्फ एडवेंचर ट्रैवल नहीं, बल्कि ‘एक्सपीरियंस टूरिज्म’ का बड़ा केंद्र बन गया है. लोग यहां सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि प्रकृति को महसूस करने आते हैं. फ्लाइट से उतरते ही जो दृश्य दिखाई देता है, वही इस सफर को यादगार बना देता है.
यही वजह है कि कई ट्रैवल ब्लॉगर्स इसे “भारत की सबसे खूबसूरत एयर लैंडिंग” तक कहने लगे हैं. खासकर विंटर सीजन में जब पहाड़ पूरी तरह बर्फ से ढक जाते हैं, तब यह अनुभव और भी रोमांचक हो जाता है. (फोटो एआई)
8.लेह का यह एयरपोर्ट क्या बताता है

लेह का यह एयरपोर्ट हमें यह एहसास कराता है कि तकनीक और इंसानी कौशल मिलकर प्रकृति की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी रास्ता बना सकते हैं. जहां एक तरफ यह जगह रोमांच देती है, वहीं दूसरी तरफ शरीर, मौसम और सुरक्षा के महत्व को भी समझाती है. (फोटो एआई)
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