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वेंटिलेटर पर मरीज को कब रखा जाता है? क्या मशीन पर जाने का मतलब अंतिम समय आना होता है?

अक्सर हम सुनते आए कि कोई मरीज वेंटिलेटर पर गया तो लौट के वापस नहीं आता, लेकिन ये कितना सच है और कब किसी मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत होती है और वेंटिलेटर पर जा कर लौटके आने की कितनी उम्मीद होती है. चलिए समझते हैं.

ऋतु सिंह | Feb 21, 2026, 09:38 AM IST

1. वेंटिलेटर पर जाना यानी मौत!

 वेंटिलेटर पर जाना यानी मौत!
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जब भी किसी मरीज के वेंटिलेटर पर होने की खबर आती है तो परिवार और समाज में डर फैल जाता है. अक्सर लोग मान लेते हैं कि मरीज अपने आखिरी समय में है. लेकिन मेडिकल साइंस में वेंटिलेटर मौत का नहीं, बल्कि जीवन बचाने का सबसे अहम सपोर्ट सिस्टम होता है. आज हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि वेंटिलेटर क्या है, कब इसकी जरूरत पड़ती है और वेंटिलेटर पर मरीज के जीवित रहने की संभावना कितनी होती है.
 

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2.वेंटिलेटर क्या होता है?

वेंटिलेटर क्या होता है?
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वेंटिलेटर एक एडवांस मेडिकल मशीन होती है जो मरीज को सांस लेने में मदद करती है. जब कोई व्यक्ति खुद से पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं ले पाता, तब यह मशीन फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालती है. वेंटिलेटर मरीज के लिए कृत्रिम सांस की तरह काम करता है.
 

3.किन मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है?

किन मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है?
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वेंटिलेटर हर मरीज के लिए नहीं बल्कि गंभीर स्थितियों में लगाया जाता है. कुछ मेडिकल कंडीशन्स जैसे गंभीर निमोनिया, कोविड, अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी में या सिर या रीढ़ की गंभीर चोट (Brain Injury / Spine Injury) लगने पर मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत होती है. कई बार फेफड़ों में पानी भरने (Pulmonary Edema), या सेप्सिस या मल्टी-ऑर्गन फेल्योर और हार्ट अटैक के दौरान सांस रुकने या सर्जरी के बाद एनेस्थीसिया से सांस लेने में परेशानी होने पर भी वेंटिलेटर लगाया जाता है. डॉक्टर तभी वेंटिलेटर लगाते हैं जब ऑक्सीजन मास्क या दवाओं से सांस नहीं सुधरती है.

4.वेंटिलेटर कैसे काम करता है?

वेंटिलेटर कैसे काम करता है?
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वेंटिलेटर पर जब मरीज होता है तो मुंह या गर्दन से एक ट्यूब फेफड़ों तक डाली जाती है. मशीन सांस लेने और छोड़ने का टाइम सेट करती है. इससे ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुंचती है और शरीर को जीवन रक्षक सपोर्ट मिलता है. कई बार मरीज पूरी तरह बेहोश नहीं होता, बल्कि हल्की सेडेशन दी जाती है ताकि वह आराम से सांस ले सके. (Photo Credit:AI )

5.वेंटिलेटर पर मरीज के बचने की संभावना कितनी होती है?

वेंटिलेटर पर मरीज के बचने की संभावना कितनी होती है?
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यह सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है कि वेंटिलेटर पर जानें के बाद मरीज के बचने की संभावना कितनी होती है? मेडिकल डेटा और क्लिनिकल ऑब्जर्वेशन के अनुसार हल्की बीमारी या कम उम्र में 50–80% तक रिकवरी संभव होती है. लेकिन गंभीर बीमारी, बुजुर्ग उम्र या मल्टी ऑर्गन फेल्योर में 20–40% तक बचने की संभावना ही रहती है. वहीं ICU में मल्टी-ऑर्गन फेल्योर होने पर मृत्यु दर ज्यादा हो सकती है. यानी वेंटिलेटर मौत की सजा नहीं, बल्कि जीवन बचाने का आखिरी और सबसे मजबूत सहारा है. (Photo Credit:AI )

6.मरीज को कितने समय तक वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है?

मरीज को कितने समय तक वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है?
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किसी मरीज को कितने समय तक वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है ये मरीज की स्थिति पर निर्भर करती है. कुछ मरीज को सर्जरी या किसी बीमारी के बाद कुछ घंटे या कुछ दिन रखा जाता है. जबतक शरीर खुद से सांस लेना या हार्ट-लंग्स खुद से काम न करने लगें. वहीं ब्रेन इंजरी, गंभीर संक्रमण में कई हफ्ते भी लग सकते हैं. जैसे ही मरीज खुद सांस लेने लगता है, डॉक्टर वेंटिलेटर हटाना शुरू कर देते हैं (Weaning Process). (Photo Credit:AI )

7.वेंटिलेटर को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियां

वेंटिलेटर को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियां
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वेंटिलेटर को लेकर सबसे बड़ा मिथक ये है कि वेंटिलेटर मतलब आखिरी स्टेज और वेंटिलेटर पर जाने के बाद कोई वापस जिंदा नहीं लौटता है. जबकि वेंटिलेटर जान बचाने के लिए ही लगाया जाता है और मरीज अक्सर ठीक होकर ही यहां से निकलते हैं. (Photo Credit:AI )

8.क्या वेंटिलेटर मौत का संकेत है?

क्या वेंटिलेटर मौत का संकेत है?
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नहीं. वेंटिलेटर मौत नहीं, बल्कि जिंदगी की आखिरी उम्मीद और मेडिकल टेक्नोलॉजी का चमत्कार है. मरीज का बचना उम्र, बीमारी, ऑर्गन फंक्शन और समय पर इलाज पर निर्भर करता है. सही समय पर वेंटिलेटर मिलने से हजारों मरीज नई जिंदगी पा चुके हैं. डरने के बजाय सही जानकारी रखना ही सबसे बड़ा इलाज है. (Photo Credit:AI )

 

9.ये बात समझ लें

ये बात समझ लें
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सच्चाई ये है कि वेंटिलेटर ICU का लाइफ-सेविंग टूल है. हर घंटे मरीज की मॉनिटरिंग होती है. वेंटिलेटर आधुनिक ICU का सबसे जरूरी उपकरण है. WHO और ICU गाइडलाइंस के अनुसार यह critical care का स्टैंडर्ड पार्ट है.   (Photo Credit:AI )

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