लाइफस्टाइल
ऋतु सिंह | Sep 06, 2025, 11:32 AM IST
1.मामला 2 राजघराने से जुड़ा है

मामला सिंघिया राजघराने से जुड़े सरदार आंग्रे की पौत्री कात्यायनी आंग्रे और इंदौर राजघराने के अर्जुन काक के विवाह विवाद का है. मामले पर फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति सूर्य कांत, जोयमाला बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि अर्जुन, कात्यायनी को सवा दो करोड़ रुपये देंगे. पहली किस्त में एक करोड़ के साथ कात्यायनी के स्वजनों से प्राप्त किए सभी तरह के उपहार लौटाने होंगे. 30 नवंबर तक सवा करोड़ की अंतिम किस्त देनी होगी.
2.क्यों थी ये एतिहासिक कार खास

इस पूरी कहानी में दिलचस्प बिंदु 1951 में बनी विंटेज रोल्स रायस कार है. बताया जाता है कि पूरी दुनिया में ये अपने तरह की इकलौती कार है. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन महारानी चिमना बाई साहिब गायकवाड़ के कहने पर ये कार बनवाई और मंगवाई थी. इस कार की मौजूदा कीमत ढाई करोड़ रुपये आंकी गई है. मौजूदा वक्त में कार का मालिकाना हक महिला के पिता के पास है.
3.हाई प्रोफाइल ग्वालियर राजघराने का है मामला

ग्वालियर राजघराने से जुड़ा होने की वजह से तलाक का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. कात्यायनी ग्वालियर के सिंधिया राजघराने से ताल्लुक रखती हैं और अर्जुन काक के पिता अनिल काक रिटायर्ड कर्नल हैं और उनकी मां मंगेश काक का संबंध इंदौर राजघराने से है. उनका दावा है कि उनके पूर्वज छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना में एडमिरल थे और कोंकण इलाके के शासक बनाए गए थे.दोनों की शादी 18 अप्रैल 2018 को ऋषिकेश में हुई थी.
4.विलासिता और शिल्प कौशल के लिए ये कार जानी जाती हैं

रोल्स रॉयस कार को भारत में राजा-महाराजाओं की कार समझा जाता रहा है. अपनी विलासिता और शिल्प कौशल के लिए ये कार जानी जाती है. ये राजसीपन के शान का प्रतीक थी और इसलिए नेहरू ने ऐसी प्रतिष्ठित कार को गिफ्ट के लिए चुना था. भारतीय राजे-महाराजा भी इस कार को अपने पास रखने के लिए दीवाने रहते थे. रोल्स रॉयस की एक खासियत ये भी थी कि वो यूं ही किसी को अपनी कार नहीं बेचती थी बल्कि उसका बैकग्राउंड और आर्थिक स्थिति के साथ हैसियत भी चेक करती थी. इसके बाद ही उन्हें कार बेचती थी.
5.2019 में फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायत

अर्जुन काक ने 2019 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने कात्यायनी और उनके परिवार पर फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने का आरोप लगाया था. अर्जुन ने हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी. उन्होंने ग्वालियर नगर निगम द्वारा जारी शादी के सर्टिफिकेट को रद्द करने तक की मांग की थी. हाई कोर्ट ने माना कि सर्टिफिकेट गलत तरीके से जारी किया गया था और इस सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया था.
6.2021 में कात्यायनी ने दर्ज कराया केस

2021 में कात्यायनी ने दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराया था और उनका आरोप था कि अर्जुन और उनके परिवार वाले रॉल्स रॉयस कार और मुंबई में फ्लैट मांग दहेज के रूप में कर रहे हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि कात्यायनी शादी के कुछ महीने बाद ही तलाक मांग रही थीं. 2021 में दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करा रही हैं. ऐसा लगता है कि अर्जुन द्वारा दर्ज कराई गई FIR का जवाब देने के लिए दहेज का मामला दर्ज कराया गया था.
7.2023 में भी की गई थी मामला सुलझाने की कोशिश

अगस्त 2023 में भी इस मामले को सुलझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह सफल नहीं रही. कोर्ट ने कहा था कि कात्यायनी और अर्जुन के बीच विवाद को सुलझाने के रास्ते खत्म हो गए हैं. हाई कोर्ट ने मध्यस्थता का मौका खत्म करते हुए मामले को सक्षम बेंच में भेजने का आदेश दिया था. मध्यस्थता के दौरान अर्जुन हर महीने 1.5 लाख रुपये देने को तैयार थे. लेकिन कात्यायनी ने 36 करोड़ रुपये और संपत्ति में हिस्सा मांगा था. इसलिए सुलह नहीं हो पाई.
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