लाइफस्टाइल
ऋतु सिंह | May 11, 2026, 06:28 AM IST
1.ट्रेन का आखिरी पड़ाव क्या होता है?

जिन ट्रेनों में हम सालों सफर करते हैं, कभी सोचा है कि उनका आखिरी सफर कैसा होता होगा? क्या पुरानी ट्रेनें सीधे कबाड़ में बेच दी जाती हैं आ उनकों संभाल के रखा जाता है? आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारतीय रेलवे में ट्रेनें सिर्फ पटरियों पर ही नहीं दौड़तीं, बल्कि रिटायर होने के बाद भी कई साल तक अलग-अलग काम में उनका यूज होता रहता है. चलिए आज आपको अपने मंजिल तक पहुंचाने वाली ट्रेन के आखिरी पड़ाव के बारे में बताते हैं. (फोटो एआई)
2.ट्रेनें कब मानी जाती हैं रिटायर?

भारतीय रेलवे में हर कोच और इंजन की एक तय उम्र होती है. पुराने ICF कोच आमतौर पर 25 से 30 साल तक यूज किए जाते हैं, जबकि आधुनिक LHB कोच करीब 35 साल तक चल सकते हैं. लेकिन सिर्फ उम्र ही फैसला नहीं करती. अगर किसी ट्रेन की मरम्मत बहुत महंगी होने लगे, तकनीक पुरानी पड़ जाए या सुरक्षा पर असर पड़ने लगे, तो उसे समय से पहले भी सेवा से हटया जा सकता है. यही कारण है कि रेलवे समय-समय पर पुराने कोचों को बदलता रहता है. (फोटो एआई)
3.रिटायर होने के बाद खत्म नहीं होती ट्रेन की कहानी

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय रेलवे पुरानी ट्रेनों को सीधे बेकार नहीं मानता. कई पुराने यात्री कोचों को मॉडिफाई करके माल ढोने वाले डिब्बों में बदला जाता है. इन्हें New Modified Goods यानी NMG कोच कहा जाता है. इन डिब्बों से सीटें, पंखे, लाइट और बाकी यात्री सुविधाएं हटाकर अंदर का ढांचा मजबूत किया जाता है ताकि इनमें कार, ट्रैक्टर और छोटे कमर्शियल वाहन ले जाए जा सकें. यानी जो ट्रेन कभी लोगों को मंजिल तक पहुंचाती थी, वही बाद में समान पहुंचाने का काम करने लगती है. (फोटो एआई)
4.पुराने डिब्बों से रेलवे कैसे कमाता है पैसा?

रेलवे के लिए यह सिर्फ रीसाइक्लिंग नहीं, बल्कि कमाई का भी बड़ा जरिया है. जब कोई कोच पूरी तरह अनुपयोगी हो जाता है, तब उसे स्क्रैप यार्ड में भेजा जाता है. वहां ट्रेन को काटकर उसमें से लोहा, स्टील, कॉपर, एल्युमिनियम और दूसरे कीमती मटेरियल अलग किए जाते हैं. सीटें, बैटरी, एसी यूनिट और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स दोबारा इस्तेमाल या रीसायकल किए जाते हैं. इससे रेलवे का खर्च भी कम होता है और पर्यावरण पर दबाव भी घटता है. (फोटो एआई)
5.कुछ ट्रेनें बन जाती हैं इतिहास का हिस्सा

हर ट्रेन का अंत स्क्रैप में नहीं होता. कुछ ऐतिहासिक और विरासत ट्रेनों को म्यूजियम में संरक्षित किया जाता है. कई पुराने इंजन और कोच हेरिटेज टूरिज्म का हिस्सा बन जाते हैं. इससे नई पीढ़ी को रेलवे के इतिहास और तकनीकी विकास को करीब से देखने का मौका मिलता है. यही वजह है कि कुछ पुरानी ट्रेनें रिटायर होने के बाद भी लोगों की यादों में जिंदा रहती हैं. (फोटो एआई)
6.किसी न किसी रूप में जारी रहता है सफर

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में 1,000 से अधिक लोकोमोटिव और 37,000 से अधिक कोच और मालगाड़ी के डिब्बे सेवा से हटा दिए गए हैं. कुछ ऐतिहासिक ट्रेनों को संग्रहालयों में रखा जा रहा है या विरासत यात्राओं के लिए संरक्षित किया जा रहा है. यानि इन ट्रेनों की कहानी खत्म नहीं हुई. कोई मालगाड़ी बन गई, कोई संग्रहालय पहुंच गई और कोई फिर से नए रूप में रेलवे की सेवा में लौट आई. यही वजह है कि भारतीय रेलवे में ट्रेनों का सफर पटरियों से उतरने के बाद भी जारी रहता है. (फोटो एआई)
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.