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शिलाजीत का बाप है ये जंगली गोंद, मटर के दाने बराबर खाकर मुगल बढ़ाते थे ताकत और मानसिक सुकून  

एक जंगली पर्वतीय रेज़िन को शिलाजीत का बाप माना गया है क्योंकि ये सदियों से ताकत और ऊर्जा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता आया है. खनिजों से भरपूर यह प्राकृतिक पदार्थ मुगलकाल में भी पुरुष अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति और सुकून के लिए खाते थे. ये एक शक्तिशाली सुपरफूड माना गया है.

ऋतु सिंह | Dec 06, 2025, 12:23 PM IST

1. इसका नाम है सिलाजित राल

 इसका नाम है सिलाजित राल
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भारत में शिलाजीत को सदियों से ताकत और ऊर्जा बढ़ाने वाले पदार्थ के रूप में जाना जाता है, लेकिन आयुर्वेद में एक ऐसा जंगली पदार्थ भी मिलता है जिसे कई विशेषज्ञ शिलाजीत का फादर तक बताते हैं. इसका नाम है सिलाजित राल (Wild Mineral Resin) या कई इलाकों में जैतूनिया/काला मोम के रूप में जाना जाने वाला प्राकृतिक खनिज मिश्रण. यह ऊँचे पहाड़ी इलाकों की चट्टानों के बीच से निकलता है और लंबे समय तक जैविक पदार्थों के दबने से तैयार होता है.
 

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2.मुगल काल में दवाओं में कई तरह की जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता था

मुगल काल में दवाओं में कई तरह की जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता था
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इतिहासकारों के अनुसार मुगल काल में शाही खान-पान और दवाओं में कई तरह की जड़ी-बूटियों और खनिज तत्वों का प्रयोग होता था. इन्हीं में यह जंगली खनिज राल भी शामिल था, जिसे ऊर्जा, पुरुषों की स्टैमिना और शरीर की मजबूती बढ़ाने वाले प्राकृतिक स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. इस पदार्थ को गर्म पानी या दूध के साथ घोलकर औषधि के रूप में लिया जाता था.
 

3.क्यों कहा जाता है इसे शिलाजीत का फादर?

क्यों कहा जाता है इसे शिलाजीत का फादर?
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आयुर्वेदिक विशेषज्ञ बताते हैं कि पहाड़ों से निकलने वाली यह जंगली राल पोषक तत्वों, खनिजों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. कई प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है और इसे रस-रसायन श्रेणी में रखा गया है. माना जाता है कि पर्वतीय राल में प्राकृतिक खनिजों की मात्रा सामान्य शिलाजीत की तुलना में अधिक होती है. इसी वजह से जानकार इसे शिलाजीत का पिता कहने लगे.
 

4.मुगल काल में क्यों था इतना लोकप्रिय?

मुगल काल में क्यों था इतना लोकप्रिय?
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ऐतिहासिक पुस्तकें बताती हैं कि मुगल काल में राजा, नवाब और सेनापति अक्सर पहाड़ी औषधियों का सेवन करते थे ताकि लम्बी दूरी की यात्राओं में ऊर्जा बनी रहे, थकान कम हो. शरीर मजबूत रहे. मानसिक एकाग्रता बनी रहे. इन गुणों के कारण यह पदार्थ शाही रसोईघर और दवा खाने का हिस्सा था.

5.आज फिर क्यों हो रहा है चर्चा का विषय?

आज फिर क्यों हो रहा है चर्चा का विषय?
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आजकल कई लोग प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों की चर्चा बढ़ी है. इसी वजह से यह जंगली पहाड़ी पदार्थ फिर से सुर्खियों में आ गया है.

डॉक्टरों की सलाह है कि ऐसी किसी भी पारंपरिक जड़ी-बूटी को बिना विशेषज्ञ मार्गदर्शन के नहीं लेना चाहिए, क्योंकि उसकी शुद्धता, खुराक और प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है.

6.मटर के बराबर लेकर ही मिलती थी आद्भुत शक्ति

मटर के बराबर लेकर ही मिलती थी आद्भुत शक्ति
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रॉ रेज़िन (काला/भूरा शुद्ध रेज़िन) दिन में केवल मटर के दाने के बराबर ही लेना होता है. यानी ¼–½ ग्राम लेकर ही आपकी स्टेमिना बढ़ जाती है. सुबह खाली पेट ¼ ग्राम और रात में अगर कमजोरी या सुस्ती महसूस हो तो ¼ ग्राम. 1 ग्राम/दिन से ज़्यादा लेना बहुत हानिकारक होता है क्योंकि रेज़िन मिनरल-डेंस होता है. इसे गुनगुने पानी में पूरी तरह से घुलने का बाद लेना होता या रात को गुनगुने दूध मेंपुरुषों में ऊर्जा/स्टैमिना बढ़ाने का पारंपरिक तरीका है. 

 
 

7.इसे किसे नहीं लेना चाहिए?

इसे किसे नहीं लेना चाहिए?
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जिन लोगों को  उच्च रक्तचाप, किडनी की समस्या, यूरिक एसिड, हार्मोनल समस्या हो या जो महिलाए गर्भवती हों उन्हें ये बिलकुल नहीं लेना चाहीए क्योंकि इसकी गरम तासीर कई दिक्कतें पैदा कर देगी. ये दिल की धड़कन तेज कर देती है. 
 

8.ध्यान रखें ये बात

ध्यान रखें ये बात
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हालाँकि, आधुनिक विज्ञान अभी तक इस पदार्थ पर सीमित शोध ही कर पाया है. इसलिए इसके किसी भी प्रभाव, लाभ या दावे को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता. विशेषज्ञ केवल यही सलाह देते हैं कि जंगली राल जैसी पारंपरिक चीज़ों का इस्तेमाल डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करना चाहिए.

Disclaimer: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है.  डीएनए इसकी पुष्टी नहीं करता है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें.

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