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ऋतु सिंह | Dec 15, 2025, 06:52 AM IST
1.वंदे मातरम की चर्चा के बाद ये उठा सवाल

हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में राष्ट्रगान, वंदे मातरम पर चर्चा हुई. इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. बाद में अन्य नेताओं ने भी चर्चा को आगे बढ़ाया. लेकिन अब एक और सवाल उठ रहा है: भारत माता की जय का नारा सबसे पहले किसने लगाया था? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.
2.मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी ने गढ़ा था भारत माता की जय

भारत माता की जय का प्रेरणादायक नारा 165 वर्ष पूर्व मुस्लिम समुदाय के एक वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी द्वारा गढ़ा गया था. वे 1857 के विद्रोह के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक थे.
3.इन्होंने दिया था 'भारत माता की जय' का नारा ?

यह प्रेरणादायक नारा 165 वर्ष पूर्व मुस्लिम समुदाय के एक अनुभवी स्वतंत्रता सेनानी अज़ीमुल्लाह खान द्वारा गढ़ा गया था. वे 1857 के विद्रोह के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक थे. ऐसा माना जाता है कि अज़ीमुल्लाह खान प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण रणनीतिकार थे. देशभक्ति के नारे के रूप में 'भारत माता की जय' का प्रयोग करने वाले वे पहले व्यक्ति थे.
4. नाना साहब द्वितीय पेशवा के दीवान थे

अज़ीमुल्लाह खान बिठूर में नाना साहब द्वितीय पेशवा के दीवान और करीबी सलाहकार थे. इंग्लैंड की राजनीतिक यात्रा के दौरान यूरोपीय राजनीतिक संस्कृति से परिचित होने से उनकी राष्ट्रवाद की समझ विकसित हुई.
5.एकता आंदोलन की भावनात्मक नींव रखी थी

भारत लौटने के बाद अज़ीमुल्लाह खान ने एकता आंदोलन की भावनात्मक और वैचारिक नींव रखना शुरू किया और इसी भावना से 'भारत माता की जय' का नारा उभरा. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि उनका यह नारा उर्दू वाक्यांश "माताओं की भूमि, हिंदुस्तान जिंदाबाद" से प्रेरित था.
6.1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका

अज़ीमुल्लाह खान 1857 के विद्रोह के प्रमुख विचारकों और योजनाकारों में से एक थे. वे राजनीति, रणनीति और मनोविज्ञान पर आधारित रणनीतिकार थे. जब अंग्रेजों ने लंदन में पेशवा की पेंशन की अर्जी ठुकरा दी, तो साम्राज्य के अन्याय से क्रोधित होकर अज़ीमुल्लाह खान भारत लौट आए.
7.उपनिवेशवाद विरोधी भावना फैलाकर एकता की बीज बोया

उन्होंने उत्तर भारत का भ्रमण किया और वहां के राजनीतिक माहौल का जायजा लिया. उन्होंने गठबंधन बनाए और उपनिवेशवाद विरोधी भावना फैलाकर विद्रोह के प्रयासों को संगठित किया.
8.'पयाम-ए-आज़ादी की स्थापना की

उन्होंने हिंदी और उर्दू में प्रकाशित होने वाले क्रांतिकारी समाचार पत्र 'पयाम-ए-आज़ादी' की स्थापना भी की. यह समाचार पत्र ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रचार का एक शक्तिशाली हथियार बन गया. तात्या तोपे या रानी लक्ष्मीबाई के विपरीत, अज़ीमुल्लाह खान एक अग्रणी नेता नहीं थे. उनकी ताकत योजना बनाने में थी. उन्होंने कानपुर की घेराबंदी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने ब्रिटिश कमांडर सर ह्यू व्हीलर के साथ आत्मसमर्पण की शर्तों पर बातचीत करने में मदद की और विद्रोह के नेतृत्व का मार्गदर्शन किया, जो 1857 की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक थी.
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