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क्यों सोने से भी महंगी मिलती है कस्तूरी, जानें इसकी पीछे की वजह और कीमत

जब भी हम किसी धार्मिक स्थल पर जाते हैं, तो वहां कई लोग असली कस्तूरी बेचने का दावा करते हैं.कहा जाता है कि कस्तूरी में तेज़ सुगंध होती है. कस्तूरी का धार्मिक महत्व भी बहुत है. इसे कई बीमारियों में भी फायदेमंद माना जाता है. तो फिर सवाल यह है कि कस्तूरी आती कहां से है...

Nitin Sharma | Dec 04, 2025, 08:54 AM IST

1.कस्तूरी सोने से महंगी क्यों है, कस्तूरी कैसी दिखती है, इसकी कीमत क्या है

कस्तूरी सोने से महंगी क्यों है, कस्तूरी कैसी दिखती है, इसकी कीमत क्या है
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दुनिया में कई कीमती चीज़ें हैं, लेकिन एक प्राकृतिक चीज़ भी है जिसकी क़ीमत सोने और हीरे से भी ज़्यादा है. ये कोई धातु या रत्न नहीं है, उस पदार्थ का नाम है कस्तूरी. फिर आप सोच रहे होंगे कि इसमें ऐसा क्या है, जिसके लिए इसकी तस्करी भी देश में होती है और वैज्ञानिक इसे चिकित्सा का चमत्कार मानते हैं. ये कैसी दिखती है, कहां मिलती है और इतनी महंगी क्यों बिकती है? आइए जानते हैं...

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2.कस्तूरी का है विशेष धार्मिक महत्व

कस्तूरी का है विशेष धार्मिक महत्व
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जब भी हम किसी धार्मिक स्थल पर जाते हैं, तो कई लोग असली कस्तूरी बेचने का दावा करते नज़र आते हैं. कहा जाता है कि कस्तूरी में तेज़ खुशबू होती है. कस्तूरी का धार्मिक महत्व भी बहुत है. इसे कई बीमारियों में भी फायदेमंद माना जाता है.

3.यहां से मिलती है कस्तूरी

यहां से मिलती है कस्तूरी
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कस्तूरी मृग में पाया जाने वाला एक थैलीनुमा पदार्थ है. यह हिरण की नाभि के आसपास पाया जाता है. कहा जाता है कि इसकी सुगंध इतनी तीव्र होती है कि हिरण खुद इसकी सुगंध से परेशान हो जाता है और इससे बचने के लिए जंगल में भटकता रहता है, लेकिन उसे पता ही नहीं चलता कि यह सुगंध उसकी अपनी नाभि से आ रही है.

4.हर हिरण में होता है यह अंग

हर हिरण में होता है यह अंग
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, कुछ नर हिरणों में कस्तूरी ग्रंथि नामक एक अंग होता है, जो एक तरल पदार्थ का उत्पादन करता है. यह तरल पदार्थ एक जगह इकट्ठा होता है, जिसे कस्तूरी कहते हैं. यह नाभि और जननांगों के बीच स्थित होता है और एक छिद्र से निकलता है.

5.श्यान द्रव के रूप में होता है ये पदार्थ

श्यान द्रव के रूप में होता है ये पदार्थ
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यह पहले एक श्यान द्रव के रूप में दिखाई देता है और फिर धीरे-धीरे ठोस रूप में बदल जाता है. इसमें मैक्रोसाइक्लिक कीटोन, पाइरीडीन, स्टेरॉयड, फैटी एसिड, अमीनो एसिड, पेप्टाइड्स और प्रोटीन होते हैं, और इसका मुख्य घटक मेस्कोन माना जाता है.

6.नर हिरणों में मिलता है कस्तूरी 

नर हिरणों में मिलता है कस्तूरी 
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कस्तूरी हिमालयी कस्तूरी हिरन में पाई जाती है. इसका वैज्ञानिक नाम मस्कस क्राइसोगो है. यह केवल नर हिरणों में ही पाई जाती है. हिरण जितना छोटा होता है, उसमें उतनी ही अधिक कस्तूरी होती है. ऐसे हिरण एशिया में भी पाए जाते हैं. इस हिरण में अन्य हिरणों की तरह सींग नहीं होते. दुनिया में ऐसे कई जानवर हैं जिनकी ग्रंथियाँ कई सुगंधित पदार्थों का स्राव करती हैं.

7.हिरणों की तस्करी की जाती है

हिरणों की तस्करी की जाती है
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कस्तूरी की सुगंध इतनी तेज़ होती है कि इसका उपयोग इत्र, सेंट आदि बनाने में किया जाता है. कई चिकित्सा पद्धतियों में इसका उपयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है. इसका धार्मिक महत्व भी है. इसकी उच्च मांग के कारण, इन हिरणों की तस्करी भी की जाती है. इसकी सुगंध इतनी तेज़ होती है कि इसके थोड़े से द्रव्य से बहुत सारा इत्र बनाया जा सकता है.

8.काफी महंगे मिलते हैं इससे बने प्रॉडक्ट

काफी महंगे मिलते हैं इससे बने प्रॉडक्ट
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कस्तूरी की कीमत हिरण की प्रजाति पर निर्भर करती है. वहीं इससे बने प्रॉडक्ट भी बाज़ार में काफ़ी महंगे मिलते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका पाउडर बाज़ार में 30 हज़ार रुपये प्रति किलो तक बिकता है.

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