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Karmic Defect: ये 5 आदतें बनती हैं 'कर्म दोष' का कारण, कहीं आप तो नहीं कर रहे हैं ये गलतियां 

Bad Habits: इंसान हर समय किसी न किसी रूप में कर्म करता ही रहता है, कर्म सिर्फ बाहरी काम नहीं होते, बल्कि हमारे विचार और भावनाएं भी कर्म मानी जाती हैं, जिनका फल हमें जरूर मिलता है. जब हमारी आदतें और सोच नकारात्मक होती हैं, तो वे अशुभ कर्म बन जाती हैं और आगे चलकर जीवन में परेशानियां पैदा करती हैं. 

Abhay Sharma | Feb 08, 2026, 07:47 PM IST

1.'कर्म दोष' का कारण बनती हैं ये आदतें

'कर्म दोष' का कारण बनती हैं ये आदतें
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कर्म सिर्फ बड़े फैसलों या कामों तक सीमित नहीं होते, बल्कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे व्यवहार भी हमारे कर्मों को प्रभावित करते हैं. कई बार कुछ आदतें, अनजाने में किए गए व्यवहार भी हमारे कर्मों में दोष पैदा कर देते हैं, जिसका असर हमारे भाग्य और जीवन पर पड़ता है. आइए जानें ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में.. 

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2.दूसरों की निंदा करने की आदत

दूसरों की निंदा करने की आदत
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किसी की बुराई करना या अपमान करना नकारात्मक सोच और ऊर्जा फैलाता है, बिना सोचे-समझे कड़वे शब्द बोल देने से सामने वाले को गहरी ठेस पहुंचती है. यह आदत हमारे कर्मों में दोष पैदा करती है, लापरवाही से बोले गए शब्द रिश्तों में तनाव भी बढ़ा देते हैं. इससे नकारात्मक परिणाम झेलना पड़ता है. 

3.सब कुछ लेने की आदत या किसी का हक़ छीनना

सब कुछ लेने की आदत या किसी का हक़ छीनना
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जब हम रिश्तों, समय या भावनाओं में दूसरों से ज्यादा लेते हैं और बदले में कुछ नहीं देते, तो असंतुलन पैदा होता है. इससे न केवल रिश्ते बिगड़ते हैं, बल्कि कर्मों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. कहा जाता है इससे पाप कर्म बढ़ने लगते हैं. 

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4.भावनाओं को दबाकर रखने की आदत

भावनाओं को दबाकर रखने की आदत
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गुस्सा, नफरत, दुख या जलन जैसी भावनाओं को मन में दबाकर रखना सही नहीं माना जाता है, दबी भावनाएं अंदर ही अंदर नकारात्मक ऊर्जा बन जाती हैं. इससे तनाव, डर और मानसिक परेशानी बढ़ती है, जो कर्म दोष का कारण बन सकती है. 

5.आत्म-नियंत्रण की कमी

आत्म-नियंत्रण की कमी
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इसके अलावा जब इंसान अपनी इच्छाओं और लालसाओं पर काबू नहीं रख पाता, तो मन अस्थिर हो जाता है. भले ही उस समय सुख महसूस हो, लेकिन इससे गलत आदतें बढ़ती हैं और कर्म प्रभावित होते हैं. इसका आगे चलकर भाग्य और भविष्य पर भी पड़ता है.

 

6.डर के आधार पर फैसला लेने की आदत

डर के आधार पर फैसला लेने की आदत
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डर की वजह से अपने सपनों को छोड़ देना या सच बोलने से बचना गलत कर्मों को बढ़ाता है, भय नकारात्मक ऊर्जा है, जो हमें आगे बढ़ने से रोकती है और सही फैसले लेने नहीं देती है. यह आदत भी कर्म दोष को बढ़ा सकती है. 

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